Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

उमेश डोभाल स्मृति समारोह : विनय बहुगुणा, सुरेंद्र रावत ‘अंशु’ समेत कई पुरस्कृत

इस बार का 24वां उमेश डोभाल स्मृति समारोह प्रकृति की उपत्यिका के मध्य उत्तराखंड के केंद्र गैरसैण में सम्पन्न हुआ। इसमें पत्रकारिता, साहित्य और जनसरोकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। साथ में ‘गैरसैण के मायने’ पर चर्चा के साथ पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई।

इस बार का 24वां उमेश डोभाल स्मृति समारोह प्रकृति की उपत्यिका के मध्य उत्तराखंड के केंद्र गैरसैण में सम्पन्न हुआ। इसमें पत्रकारिता, साहित्य और जनसरोकार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया गया। साथ में ‘गैरसैण के मायने’ पर चर्चा के साथ पत्रकारिता के बदलते स्वरूप पर भी चर्चा हुई।

2013 का उमेश डोभाल युवा पत्रकारिता पुरस्कार (प्रिट मीडिया) विनय बहुगुणा (अमर उजाला, कर्णप्रयाग) और (इलेक्ट्रॉनिक मीडिया) सुरेंद्र रावत ‘अंशु’ (समाचार प्लस, चमोली) को आपदा विषयक खबरों के लिए दिया गया। इस साल का गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ जनकवि सम्मान कुमाऊंनी के सुप्रसिद्ध गायक/गीतकार हीरासिंह राणा को, राजेंद्र रावत ‘राजू’ जनसरोकार सम्मान चकबंदी की अलख जगाने के लिये गणेश सिंह ‘गरीब’ को एवं उमेश डोभाल स्मृति सम्मान लोक साहित्य के मर्मज्ञ साहित्यकार एवं लेखक मोहनलाल बाबुलकर को दिया गया। ‘गरीब’ एवं बाबुलकर के न आने पर इसे उनके प्रतिनिधियों ने ग्रहण किया।

गिर्दा सम्मान से सम्मानित लोकगायक हीरासिंह राणा ने कहा कि जो राज्य हमने लिया था वह उस राह पर नहीं जा रहा है। इसे लेकर उन्होंने अपनी नवीनतम कविता ‘त्यर पहाड़, म्येर पहाड़, रोय दुखों को ड्येर पहाड़’ सुनाई। इसके अलावा उन्होंने अपना सुप्रसिद्ध गीत ‘लश्का कमर बांधा, हिम्मता का साथा’ प्रस्तुत किया। इस अवसर पर पुरस्कृत पत्रकारों विनय बहुगुणा एवं सुरेन्द्र रावत ने भी विचार रखे।   

इसके अलावा वर्ष 2013 में बागेश्वर में हुए समारोह में ट्रस्ट के माध्यम से आयोजन जनपद/क्षेत्र के किन्ही दो प्रतिभावान बालक एवं बालिका को 25-25 हजार की राशि हर वर्ष प्रदान करने की घोषणा की थी ताकि उनको कुछ मदद मिल सके। यह सम्मान लखनऊ के डाक्टर जोशी द्वारा अपने माता एवं पिता की स्मृति में आरम्भ किया गया है। इस बार का सम्मान 2013 में बागेश्वर जनपद से इन्टर कक्षा में दो मेधावी बच्चों सोनाली नेगी और पंकज उपाध्याय को दिया गया, जिसे उनके अभिभावकों मोहन सिंह नेगी एवं नवीनचन्द्र उपाध्याय ने मंच पर ग्रहण किया।

समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि उत्तराखंड विधान सभा अध्यक्ष गोविंदसिंह कुंजवाल व मंचासीन लोगों के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा जुझारु साथियों उमेश डोभाल, राजेंद्र रावत राजू और गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पण से हुआ। इस बार आयोजन की थीम उत्तराखण्ड में गैरसैण के मायने रखी गई थी ताकि इस बहाने इस बिन्दु पर चर्चा हो सके।  अपने संबोधन में उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष गोविन्दसिंह कुंजवाल ने कहा कि आज अधिकतर विधायक और अफसर गैरसैंण के हित में नहीं हैं। यह राज्य आज भी उ.प्र. के पैटर्न पर ही चल रहा है।

गैरसैण में विधानसभा भवन के बहाने यदि नेता व अधिकारी यहां चार महीने भी बैठ सकें तो इससे पलायन पर कुछ रोक लगेगी। गैरसैंण में ऐसा होने से पहाड़ के विकास को गति मिल सकती है। उन्होंनें कहा कि उनके द्वारा रायपुर में नये बनाये जा रहे विधान सभा भवन के निर्माण का विरोध किया गया क्यों कि देहरादून में पहले से ही एक विधान सभा भवन है उसमें कोई कमी नहीं है। खेदजनक बात है कि आज हालत ऐसे बन गये हैं कि यहां का ग्रामीण भी गांवों में नहीं रहना चाह रहा है। राज्य निर्माण के बाद प्रदेश सरकारों ने गैरसैंण की अनदेखी की है।

