उत्तर प्रदेश के भाजपा नेताओं का दिल यूं ही नहीं बाबू सिंह कुशवाहा के लिए धड़का था। मुरादाबाद के एक होटल में बीस करोड़ की रकम देकर यह नेता आराम से पार्टी को बेचने को तैयार हो गये, इसके बाद ही अपने दामन में एक हजार करोड़ से ज्यादा की बेईमानी और तीन हत्याओं के लिए जिम्मेदार नेता के स्वागत में यूपी के प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय महासचिव बिछ गए। इसके बाद देश भर में हुई फजीहत नें पार्टी को बेहद शर्मसार कर दिया।
अब पार्टी के भीतर ही उन लोगों को पार्टी से निकालने का दबाव बढ़ता जा रहा था जिन्होंने इस बदनामी कांड में अपनी जेबें भरी थीं। पार्टी के लिए मुसीबत भरी बात यह है कि संघ भी इस काण्ड से बेहद खफा है। इस कांड के बाद अन्ना टीम ने भी अपनी रणनीति बदली। इससे पहले वह कांग्रेस का जमकर विरोध कर रही थी। स्वाभाविक था कि इसका फायदा बीजेपी को मिलता। कुशवाहा कांड के बाद अब कोई ऐसा फायदा होता नजर आ नहीं रहा है, लिहाजा बीजेपी के जख्म इस प्रचार से भर जाते ऐसा भी नहीं लगा। इसके बाद अन्ना टीम ने यूपी से दूर रहना ही बेहतर समझा।
पैसों के लिए बीजेपी नेताओं का यह त्याग पहली बार नहीं था। विनय कटियार ऐसा कारनामा पहले भी कर चुके हैं। रायबरेली में उन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ ताल ठोंकी थी। सूत्रों का कहना है कि उन्हें पार्टी की तरफ से दो करोड़ रुपया चुनाव प्रचार के लिए मिला था मगर कटियार अक्लमंद निकले। उन्हें पता था कि उनकी हार तय है। ऐसे में फालतू पैसा फूंकने से कोई फायदा नहीं है। लिहाजा उन्होंने पैसे बचाने के लिए चुनाव प्रचार ही नहीं किया। उनकी हार हुई। जबरदस्त हुई। जमानत भी जब्त हो गयी कटियार की। मगर पैसा तो बच गया। इस बार भी जब कटियार के सामने बीस करोड़ का ऑफर आया तो वह भला मना कैसे कर सकते थे। लिहाजा अपने अध्यक्ष को भी इस खेल में शामिल किया गया और इसके बाद बीजेपी के दामन पर वह दाग लगा जिसकी भरपाई करने मे बीजेपी को सालों लग जायेंगे।
कुशवाहा भी यूं ही नहीं बीस करोड़ देने को राजी हो गये। इससे दो गुनी रकम वह कांग्रेस को देने को तैयार थे मगर कांग्रेस अक्लमंद निकली। उसे समझ में आ गया था कि कुशवाहा को साथ में लेने का मतलब पूरी पार्टी की लुटिया डुबाना है। लिहाजा कुशवाहा को साफ लफ्जों में समझा दिया गया कि यूपी चुनाव सर पर है। ऐसे में कोई खतरा नहीं उठाया जा सकता। उनसे यह भी कहा गया कि चुनाव के बाद उनके प्रार्थना पर विचार किया जायेगा। कांग्रेस चाहती थी कि चुनाव तक कुशवाहा का इस्तेमाल मायावती को डराने के लिए किया जाय। शुरुआती दौर में कुशवाहा इससे सहमत भी दिखाई दिये। मगर इसी बीच उन्हें पता चला कि सीबीआई उनकी गिरफ्तारी की तैयारी कर चुकी है।
कुशवाहा को यह सूचना मुरादाबाद के बड़े व्यवसायी सौरभ जैन ने दी। सौरभ जैन और उनकी परिवार की फर्मों ने राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना में सैकड़ों करोड़ का कारोबार करके करोड़ों की धांधली की है। जैन बंधु इससे पहले भी बड़े पैमाने पर सरकारी ठेकों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। यूपी के एक दर्जन से अधिक आईएएस अफसरों पर उन्होंने करोड़ो रूपये लुटाये हैं, यह बात सभी जानते हैं। बदले में इन अफसरों ने जैन एण्ड कम्पनी को बड़े-बड़े ठेके देकर उपकृत किया है।
जैन अपने सम्पर्कों के जरिए सीबीआई की गतिविधियों पर भी निगाह रखे हुए थे। जब उन्हें पता चला कि सीबीआई कुशवाहा को गिरफ्तार कर सकती है तो उन्होंने कुशवाहा को सलाह दी कि अगर कांग्रेस में दाल नहीं गल रही तो भाजपा में ही दांव अजमाया जाय। किसी भी राष्ट्रीय दल में एंट्री होने के बाद उन पर हाथ डालना थोड़ा मुश्किल हो जायेगा। इसके बाद कुशवाहा ने यह मामला मैनेज करने की जिम्मेदारी भी जैन परिवार पर छोड़ दी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया।
अपनी बेशुमार दौलत के बल पर उन्होंने भाजपा नेताओं को अपने चरित्र से गिरने पर मजबूर कर दिया। मुरादाबाद के एक होटल में भाजपा नेताओं से कुशवाहा की मुलाकात कराई गयी। सूत्रों का कहना है कि यहीं पर भाजपा नेताओं को 20 करोड़ रुपये दिये गये और इसके बाद वादा किया गया कि अगर कुशवाहा को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित कर दिया गया तो इतनी ही धनराशि और दी जायेगी। परिणामस्वरूप बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं ने कुशवाहा को फूलों का गुलदस्ता भेंट करके उनका स्वागत किया।
नैतिकता की बात करने वाली भाजपा के पास इन बातों का कोई उत्तर नहीं था कि कुछ दिनों के पहले तक जिस व्यक्ति को हजारों करोड़ के घोटाले और तीन सीएमओ की हत्या का दोषी बताया जा रहा था वह इस तरह भाजपा के मंच पर महिमा मंडित क्यों हो रहा था। राजनीतिक समीक्षक अशोक मिश्रा का कहना है कि जिस पार्टी के राष्टीय अध्यक्ष खुद एक लाख रुपये लेते हुए कैमरे के सामने पकड़े जा चुके
हों उस पार्टी से नैतिकता की आशा रखना ही बेमानी है। भले ही बदनामी के बाद कुशवाहा की प्राथमिक सदस्यता स्थागित कर दी गयी हो मगर उन्हें दिए गए फूलों के कांटे लंबे समय तक भाजपा को चुभते रहेंगे।
लेखक संजय शर्मा लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं. वीकएंड टाइम्स हिंदी साप्ताहिक के संपादक हैं.






