उत्तर प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल के बारे में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा दायर पीआईएल में आज इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने पुलिस द्वारा की गयी कार्यवाही पर गहरी नाराजगी जताते हुए हड़ताल के सम्बन्ध में गठित न्यायिक समिति से पुलिस की भूमिका की विशेष रूप से जांच किये जाने के आदेश निर्गत किये.
मुख्य न्यायाधीश डॉ धनञ्जय यशवंत चंद्रचूड की अध्यक्षता वाली बेंच ने पुलिस द्वारा इस मामले में अकारण बल प्रयोग को गंभीर बताते हुए उस पर गहरी आपत्ति प्रकट की. उन्होंने डॉ ठाकुर द्वारा प्रस्तुत दो यूट्यूब वीडियो लिंक के आधार पर कहा कि इसे देख कर प्रथमद्रष्टया ऐसा लगता है कि पुलिस ने बिना वजह बल प्रयोग किया. कोर्ट ने ख़ास कर एक प्रोफ़ेसर और कुछ छात्रों को पुलिस द्वारा चारों तरफ से घेर कर मारने की घटना पर कड़ा ऐतराज़ दर्शाया.
कोर्ट ने कहा कि जांच में जो भी पुलिस अधिकारी दोषी पाया जाया है, उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही की जाए. साथ ही पुलिस कार्यवाही में घायल हुए लोगों को अतिशय बल प्रयोग के लिए दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के वेतन से मुआवजा प्रदान किया जाये. कोर्ट ने सुबह सुनवाई के समय यह आदेश दिए कि दो बजे प्रमुख सचिव गृह अनिल कुमार गुप्ता और प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा बी एस भुल्लर कोर्ट के सामने उपस्थित हो कर पूरी स्थिति से अवगत कराएं.
कोर्ट में इन अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म हो गयी है. उनकी बात सुनने के बाद आदेशित किया कि यदि कोई भी मेडिकल का छात्र सपा विधायक अथवा पुलिसवालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराना चाहता है, उनकी एफआइआर तत्काल दर्ज की जाए. साथ ही यह भी आदेश दिए कि इस सभी मुकदमों का पर्यवेक्षण डीजीपी स्वयं करेंगे. कोर्ट ने यह कहा कि इस प्रकार की घटनाओं का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है और सरकार को ऐसे सभी मामलों में बहुत चौकन्ना रहना चाहिए. अगली सुनवाई 10 मार्च को नियत की गयी है.





