Uday Prakash : आज सुबह भी ठीक से नहीं हो पायी थी और सोनभद्र, बनारस की थकान लंबी नींद के बाद भी ठीक से उतरी नहीं थी कि एक बहुत अच्छी खबर ने नये उत्साह से भर दिया. एक तरफ़ 'हिंदी' के चापलूस, गिरोहबाज़, जातिवादी, मीडियाकर तिकड़मियों की घृणा और दूसरी तरफ़ रचनाओं की निरंतर बढ़ती हुई अनायास विराट साहित्यिक स्वीकृति. महत्वपूर्ण एशियाई, अफ़्रीकी और लैटिन अमेरिकी साहित्य के जर्मन अनुवाद की सर्वश्रेष्ठ अनूदित कृतियों के अपने चयन के लिए विख्यात 'लिट-प्रोम' संगठन ने इस बार 'मोहन दास' के जर्मन अनुवाद को उत्कृष्टता की श्रेणी में पहला स्थान दिया है. यह एक निस्संदेह बड़ी सफलता है.
इसका अनुवाद, जैसा मैंने पहले भी लिखा था, प्रोफ़. इनेस फ़ोर्नेल और गौतम लियु ने गहरी संपृक्ति और समर्पण के साथ किया है. जिस चयन में 'मोहन दास' को उत्कृष्ट अनूदित रचना के रूप में पहला स्थान मिला है, उस सूची में इसराइल के विख्यात लेखक शानी बोइयांज्यू, जापान के सुप्रसिद्ध हारुइ मुराकामी, कन्नड़ के कालजयी कथाकार यू.आर.अनंतमूर्त्ति और हाइती के गैरी विक्टर के प्रसिद्ध उपन्यास भी हैं. निश्चय ही यह मेरे लिए और मेरे दोस्तों और पाठकों के लिए इस सुबह की अच्छी खबर है.
(अब हिंदी का घनघोर ब्राह्मणवादी लेखक और उसके लंपट गुमाश्ते जितना भी 'हेट-कैंपेन' चलाएं, अपना तो एक रोयां भी नहीं हिलता.)
सभी दोस्तों को आज की सुबह मुबारक !
http://www.litprom.de/projekte/weltempfaenger.html
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