दैनिक जागरण, सिलीगुड़ी के सहयोगी गुस्से में हैं। सोमवार को यूनिट हेड जय हलधर ने जिस तरीके से संपादकीय प्रभारी गोपाल ओझा को पूरी संपादकीय टीम के सामने जलील किया और बदले में ओझा जी जिस नतमस्तक लहजे में खड़े रहे, सभी दूसरे संपादकीय सहयोगियों को लग रहा है कि ऐसे में तो प्रबंधन उनके साथ और बुरा बर्ताव कर सकता है। सोमवार को पाक्षिक मीटिंग थी। सबों को बुलाने का जिम्मा संपादकीय प्रभारी का ही होता है।
अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए गोपाल ओझा ने यूनिट हेड समेत सबों को मेल किया। नियत समय पर यूनिट हेड के सिवाय सभी जुट गए। यूनिट हेड ने कोई सूचना भी नहीं भेजी थी। दफ्तर से नियमित गायब रहने की हेड की आदत को भांप संपादकीयय प्रभारी ने मीटिंग शुरु कर दी।
प्रसार में इजाफा होने की सूचना से सभी संपादकीय सहयोगी गदगद थे। कोई दो महीने पहले ही आये संपादकीय प्रभारी को भी अपनी उपलब्धि पर नाज हो रहा था। मीटिंग खत्म कर सभी जाने को ही थे कि यूनिट हेड जय हलधर का आना हुआ। अपनी अनुपस्थिति में मीटिंग देख वे आग-बबूला हो गये। फिर वे सबों के सामने ही संपादकीय प्रभारी पर बरस पड़े।
सूचना देने की बात जब संपादकीय प्रभारी ने बतायी, तो उन्होंने झूठ करार दिया और अंगुली से इशारा करते हुए कहा कि औकात बता दूंगा। सबों को नाप देंगे। प्रभारी महोदय कुछ नहीं बोल पा रहे थे। अपने टीम लीडर को इस तरह असहाय देख सभी दूसरे सहयोगी सहम गए और यह मानने को मजबूर हो गये कि अब उन्हें यूनिट हेड के ही रहमोकरम पर रहना होगा।
एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित





