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शशि शेखर के चेले ने पीसीएस अधिकारी के धड़ पर अपना चेहरा चिपका कर अपने ही अखबार में छाप लिया फोटो!

वाह रे हिन्दुस्तान। एक तरफ देश के इस प्रमुख अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर जी अखबार के पहले पन्ने पर ईमानदारी और सिद्धांतों की दुहाई वाले लेख लिख रहे हैं तो दूसरी तरफ आगरा में हिन्दुस्तान को संभालने वाले उनके चेले बेईमानी का रिकार्ड तोड़ रहे हैं। आगरा की मीडिया में इन दिनों हिन्दुस्तान के सिटी चीफ मनोज मिश्रा की करतूत सुर्खियों में है। मामला थोड़ा पुराना जरूर है लेकिन शशि शेखर के हाल ही में प्रकाशित लेख के बाद चर्चा का विषय बन गया है।

वाह रे हिन्दुस्तान। एक तरफ देश के इस प्रमुख अखबार के प्रधान संपादक शशि शेखर जी अखबार के पहले पन्ने पर ईमानदारी और सिद्धांतों की दुहाई वाले लेख लिख रहे हैं तो दूसरी तरफ आगरा में हिन्दुस्तान को संभालने वाले उनके चेले बेईमानी का रिकार्ड तोड़ रहे हैं। आगरा की मीडिया में इन दिनों हिन्दुस्तान के सिटी चीफ मनोज मिश्रा की करतूत सुर्खियों में है। मामला थोड़ा पुराना जरूर है लेकिन शशि शेखर के हाल ही में प्रकाशित लेख के बाद चर्चा का विषय बन गया है।

बीते दिनों महाकवि गोपालदास नीरज फाउंडेशन के तत्वावधान में गायत्री कप का आयोजन कराया गया था। इसमें प्रशासन और दैनिक हिन्दुस्तान की टीम के बीच मैच हुआ था। हिन्दुस्तान की टीम ने प्रशासनिक अधिकारियों को हरा कर जीत दर्ज की। मैच के अंत में विजेता और उप विजेता टीम का ग्रुप फोटो हुआ। हिन्दुस्तान के सिटी चीफ मनोज मिश्रा इस मौके पर मौजूद नहीं थे। मैच के अगले दिन हिन्दुस्तान के पेज नंबर आठ पर 'सेमीफाइनल में पहुंचा हिन्दुस्तान' शीर्षक से खबर तीन कालम में फोटो के साथ प्रकाशित हुई तो अखबारी जगत के अलावा प्रशासनिक अधिकारों के यहां भी चर्चा का केन्द्र बन गई।

मैच स्थल पर नजर न आने वाले सिटी चीफ अपने ही अखबार में मैच की खबर के साथ लगे फोटो में एडीएम सिटी के बगल में खड़े नजर आ रहे थे। मनोज मिश्रा ने संपादक पुष्पेन्द्र शर्मा को विश्वास में लेकर अखबार के सिद्धांतों का मान-मर्दन कर खबर में लगे फोटो में खुद को फिट कराया था। मनोज मिश्रा ने एक पूर्वांचल निवासी पीसीएस अधिकारी के चेहरे पर अपना चेहरा चिपकवाया था। इस काम को अंजाम दिया था उनके चहेते फोटोग्राफर ने। जिस पीसीएस अधिकारी के चेहरे की जगह मनोज मिश्रा के चेहरे को लगाया गया था उसने पत्रकारों से इसकी चर्चा भी की थी। हिन्दुस्तान के एक रिपोर्टर ने संपादक पुष्पेन्द्र शर्मा को इसकी जानकारी दी तो संपादक ने उल्टा उसकी क्लास ले ली। इसके बाद संपादक के खौफ से यह मामला दब गया। मनोज मिश्रा पुष्पेन्द्र शर्मा के लिए वही स्थान रखते हैं जो शशि जी के लिए पुष्पेन्द्र शर्मा का स्थान है।

देखें असली और नकली तस्वीरें…

फोटो- परिचय : एम 1 यह ओरजनिल फोटो है। जो प्लेयर बैठे हैं और जो खड़े होकर विजय के प्रतीक चिहृन विक्टर का प्रदर्शन कर रहे हैं वह हिन्दुस्तान की टीम है। बाकी जो लोग खड़े हैं उनमें एडीएम सिटी व अन्य अधिकारी हैं। कैप लगाकर विजयी मुद्रा में बैठे हिन्दुस्तान के रिपोर्टर अमित पाठक के ठीक पीछे हाथ में ब्लैक कैप लिए खड़े हैं वह वो पीसीएस अधिकारी हैं जिनका चेहरा हटाकर मनोज मिश्रा ने अपना चेहरा फिट करवाकर अखबार में अपना फोटो छपवाया।


यह फोटो दैनिक हिन्दुस्तान में खबर के साथ प्रकाशित है। कैप लगाकर बैठे अमित पाठक के ठीक पीछे माथे पर तिलक और चश्मा लगाकर जो सज्जन खड़े हैं वही हिन्दुस्तान के सिटी चीफ मनोज मिश्रा हैं। इनकी गर्दन को ध्यान से देखिए, धड़ से मैचिंग नहीं है। दोनों फोटो देखकर साफ पता चल रहा है कि कट और पेस्ट का कमाल है। दूसरी पहचान यह है कि हिन्दुस्तान के बाकी खिलाड़ी की टीशर्ट के कालर सफेद हैं और इनका कालर काला है। तीसरा सबूत यह है कि माथे पर लगा ताजा टीका बता रहा है कि मंदिर से निकलते समय खिंचवाये गये फोटो के चेहरों को इस्तेमाल किया गया है। आप ही बताइये पूरा मैच हो जाए और खिलाडी के माथे का टीका पसीने में छूटे भी नहीं, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। जहां मैच हुआ वहां दूर-दूर तक कोई मंदिर नहीं जिससे ये कहा जाए कि जीत के बाद मंदिर पर मत्था टेककर आए होंगे। यदि ऐसा होता तो हिन्दुस्तान के एक दो खिलाडियों के चेहरे पर भी टीका नजर आता।


हिन्दुस्तान में कुछ दिन पहले पेज नंबर आठ पर छपी खबर और फोटो


उपरोक्त खबर आगरा से भड़ास के एक शुभचिंतक ने मेल किया है. अगर खबर से जुड़े या हिंदुस्तान अखबार से जुड़े किसी पात्र, चरित्र, व्यक्ति, अधिकारी को कुछ कहना है तो वे अपनी बात, प्रतिक्रिया, वर्जन भड़ास तक [email protected] पर मेल करके पहुंचा सकते हैं.

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