पुलिस जहां अभी चुनाव आयोग का हवाला देकर व्यापारियों और आम लोगों का उत्पीड़न कर रही थी, वहीं अब वो पत्रकारों से भी दो-दो हाथ करने के मूड में हो गई है। उसके लिए निर्वाचन आयोग का आदेश या फिर जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक का आदेश ठेंगे पर है। इसका उदाहरण इन दिनों पूर्वी यूपी के गाजीपुर जनपद में देखा जा रहा है। निर्वाचन के नामांकन के लिए जहां बैरेकेटिंग कर आम लोगों को नामांकन स्थल से दूर ही रोका जा रहा है, वही अब पुलिस ने अपनी हनक दिखाते हुए कल पत्रकारों को नामांकन स्थल पर जाने से रोक दिया।
जब इसकी शिकायत जिलाधिकारी व पुलिस के आलाधिकारीयों से की गई तो वहां पर तैनात क्षेत्राधिकारी सुखसागर शुक्ला का कहना था कि चुनाव आयोग या फिर जिलाधिकारी क्या होते हैं? मेरी मर्जी, जिसे जाने दूं या फिर ना जाने दूं। इसको लेकर पुलिस के उस अधिकारी व पत्रकारों में घण्टों झड़प होती रही। आखिरकार पत्रकारों को धरना देने के लिए बाध्य होना पड़ा। अन्त में एडीएम के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ।

अभी ये मामला शांत ही हुआ था कि नामांकन स्थल पर प्रत्याशियों के नामांकन का कवरेज करने जा रहे पत्रकारों को कालर पकड एलआईयू के लोगों ने रोक दिया। उनके अनुसार भी जिलाधिकारी का आदेश का मतलब कुछ नहीं। इसी को लेकर कल पूरा दिन पत्रकारों के लिए मुश्किलों भरा रहा। पूरे दिन पत्रकारों को पुलिस की गुण्डई से दो चार होना पड़ा। इस पूरे मामले पर अपर जिलाधिकारी ने जनपद के सभी उप जिलाधिकारियों के साथ बैठक कर इसका उचित हल निकालने की बात कही।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





