Kanwal Bharti : प्रमोद रंजन जैसे भाजपा समर्थक पत्रकार को प्रेमकुमार मणि जैसे लेखक से कोई शिकायत नहीं है, जो बिहार में नितीश कुमार का दामन पकड़कर एमएलसी बनते हैं, सत्ता का उपभोग करते हैं और अब नितीश कुमार को छोड़ कर लालू यादव का दामन थामे हुए हैं. वे उन्हें प्रखर चिंतक कहते हैं. लेकिन कांग्रेस से जुड़े कँवल भारती उनकी आँखों में इसलिए चुभते हैं, क्योंकि मैंने 'फारवर्ड प्रेस' का बहिष्कार कर दिया है. वे उदित राज से मेरी तुलना करने लगे हैं.
वह यही नहीं जानते कि उदित राज और कँवल भारती में क्या अंतर है? उन्हें मालूम होना चाहिए की मैं न राजनेता हूँ, न कोई संगठन चलाता हूँ, और न मेरी कोई खवाइश MP, MLA बनने की है, जैसी कि उदित राज और प्रेमकुमार मणि की है.
कांग्रेस से जुड़ने के बाद भी राहुल गाँधी की आलोचना करने की जो हिम्मत मैंने दिखायी है, वह हिम्मत क्या प्रेमकुमार मणि लालू की और उदित राज मोदी की आलोचना करके दिखा सकते हैं? कभी नहीं दिखा सकते, क्योंकि वे राजनीतिक स्वार्थों के व्यक्ति हैं. ऐसे लोग, जो मेरे बारे में कुछ नहीं जानते, मेरी आलोचना करके सिर्फ मुंह की ही खा सकते हैं. मैं कांग्रेसी परिवार से हूँ, मेरे पिता भी कांग्रेसी थे. मेरा परिवार तब से कांग्रेसी है, जब उसका चुनाव निशान ‘दो बैलों की जोड़ी’ हुआ करता था. मैं कांग्रेस से जुड़कर भी कभी अँधा कांग्रेसी नहीं बन सकूँगा. मेरा मुकाबला न उदित राज कर सकते हैं और न प्रेमकुमार मणि. मेरी ज़मीन लोकतंत्र और सामाजिक परिवर्तनवादी आंदोलनों की है, जो मेरे लेखन में पूरी निर्भीकता से हमेशा रहेगी.
जाने-माने दलित चिंतक और साहित्यकार कंवल भारती के फेसबुक वॉल से.