उन्होंने कहा कि राज्य निर्माण के समय जो सोचा गया था वह राज्य बनने के बाद जमीन पर नहीं दिख रहा हैं। राजनीतिक नेताओं ने अगर अपने तौर तरीके नहीं बदले और राज्य आंदोलनकारियों और राज्य के विचारकों ने चुप्पी साधे रही तो नई पीढ़ी हमे कभी माफ नहीं करेगी। हमने गांवों की तरफ जाना शुरु करना होगा जो तेजी से वीरान हो रहे है।   

पूर्व प्रशासनिक अधिकारी सुरेन्द्र सिंह पांगती के न आने के कारण उनके द्वारा प्रेषि संदेश पढ़ा गया  जिसमें उन्होंने राज्य की संवैधानिकता को चुनौती देते हुये कई सवाल किये। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. वीरेन्द्र पैन्यूली ने कहा कि गैरसैण राज्य की आत्मा है यह सब राज्य के केन्द्र में हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ के विकास के लिये अलग नीति होनी चाहिये थी ताकि यह स्वयं में आत्मनिर्भर बन पाता लेकिन ऐसा नहीं हुआ आज राज्य में जो भी कार्य हो रहे हैं वह इसकी मूल भावना से हट कर हो रहे हैं जिससे यह रसातल की ओ अग्रसर है। पलायन इसकी सबसे बड़ी विभीषिका के रूप में उभरा है। भाकपा माले के इंद्रेश मैखुरी ने कहा कि उत्तराखंड हमारे सपनों के धराशायी होने का राज्य बन गया है जो नेताओं, नौकरशाहों और माफियाओं की जकड़बंदी में है। आज राज्य की जनता एकदम हताष हो चली है।

गैरसैण में कई सालों तक काम करने वाले हेम गैरोला ने कहा कि किस प्रकार वन पंचायतों पर काम करने हेम गैरोला ने अपने अनुभव बांटे और कहा बताया कि किस प्रकार से इसका लाभ मिला। पर्यावरण रोजगार, राजस्व और पलायन रोकने का जिसको यथार्थ में लाने के लिए पहाड़ की राजधानी पहाड़ में होनी जरुरी है। आयोजन के बीच हल्द्वानी से आये डॉ. पंकज उप्रेती ने जनगीत ‘जिसने मरना सीख लिया है, जीने का अधिकार उसी को’ प्र्रस्तुत किया।

इस समारोह का आयोजन श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम-प्लान इंडिया, गैरसैंण के पर्वतीय पत्रकार एसोसिएशन और चंद्र सिंह यायावर समिति के संयुक्त तत्वावधान में किया गया जिसमें बागेश्वर, पिथेरागढ, हल्द्वानी, रूद्रपुर, नैनीताल, टिहरी, हरिद्वार, पौड़ी, श्रीनगर, कर्णप्रयाग, चौखुटिया, रुद्रपयाग, गोपेश्वर  दिल्ली, लखनऊ, नोएडा आदि से प्रतिनिधि पहुंचे। मुख्य कार्यक्रम जिसे ब्लाक सभागार में होना था आचार संहिता की दुहाई देने के नाम पर उसे प्रशासन ने देने से इंकार कर दिया। जिसके बाद इसे भुवनेश्वरी महिला आश्रम के परिसर के मनमथन सभागर में किया गया। इस अवसर पर आयोजन की स्मारिका और पत्रकार रोहित जोशी की पुस्तक ‘उम्मीदों की निर्भयाएं’ का भी विमोचन भी हुआ।

ज्ञातव्य है कि 25 मार्च, 1988 के दिन गढ़वाल के प्रखर पत्रकार उमेश डोभाल की शराब माफिया ने निर्मम हत्या के बाद उनकी स्मृति में उनके मित्रों एवं पत्रकारों ने मिल कर 1991 में उमेश डोभाल स्मृति समिति का गठन किया और 25 मार्च 1991 से स्मृति समारोह आयोजित करने का सिलसिला आरम्भ किया। सन् 2003 से समिति को ट्रस्ट में बदल दिया गया। समय समय पर इसमें सम्मान और पुरस्कारों की संख्या बढी। आज इसके द्वारा समाज में साहित्य कला, संस्कृति और समाजसेवा के क्षेत्र में सम्मानों व 2 पत्रकारिता पुरस्कार दिये जा रहे हैं।

