Zafar Irshad : कल रात सपा विधायक और मेडिकल कॉलेज के जूनियर डाक्टरों के बीच पथराव के बाद पुलिस ने भी लाठियां भांजी, लेकिन इसकी ज़द में आ गए कई टीवी कैमरामैन और पत्रकार… कई का कैमरा टूटा, और कई की हड्डियां.. जो लोग पत्रकारों की नौकरी को ऐश वाली नौकरी कहते हैं, और दलाल कहते हैं, वो देख लें कि क्या उन्होंने अपनी नौकरी के दौरान मुफ्त में बिना किसी गलती के लाठियां खायी हैं, हड्डियां तुड़वाई हैं…
कहना बहुत आसान होता है कि पत्रकार की नौकरी बहुत ऐश की होती है, करो और हड्डिया तुड़वाओ तो जानें.. इसके अलावा दिन, रात, सन्डे, कोई त्यौहार, कुछ नहीं होता है हमारे लिए, 24 घंटे के नौकर होते है हम.. आपकी तरह 11 बजे सोना और 5 दिन काम फिर ऐश ही ऐश.. पत्रकार बनो लाठी खाओ दिन रात जागो तो जानो कि यह कैसा जोखिम भरा पेशा हैं….
पीटीआई कानपुर में कार्यरत जफर इरशाद के फेसबुक वॉल से.
मूल खबर:
कानपुर में सरकारी गुंडा बनी पुलिस, डाक्टरों के बाद मीडियाकर्मियों पर तोड़ी लाठियां






