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दिल्ली

मीडिया को ब्लैकमेल कर मुफ्त प्रचार पाते केजरीवाल

Sanjaya Kumar Singh : आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल ने भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी के बाद अब राहुल गांधी से भी पूछा है कि उनकी हवाई यात्राओं का खर्च कहां से आता है। नरेन्द्र मोदी की ही तरह राहुल गांधी भी केजरीवाल की इस चिट्ठी का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं, जवाब नहीं देंगे और फिर केजरीवाल कहेंगे देखा, जायज स्रोत से होता तो बताते, बताने लायक नहीं है इसलिए नहीं बताया आदि और इस तरह वे अपने अभियान में लगे रहेंगे।

Sanjaya Kumar Singh : आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल ने भाजपा नेता नरेन्द्र मोदी के बाद अब राहुल गांधी से भी पूछा है कि उनकी हवाई यात्राओं का खर्च कहां से आता है। नरेन्द्र मोदी की ही तरह राहुल गांधी भी केजरीवाल की इस चिट्ठी का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं हैं, जवाब नहीं देंगे और फिर केजरीवाल कहेंगे देखा, जायज स्रोत से होता तो बताते, बताने लायक नहीं है इसलिए नहीं बताया आदि और इस तरह वे अपने अभियान में लगे रहेंगे।

दूसरों को जनता की नजर में बदनाम करते हुए अपनी ईमानदारी चमकाते रहेंगे। यह सोची समझी योजनाबद्ध शरारत है और स्थितियां ऐसी हैं कि कोई इस शैतानी को रोक नहीं पा रहा है। जिसे बदनाम किया जा रहा है वह जेब से पैसे खर्च कर अदालत जाए और अदालत से जब तक कार्रवाई नहीं होगी तब तक यह चंदे के पैसे वाला भोंपू बजता रहेगा। यह अरविन्द केजरीवाल या यूं कहिए कि आम आदमी पार्टी की रणनीति है। और इतनी कामयाब कि विदेशी चंदे से ज्यादा का विज्ञापन पार्टी को मुफ्त में हो रहा है और इसका खर्च दिखाने की भी जरूरत नहीं है। विरोधियों को मुफ्त में बदनाम कर रहे हैं सो अलग।

पार्टी ने रविवार को रोहतक से अपने लोकसभा चुनाव अभियान की शुरुआत की। इसमें आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के साथ-साथ कांग्रेस, उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मुकेश अंबानी के एजेंट हैं और दोनों उनकी दो जेब में हैं। पहले की ही तरह केजरीवाल ने ये आरोप बिना किसी आधार के लगाए हैं और कोई सबूत भी नहीं दिया है। फिर भी यह खबर मीडिया में प्रमुखता के साथ आई। दरअसल केजरीवाल इसी तरह आरोप लगाते रहते हैं और राजनीतिज्ञों के साथ-साथ मीडिया को भी गालियां देते हुए अपना स्वार्थ साध रहे हैं। मीडिया भी आरोपों से बचने के लिए, आरोपित अखबार / चैनल समूह से अलग रहने और दिखने के लिए निराधार आरोपों को भी प्रमुखता देता है। ना दे तो मीडिया बेईमान, प्रमुखता दे तो केजरीवाल का काम हो गया। और मीडिया में इतनी ईमानदारी नहीं है कि अरविन्द केजरीवाल के आरोपों से लापरवाह रहे। ना ही उसकी साख ऐसी है कि इसका कोई असर ना हो।

अभी तक की उनकी राजनीति और प्रचार से यह साबित हो चुका है कि उनके पास करने के लिए कुछ खास नहीं है और सिर्फ आरोप लगाकर वे लोकप्रियता बटोर रहे हैं तथा अपनी साख बना रहे हैं। खुद चंदे से अपना खर्च चलाने वाले केजरीवाल जानते हैं कि मीडिया को कैसे नियंत्रित रखना है। इसीलिए, एक मामले में उनकी प्रेस कांफ्रेंस की खबर प्रकाशित प्रसारित करने वाले मीडिया संस्थानों को अंबानी ने कानूनी नोटिस भिजवाया तो केजरीवाल ने अंबानी से कहा था कि मीडिया को नोटिस ना भेजें आरोप उन्होंने लगाए हैं इसलिए चाहें तो उन्हें नोटिस भेजे। मीडिया ने इसे भी खूब हवा दी। और आम लोगों ने भी इसे उनकी बहादुरी और ईमानदारी माना था पर इसके पीछे की उनकी चाल को भांपने से रह गया। इसीलिए केजरीवाल अपने अलावा सबको बेईमान बताते हैं और यह साबित करने में लगे हैं कि वे अकेले ईमानदार हैं।

मीडिया शत प्रतिशत ईमानदार नहीं है इसलिए बेईमान होने के आरोपों से बचने के लिए केजरीवाल के आरोपों को बिना जांचे-परखे प्रचारित-प्रसारित कर रही है और इसका उन्हें भरपूर लाभ मिल रहा है। क्योंकि केजरीवाल को उन्हीं की शैली में कोई और जवाब नहीं दे रहा है। केजरीवाल ने जो स्थिति बनाई है उससे देश में स्वस्थ, मजबूत और ईमानदार मीडिया की जरूरत और महत्त्व समझ में आ रही है। यह भी समझ में आने लगा है कि मीडिया ईमानदार नहीं हो, उसकी साख न हो तो क्या कुछ कैसे हो सकता है। राजनीतिक दलों के साथ-साथ इस बात पर मीडिया वालों को भी विचार करने की जरूरत है। क्योंकि देश में कानून ऐसे नहीं हैं कि इस तरह के आरोप लगाने वालों को तुरंत रोका जा सके। जब तक यह संभव होगा ऐसा व्यक्ति काफी नुकसान कर चुका होगा।

लेखक संजय कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं. जनसत्ता समेत कई अखबारों में प्रमुख पदों पर काम कर चुके हैं. काफी वक्त से स्व-उद्यमी हैं और अनुवाद का काम संगठित तौर पर करते हैं. उनसे संपर्क [email protected] या 09810143426 के जरिए किया जा सकता है.

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