गोरखपुर : देवरिया जनपद मुख्यालय से पच्चीस किमी उत्तर बसे तरकुलवा विकास खण्ड क्षेत्र के गांव बरवां सेमरा में बसी दो हजार आबादी के सब्र का बांध बुधवार को टूट गया। आजादी के बाद से अब तक बिजली की रोशनी को मोहताज ग्रामीणों की गाढ़ी कमाई हर वर्ष छोटी गंडक के पेट में समा जाती है। नदी के कटान पर वर्षो से ठोकर बनाने की मांग कर रहे ग्रामीणों का गला सूख चुका है। उनकी रहनुमाई का दावा करने वाले हर वर्ष उन्हें आश्वासन देते रहे। लेकिन उनकी आवाज को अंजाम नहीं मिल सका।विधान सभा चुनाव में वोट के लिए नेताओं की आवाजाही तेज होते ही ग्रामीणों के सब्र का बांध टूट गया। और बुधवार बच्चे, बूढे़, नौजवान, महिलाएं सभी मतदान के बहिष्कार का ऐलान कर प्रदर्शन करते हुए सड़क पर निकल पड़े।
सनद् रहे कि तरकुलवा विकास खण्ड क्षेत्र से गुजरने वाली छोटी गंडक नदी के कटान पर ठोकर न बनने से अब तक एक दर्जन घर नदी की धारा में विलीन हो चुके हैं। बाकी एक-एक कर हर वर्ष अपना वजूद खोते जा रहे हैं। दो दशक के भीतर हर चुनाव में सभी दलों के नेता नदी की कटान पर ठोकर बनाने और गांव को बिजली की सुविधा मुहैया कराने का आश्वासन देकर वोट तो लेते हैं लेकिन अभी तक परिणाम
सिफर है। ग्रामीणों का कहना है कि सूबे में दलितों की मसीहा होने का दावा करने वाली बहिन जी की सरकार में भी दलित बस्ती के निवासियों को बिजली की रोशनी मयस्सर नहीं हो पाई। सियासी दलों की वायदा खिलाफी से खफा दलित बस्ती के निवासी रामनयन, भुआल, राम सकल, रामबेलास, अंगद, रामकृपाल, सुरेश, नंदलाल, सत्यप्रकाश, सत्राजीत, शिवनाथ, रामकिशुन, सुभाष, धर्मेन्द्र समेत सैकड़ों बच्चे, बूढे़ नौजवान मुन्ना यादव के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए ऐलान किया है कि चुनाव के दौरान वोट नहीं डालेंगे।
गुरुवार को प्रशासनिक अधिकारियों का हुजूम बरवां सेमरा गांव पहुंच गया। अधिकारियों ने क्षुब्ध ग्रामीणों से मुलाकात कर चुनाव बाद मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया तथा उनसे मतदान में शामिल होने के लिए हामी भरवाई। इसकी जानकारी होते ही सदर एएसडीएम पुष्पराज सिंह लाव लश्कर सहित बरवा सेमरा गांव पहुंच गए और ग्राम प्रधान सावित्री देवी सहित आंदोलन के अगुवा मुन्ना यादव से मिले और छोटी गंडक नदी के कटान तथा दलित बस्ती में जाकर भ्रमण किया। इसके साथ ही ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत हुए।