यह समारोह पत्रकारों साहित्य कला क्षेत्र में होने वाला सबसे बड़ा समारोह हैं जो 24 साल से अनवरत रुप से हो रहा है। समारोह में राज्य के कोने-कोने से पत्रकारिता, कला, संस्कृति, साहित्य और जनसरोकारों से जुड़े लोग एकत्र हो कर विभिन्न मुद्दों पर गंभीर विचार-विमर्श करते हैं। पुरस्कृत और सम्मानित लोगों को शॉल, स्मृति/प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह सहित 11000/- की धनराषि दी जाती है। इसके अतिरिक्त ट्रस्ट दूसरी विभिन्न गतिविधियां संचालित करता है।

दूसरे सत्र में बोलते हुये उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार पी.सी. तिवारी ने कहा कि आज जब जनता व समाज की अच्छाई करने की जब बात होती है तो न तो राजनीतिक दल समर्थन देते हैं और न कारपोरेट पत्रकारिता को ही उनमें मुद्दा लगता है। हमने राज्य के कई ज्वलन्त विषयों को समय समय पर सामने रखा लेकिन मजाल क्या किसी राजनीतिक दल ने उन पर आवाज बुलंद की हो या चर्चा ही की हो।

यह दुर्भाग्यूपर्ण है कि माफिया और बुराई के खिलाफ लड़ने वाले लोग अकेले पड़ जाते हैं और मंच सुशोभित करने वाले तटस्थ बने रहते हैं। जब तक लोग आन्दोलनकारियों का साथ नहीं देगे तब तक कुछ नहीं होने वाला है।  राजनीति दलों के नेताओं व अधिकारियों के गठजोड़ के कारण उनके ऐजेन्डे को बदलना इतना आसान नहीं है जिस कारण आज चारों ओर अराजकता व हताशा का साम्राज्य छाया हुआ है।

श्रीनगर से आये पत्रकार सीताराम बहुगुणा ने कहा कि आज समाचार पत्रांे कंी प्राथमिकता समाचार के बजाय विज्ञापन तक सीमित हो गई थी। समाचार पत्रों में विज्ञापन लाने वाले की ही ज्यादा पूछ है। पत्रकार कमीशन पर विज्ञापन लाते हैं और खबरों से खेलते हैं। एक समय समाचार पत्र समाचारों व धारदार लेखनी के लिये जाने जाते थे। पत्रकार अनुसूया प्रसाद ‘घायल’ ने कहा कि नैनीताल में हुये आयोजन के समय जनसत्ता के संपादक प्रभाष जोशी ने एक दम सही कहा था जो बात छुपाई जाती है वही खबर है। लेकिन आज खबरें दबाई जा रही है।

समाचार पत्र खबरें न छापने की कीमत वसूलने लगे हैं जो पीत पत्रकारिता से भी गम्भीर समस्या है। समाचार इससे विकृत हो रहा है। पर्वतीय पत्रकार परिषद संरक्षक पुरुषोत्तम असनोड़ा ने कहा कि छोटे छोटे स्थानों पर 30- 40 साल तक सेवा देने वाले पत्रकार आज भी समाचार पत्रों की नजरों में पत्रकार नहीं है। राज्य सरकार को ऐसे पत्रकारों को देखना चाहिये। राज्य सरकार यहां पर मजीठिया आयोग जैसा ही आयोग बनाये और उनके कार्य करने की हालत का अध्ययन कर अपनी सिफारिशे लागू करे। रामनगर से आये पत्रकार गणेश रावत ने कहा कि आज लोकगायक हीरासिंह राणा की जमीन को भूमाफिया के कब्जे से छुड़ा कर वापिस दिलाई जाय।

राजनीतिक पकड़ रखने वाले सुनील मंमगाई ने कहा कि गैरसैण में चन्द्रनगर में राजधानी बनाने के लिये झारखण्ड के सूरज मण्डल तो आते हैं लेकिन अपने राज्य के कर्णधार इसके नाम पर चुप है। पहाड़ को बसाये बगैर राज्य का भला संभव नहीं है। आज नेताओं के राजनीतिक चरित्र में बहुत गिरावट आ गई है और राज्य के नेता इससे अलग नहीं हैं। काशीपुर से आये प्रेम अरोड़ा ने गैरसैण के अलग अलग मतलब बताये और कहा कि वे यहां पर आकर अभिभूत हैं। हरिद्वार से आये पत्रकार त्रिलोक चन्द्र भट्ट कहा कि आज पत्रकारिता एक धन्धा बन कर रह गई है जनहित और जनसरोकार उससे काफी दूर हो चुके हैं। आज वह टी.आर.पी. के अनुसार अपनी प्राथमिकता तय करती है कि उसके लिये क्या समाचार है और क्या नहीं?   

