नई दिल्ली/वाराणसी। आम आदमी पार्टी (आप) के चर्चित नेता अरविंद केजरीवाल, नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनावी खूंटा गाड़ने के लिए काशी पहुंच ही गए। यहां के पहले ही ‘शो’ में संघ परिवार के कार्यकर्ताओं ने भारी विरोध की तैयारी कर ली थी। ऐसे में, रेलवे स्टेशन से लेकर बाबा विश्वनाथ मंदिर तक केजरीवाल के खिलाफ विरोध-प्रलाप जारी रहा। उन पर अंडे और काली स्याही से भी हमला किया गया।
कुछ मदमस्त कार्यकर्ताओं ने गाली-गलौच के अंदाज में भी नारेबाजी की। इस तरह के भी नारे उछाले, ‘गद्दार केजरीवाल वापस जाओ-वापस जाओ’। लेकिन, इस तरह के अशब्द नारों के बावजूद केजरीवाल मुस्कराते देखे गए। उन्होंने जगह-जगह यही कहा कि वे राजनीतिक व्यवस्था के बदलाव के लिए यहां आए हैं। चूंकि, मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, ऐसे में उनका लक्ष्य है कि ‘राजा’ को हरा दो, तो सेना अपने आप हार जाएगी। पूरे दिन मोदी समर्थकों ने उनके खिलाफ विरोध की लामबंदी की। लेकिन, केजरीवाल और उनकी कोर टीम सहज बनी रही। ये लोग अपने कार्यकर्ताओं को यही समझाते रहे कि वे भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ भड़के नहीं।
केजरीवाल, मंगलवार की सुबह शिवगंगा एक्सप्रेस से वाराणसी पहुंचे थे। यहां रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म के पास उनके समर्थकों और विरोधियों का जमावड़ा दिखाई पड़ा। भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता काले झंडे लेकर आए थे। इन्होंने नारे लगाए, ‘काशी को नहीं चाहिए, भगौड़ा नेता’। विरोधी जमात ने गंगा घाट से लेकर विश्वनाथ मंदिर तक नारेबाजी का सिलसिला बनाए रखा। महिषासुर घाट में एक सच्चे आस्थावान की तरह गंगा मैया को प्रणाम करके स्नान किया। इसके बाद उन्होंने भैरो घाट मंदिर में दर्शन किए। यहां के बाद वे काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। मंदिर के बाहर संघ परिवारी कार्यकर्ताओं का हुजूम जमा था। इन लोगों ने टीम केजरीवाल को मंदिर के दर्शन करना भी मुश्किल किया। उनका रास्ता रोकने की कोशिश की गई। इतने विरोध के बावजूद भी केजरीवाल झिल्लाए नहीं।
मंदिर के बाहर एक संघ परिवारी कार्यकर्ता ने उनकी कार पर अंडा फेंका। इसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया, तो उसने यह स्वीकार किया कि वह संघ परिवारी जमात का है। अपना गुस्सा इसलिए जताने आया, क्योंकि केजरीवाल देशभक्त मोदी के खिलाफ चुनावी डंका बजाने आए हैं। बाद में, रोड शो के दौरान लोहराबीर मोहल्ले में केजरीवाल और उनकी टीम पर काली स्याही फेंकी गई। स्याही से प्रचार गाड़ी में सवार पार्टी के सभी नेताओं के चेहरे और कपड़े खराब हो गए। लेकिन, इससे वे विचलित नहीं हुए। इतना ही बोले, भाई यह तो कम से कम काशी नगरी की संस्कृति नहीं है। उन्होंने कटाक्ष किया कि मोदी जैसे नेता के काशी में चरण पड़ते ही यहां कि संस्कृति भी लगता है प्रदूषित होने लगी है। वरना, काशी के लोग अपने मेहमानों का ‘स्वागत’ तो ऐसे नहीं करते।
केजरीवाल यही कहते रहे कि वे देश बचाने के लिए दिल्ली से लेकर वाराणसी तक संघर्ष कर रहे हैं। क्योंकि देश बचेगा, तो ही दिल्ली और काशी सुरक्षित रहेंगे। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा है कि राहुल गांधी और नरेंद्र मोदी में ज्यादा फर्क नहीं है। बस, चेहरे ही अलग हैं। इनके काम तो एक जैसे ही हैं। मोदी और राहुल के जीतने का मतलब है कि मुकेश अंबानी जैसे उद्योगपति और ताकतवर होंगे। ऐसा कुछ हुआ, तो ये लोग आम जनता का खून ज्यादा चूसेंगे। इसी शोषणवादी राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ वे हल्ला बोलने काशी तक आए हैं। उन्हें संसद में जाने का बहुत शौक नहीं है। बस, इतना चाहते हैं कि काशी की पवित्र नगरी मोदी को संसद जाने से रोक दे। यदि काशी की नगरी उनकी यह गुहार सुनती है, तो यह पूरे देश की जनता के लिए उसका शानदार कदम होगा। यही अपील करने वे यहां आए हैं। भाजपा के रणनीतिकार केजरीवाल को यहां मिले समर्थन को लेकर हैरान रह गए। क्योंकि, उन्हें यह लग रहा था कि जिस तरह से चारों तरफ मोदी के पक्ष में हवा है, ऐसे में केजरी समर्थक दुबक जाएंगे। लेकिन, नजारा उल्टा दिखाई पड़ा।
काशी विश्वविद्यालय के तमाम छात्र अचानक केजरीवाल के समर्थक बनकर आगे आ गए। इन्होंने संघ परिवारी कार्यकर्ताओं के खिलाफ मोर्चा लिया। यही कहा कि वे कम से कम दादागीरी की राजनीति करके काशी नगरी को बदनाम न करें। कई जगह कार्यकर्ताओं और छात्रों के बीच भिड़ंत की नौबत भी आई। केजरीवाल ने कह दिया कि वे डरने वाले नहीं हैं। चाहे, मोदी समर्थक स्याही की जगह तलवार चला दें। केजरी के साथ उनके कोर ग्रुप के सदस्य मनीष सिसौदिया और संजय सिंह भी साथ-साथ रहे। शाम को बेनियाबाग में एक रैली हुई। भाजपा नेताओं को उम्मीद थी कि मुश्किल से हजार-पांच सौ लोग ही जुट पाएंगे। लेकिन, देखते-देखते हजारों टोपीधारी समर्थक जुट गए। इन सबके तेवर मोदी विरोधी रहे। ‘आप’ के कार्यकर्ताओं ने नारे लगाए, ‘केजरीवाल तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’। मोदी के सामने चुनावी अग्निपरीक्षा में केजरीवाल के पैर कितना टिकेंगे, यह तो आने वाला समय बताएगा। लेकिन, केजरीवाल की निडरता देखकर काशी के तमाम लोग हैरान रहे। कइयों ने कहा कि कुछ भी हो, केजरीवाल की निडरता काबिल-ए-तारीफ तो है।
लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।





