यशवंत भाई, कलम की आजादी की चिंता करने के लिए कई राज्यों से पंजाब के तरनातरन में सैकड़ों पत्रकार इकट्ठे हुए। बस कलम की आजादी को लेकर कुछ एक देर आंशिक चिंता जताई, उसके बाद बस ऐसा लगा कि जैसे ये दारू की पार्टी के लिए ही कार्यक्रम था। नेशनल काउंसिल आफ इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन की दसवीं स्टेट कान्फ्रेंस में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ के पत्रकार शामिल हुए। यहां एक बेन्कवेट हाल में आज 6 मार्च से तीन दिवसीय कार्यक्रम शुरू हुआ।
आज दोपहर को थोड़ी बहुत पत्रकारिता की चिंता हुई। उसके बाद बस यही हलचल थी कि भाई दारू वाला पंडाल लग गया क्या? कितनी शराब आई है? कौन कौन से ब्रांड की आई है? इस बीच कई पत्रकारों ने कहा कि भाई थोड़ा शर्म तो करो अभी तो दोपहर बाद की चाय का वक्त ही हुआ है। दूसरे बोले छोड़ न यार कमाल कर दिया, दिन ढलते ही शराब का काम शुरू कर सकते हैं, बुराई ही क्या है? बस दिन ढला ही था कि जाम पे जाम खड़क गए। फिर नियम की दुहाई देने वाले पत्रकारों ने इतनी भारी मात्रा में शराब के तलाब में गोते लगाने के लिए एक्साइज की परमिशन भी नहीं कराई हुई थी।
यशवंत भाई मैं यहां पत्रकारिता की मान मर्यादा की धज्जियां उड़ते हुए एक गवाह के तौर पर देख रहा था। बस अभी जाम मेज पर सजे ही थे कि लगभग नब्बे प्रतिशत प्रतिभागी पत्रकार शराब पर ऐसे टूट कर पड़े कि बस आज नहीं तो कभी नहीं? मुझे ऐसे लगा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता की चिंता के नाम पर ये कोरा ड्रामा था ये तो मनोरंजन कार्यक्रम था वो भी शराब में डूबने का। काहे का पत्रकारिता सम्मेलन? ये कोरे धोके हैं। मैं इस रिपोर्ट के साथ आप को जाम खडकने वाली इस शाम की फोटो भी भेज रहा हूं।

एक भड़ास प्रेमी हरियाणा के प्रतिभागी पत्रकार ने मुझे फोन पर ये डिटेल डिक्टेट की और मैं अब इसे आपके सुपुर्द कर रहा हूं।
आपका नियमित सहयोगी
सोनू