समारोह में पुरुषोत्तम असनोड़ा, गिरीश डिमरी, रवि रावत, त्रिलोकचंद्र भट्ट, ओंकार बहुगुणा, गिरीश डोभाल, एस.एन.रतूड़ी, बीरेन्द्र नेगी, सुरेन्द्र सिंह रावत, अनुसूया प्रसाद घायल, घनश्याम, रतनमणी भटट, सुशील सीतापुरी, अयोध्या प्रसाद ‘भारती’, बी.सी. सिंघल, बीरेंद्र बिष्ट, कमल जोशी, महेश जोशी, केाव भट्ट, विजयबर्द्धन उप्रेती, घनश्याम जोशी, गिरीश डिमरी, कैलाश भटट, एल.डी. काला, रोहित जोशी, गजेंद्र नौटियाल, बी.एस.बुटोला, प्रेम संगेला, एच एस रावत, देवानन्द भटट, बी. शंकर थपलियाल, पूर्व प्रमुख सुरेन्द्र सिंह नेगी, नगर पंचायत अध्यक्ष, जोतसिंह रावत, अंकित फ्रांसिस, अमित चमोली, अरविंद पुरोहित, बसंत साह ‘कुसुमाकर’, दीपक नौटियाल, अनिल बहुगुणा, अजय रावत, जगमोहन डंागी, वीरेन्द्र बिष्ट आदि अनेक लोगों ने शिरकत की। पहुंचे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बी.मोहन नेगी ने अंत में आभार प्रकट करने के अलावा गैरसैण जैसे छोटे स्थान पर इसके सफल आयोजन पर सबको बधाई दी। समारोह का संचालन चंद्रसिंह भंडारी ‘चैतन्य’, महासचिव ललित मोहन कोठियाल, ट्रस्ट सहसचिव त्रिभुवन उनियाल ने संयुक्त रूप से किया गया।  

समारोह स्थल पर चित्रकार बी.मोहन नेगी ने अपनी कविता-पोस्टर प्रदर्शनी, गजेन्द्र रौतेला के द्वारा अपनी पुस्तक प्रदर्शनी के अतिरिक्त नैनीताल समाचार, पिघलता हिमालय प्रकाशन आदि ने अपनी किताबों के स्टाल लगाए। इसके अतिरिक्त गैरसैंण फल एवं मसाला उत्पादक स्वायत्त सहकारी समिति ने अपने जैविक उत्पादों ‘गैरसैंण फ्रैश’ का स्टाल लगाया जिससे लोगों ने अनेक उत्पाद खरीदे। इस अवसर पर ट्रस्ट के समक्ष कई प्रस्ताव आये जिन्हें स्वीकार किया गया, जो निम्नवत् हैं-

1- राज्य सरकार राज्य में कार्यरत पत्रकारों की आर्थिक हालत को समझे और उनके हितों के लिये श्रम कानूनों को लागू करें। जो मीडिया हाउस उससे जुड़े पत्रकारों को उचित वेतन नहीं देते हैं सरकार उन पर भी श्रम कानून लागू कर उचित वेतन दिलावने के लिये दबाब बनाये। अन्यथा ऐसा न करने वाले मीडिया हाउसों की विज्ञापन मान्यता ही रदद हो।  

2- पत्रकारों के साथ अनहोनी या बीमार होने पर उनको तत्काल सहायता देने का प्राविधान हो। देखा गया है कि इस पर कार्यवाही करने में बहुत देर हो जाती है। ऐसे मामलों में एम समय सीमा के तहत कार्यवाही हो। यदि समय पर कार्यवाही हो तो इसका लाभ है। ऐसा न करने पर पत्रकार के परिवार को प्रताड़ना झेलनी पडती है।

3- राज्य सरकार राज्य में तमिलनाडु और राजस्थान सरकार की भांति ही 60 साल तक पत्रकारिता की सेवा के लिये उनको पेंशन दें। तमिलनाडु में पत्रकारों को 6000 व राजस्थान में यह राशि 5000 पेशन है। ताकि पत्रकारिता करने वाले अपना वृद्ध जीवन सम्मान से काट सके। इसके लिये कठोर नियमावली बने ताकि पूर्णरूपेण पत्रकारिता करने वाले इससे लाभान्वित हों।

4- सरकार राज्य की मूल भावना को देखते हुये गैरसैण के मसले पर गौर करे और इस राज्य के विकास के लिये अपनी प्राथमिकतायंे तय करे।

5- राज्य में जिस प्रकार जमीन माफियाओं के कब्जे में जा रही हैं उसे रोकने के लिये अविलम्ब पहल हो व ऐसे कानून बने ताकि इसका स्वामित्व राज्यवासियों के पास रहे।

6- राज्य के आपदाग्रस्त क्षेत्रों में निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरे हों ताकि प्रभावितों की नारकीय जिन्दगी पटरी पर आ सके और उनमें विश्वास की भावना जाग सके।

अयोध्या प्रसाद ‘भारती’ की रिपोर्ट.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...