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लखनऊ

दस दिनों में हटाएं आपराधिक इतिहास वालों की सुरक्षा: उप्र हाई कोर्ट

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा सुरक्षाकर्मियों के दुरुपयोग के सम्बन्ध में दायर पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज उत्तर प्रदेश सरकार से 10 दिनों में आपराधिक इतिहास वाले सभी 288 व्यक्तियों की सुरक्षा हटाये जाने के आदेश पारित किये हैं। सुनवाई की अगली तिथि 07 अप्रैल निश्चित की गयी है। इस सूची में पूर्व मंत्री राम अचल राजभर, राकेशधर त्रिपाठी, दद्दू प्रसाद, नन्द गोपाल गुप्ता, पूर्व संसद हरीश नागपाल, डीपी यादव, पंकज चौधरी, बेगम नूर बानो, मंत्री राज किशोर सिंह के भाई बृज किशोर सिंह सहित कई पूर्व विधायक और समाजवादी पार्टी नेता शामिल हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा सुरक्षाकर्मियों के दुरुपयोग के सम्बन्ध में दायर पीआईएल में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने आज उत्तर प्रदेश सरकार से 10 दिनों में आपराधिक इतिहास वाले सभी 288 व्यक्तियों की सुरक्षा हटाये जाने के आदेश पारित किये हैं। सुनवाई की अगली तिथि 07 अप्रैल निश्चित की गयी है। इस सूची में पूर्व मंत्री राम अचल राजभर, राकेशधर त्रिपाठी, दद्दू प्रसाद, नन्द गोपाल गुप्ता, पूर्व संसद हरीश नागपाल, डीपी यादव, पंकज चौधरी, बेगम नूर बानो, मंत्री राज किशोर सिंह के भाई बृज किशोर सिंह सहित कई पूर्व विधायक और समाजवादी पार्टी नेता शामिल हैं।

जस्टिस इम्तियाज़ मुर्तजा और जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय की बेंच ने कहा है कि इन सभी लोगों की सुरक्षा तत्काल वापस ले कर आवश्यकता का आकलन करने के बाद अलग-अलग स्पष्ट लिखित आदेश के माध्यम से इनमें से मात्र उन्ही लोगों को सुरक्षा दी जाए जिसे इसकी वास्तविक आवश्यकता है। गृह सचिव कमल सक्सेना द्वारा दायर 429 पृष्ठों के हलफनामे में राज्य सरकार ने 288 आपराधिक इतिहास वालों के अलावा 562 ऐसे लोगों की सूची भी प्रस्तुत की जिन्हें शस्त्र लाइसेंस होने के बाद भी सुरक्षा प्रदान की गयी है। साथ ही उन 127 लोगों की सूची भी उपलब्ध कराई गयी जिन्हें विभिन्न कोर्ट के आदेश से सुरक्षा मिली है।

कोर्ट ने राज्य सरकार को शस्त्र लाइसेंस प्राप्त लोगों को सुरक्षा प्रदान नहीं करने की सलाह दी है। साथ ही यह भी कहा कि उनके हलफनामे से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि बिना सुरक्षा समिति की संस्तुति के प्रदान की गयी सुरक्षा में कितने लोगों की सुरक्षा हटाई गयी है। कोर्ट ने इस सम्बन्ध में स्पष्ट स्थिति से अवगत कराये जाने के आदेश दिए हैं।

 

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