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लखनऊ

आईबी के सूचना संकलन कार्य में दखल नहीं दे सकतीं अदालतें

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को इंटेलिजेंस ब्यूरो(आईबी) तथा राज्य अभिसूचना विभाग द्वारा कथित राजनैतिक अभिसूचना संकलन में दुरुपयोग रोके जाने के सम्बन्ध में निर्देश देने की उनकी अपनी सीमायें हैं। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस डीके अरोरा की बेंच ने यह आदेश आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा दायर पीआईएल में किया। बेंच ने कहा कि संविधान ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का स्पष्ट विभाजन कर रखा है। अदालतों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह संतुलन किसी स्थिति में बिगड़े नहीं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को इंटेलिजेंस ब्यूरो(आईबी) तथा राज्य अभिसूचना विभाग द्वारा कथित राजनैतिक अभिसूचना संकलन में दुरुपयोग रोके जाने के सम्बन्ध में निर्देश देने की उनकी अपनी सीमायें हैं। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और जस्टिस डीके अरोरा की बेंच ने यह आदेश आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा दायर पीआईएल में किया। बेंच ने कहा कि संविधान ने कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का स्पष्ट विभाजन कर रखा है। अदालतों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यह संतुलन किसी स्थिति में बिगड़े नहीं।

बेंच ने कहा कि उनके लिए कार्यपालिका को यह निर्देश देना बहुत दुष्कर है कि वे किस प्रकार की अभिसूचनाओं का संकलन करें या ना करें। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार कार्यपालिका को यह भी निर्देश नहीं दिया जा सकता है कि वे चुनाव सम्बंधित सूचनाएं एकत्र नहीं करें क्योंकि चुनाव कार्य पर नियंत्रण निर्वाचन आयोग का कार्य है। अदालत के लिए यह निर्णय करना बहुत मुश्किल है कि कब चुनाव सम्बंधित अभिसूचना व्यापक राष्ट्रहित का प्रश्न बन जाए।

केंद्र और राज्य सरकार के अधिवक्तागण ने पीआईएल की पोषणीयता पर यह कहते हुए सवाल खड़े किये कि याचीगण ने पिछले चार सालों में 121 पीआईएल किये हैं, जिस पर कोर्ट ने कहा कि अधिक संख्या में पीआईएल दायर करने मात्र से किसी व्यक्ति की नीयत पर शंका नहीं की जा सकती।

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