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नि:शस्त्र और सुरक्षा विहीन व्यक्ति पर हमला करवाने वालों की ‘मर्दानगी’

Mukund Hari : कहां गए 56 इंच की छाती वाले? ज़रा बिना सुरक्षा के प्रचार करके दिखाएं। बुजदिलों, एक नि:शस्त्र, सुरक्षा-विहीन व्यक्ति पर पैसे देकर हमला करवाते हो। यही है तुमलोगों की मर्दानगी!

Mukund Hari : कहां गए 56 इंच की छाती वाले? ज़रा बिना सुरक्षा के प्रचार करके दिखाएं। बुजदिलों, एक नि:शस्त्र, सुरक्षा-विहीन व्यक्ति पर पैसे देकर हमला करवाते हो। यही है तुमलोगों की मर्दानगी!

Safdar Hussain Rizvi : केजरीवाल पर हमला मोदी द्वारा दिए गए रणनीतिक बयान AK-49 का असर है और ऐसे हमले जारी रहेंगे कांग्रेस ,बीजेपी और भ्रष्ट मीडिया की देख-रेख में। यही तथाकथित राष्ट्रवादियों की मानसिकता है की ये अपने आलवा किसी को पसंद नहीं करते ।यही हमला सोनिया गाँधी राहुल गांधी , मुलायम सिंह और लालू यादव पर भी करके देखो मक्कार राष्ट्र भक्तों अपनी औकात समझ में आजायेगी ।मोदी समर्थकों तुम हमेशा गन्दी नाली के कीड़े थे और रहोगे ज़िन्दगी भर । तुम ही लोगों ने निहत्थे गाँधी को मारा और तुम ही लोगों ने निहत्थे इंसानों को दंगों में मारा और तुम ही लोगों ने निहत्थे केजरीवाल को मारा। तुम हमेशा से हत्यारे थे हमेशा ही रहोगे।

Amitaabh Srivastava : 56 इंच की छाती के चायवाले और कांग्रेस के युवराज के नजदीक भी कोई आम आदमी सहज ढंग से फटक नहीं सकता। इसलिए आम आदमी का थप्पड़ तो बेचारा आम आदमी पार्टी का नेता ही खायेगा। ऐसा तो है नहीं कि बाकी नेता अपने किये सारे वादे निभा ले जाते हों। ऐसा भी नहीं है कि बाकी नेताओँ पर पब्लिक को गुस्सा न आता हो और वो उसे जाहिर न करती हो। लेकिन अरविंद केजरीवाल ही निशाना क्यों बन रहे हैं। क्या आम आदमी से नजदीकी ही उन्हें भारी पड़ रही है। तो क्या आम आदमी भी यही चाहता है कि ब्लैक कैट कमांडो से घिरे नेताओं को दूर से देखे, कभी कभार वो बुला लें, गले लगा लें तो निहाल हो जाए और बस। बाकी तो अच्छे दिन आने ही वाले हैं।

Ashish Sagar Dixit : कभी बाँदा / बुंदेलखंड में मुझे भी राह चलते कोई घूंसा, थप्पड़, लातों से या फिर गोली मारकर चला जाये तो हैरान मत होना नपुंसक लोगों क्योंकि ये सब कुछ उनके साथ कभी नहीं होगा जो अपने साथ 22 जवान लेकर चलते हैं, जेड प्लस सुरक्षा की दुहाई देते हैं… मसलन बाँदा या उत्तर प्रदेश में ही नसीमुद्दीन सिद्दकी का गर हवाला देवे तो यही हाल है जैसा कि गुजरात में मोदी का… दवाई के सहारे अपनी चलती-फिरती लाशो को ढोने वाले ये सूरमा किस जमात के हैं, ये सब जानते हैं… इनके पास तक कोई मजलूम, मजदूर और आम आदमी तो पहुंच ही नहीं सकता, वो इनको थप्पड़ क्या मारेगा? ध्यान रहे, सड़कों पर बिना सुरक्षा, हथियार और खुली भीड़ में खुलेआम चलने वाले लोगों का इन थप्पड़ों से हौसला नहीं टूटता. इससे उनमें लड़ने की हिम्मत और प्रबल हो जाती है… अरविंद केजरीवाल संघर्ष करो, मैं आपके साथ हूँ….

Vikram Singh Chauhan : केजरीवाल को आज फिर दिल्ली में भाड़े के किसी व्यक्ति ने थप्पड़ जड़ दिया। देश के आम आदमी की तरह उसे रोज थप्पड़, घूंसे पड़ रहे हैं। ये चिढ उन दक्षिणपंथियों की है जो परदे के पीछे से ये काम अपने गुर्गो से करवा रहे हैं। मैं ये सब देख, सुन बहुत निराश हूँ। जो वैचारिक बहस नहीं कर सकते वे हमेशा हिंसा का सहारा लेते हैं। लोकतंत्र की रक्षा क्या अब गुंडे-मवाली करेंगे? शर्मनाक

Brijesh Singh : केजरीवाल पर हुए हमले के बाद जिस तरह कुछ लोग खुशियां जता रहे हैं उससे यही लगता है कि भारत में नाथूराम गोडसे आज भी जिंदा है।

Ujjwal Bhattacharya : केजरीवाल पर फिर हमला किया गया. यह आपराधिक मनोविज्ञान का एक कारक है, अगले हफ़्तों में और कुछ सिरफ़िरे ऐसी हरकतों के ज़रिये मशहूर होने की कोशिश करेंगे. लेकिन मुझे अचरज है फ़ेसबुक में कुछ संघियों के उद्गार पर. स्पष्ट है कि वह विरोधियों के साथ ऐसे सलूक का स्वागत कर रहे हैं. चूंकि वह अभी सत्ता में नहीं हैं, इसी को विरोधियों से निपटने का ज़रिया मान रहे हैं. सत्ता में आने की हालत में नये तरीके दराज़ में बंद हैं.

मुकुंद हरि, सफदर हुसैन रिजवी, अमिताभ श्रीवास्तव, आशीष सागर दीक्षित, विक्रम सिंह चौहान, बृजेश सिंह, उज्जवल भट्टाचार्य के फेसबुक वॉल से.

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