संघर्ष का रास्ता थोड़ा लंबा और कष्टदायक तो होता है लेकिन इसका नतीजा सार्थक व प्रेरणादायी होता है. मुंबई की पत्रकार सोनिका तिवारी ने जी न्यूज को कोर्ट में पटकनी देकर अपना हक और न्याय जीता है. बांद्रा के लेबर कोर्ट नंबर छह के जज ने आज खुली अदालत में फैसला सुनाते हुए जी न्यूज मैनेजमेंट द्वारा सोनिका तिवारी के टर्मिनेशन को प्रथम दृष्टया अवैध करार दिया. कोर्ट ने कहा है कि अगर जी प्रबंधन के लोग इस फैसले के खिलाफ उपरी अदालत में जाते हैं तो उन्हें महिला पत्रकार की सेलरी (टर्मिनेशन से लेकर आज तक की) का आधा कोर्ट में जमा करना होगा.
कोर्ट ने जी न्यूज मैनेजमेंट को आदेश दिया है कि वह महिला पत्रकार सोनिका तिवारी को अपने यहां काम पर रखे. अगर काम पर न रखते हुए अपील में जाना चाहते हैं तो सेलरी का पचास प्रतिशत कोर्ट में जमा करें. आज फैसले के दिन कोर्ट में जी ग्रुप का कोई वकील नहीं नजर आया. सात दिन बाद पूरे मामले में लिखित आदेश आएगा.
महिला पत्रकार सोनिका तिवारी जी न्यूज, मुंबई में सीनियर रिपोर्टर एंटरटेनमेंट हुआ करती थीं. उनके मुंबई ब्यूरो चीफ विजय शेखर थे. दिल्ली में एचआर के जनरल मैनेजर प्रदीप गुलाटी हुआ करते थे. सोनिका तिवारी का आरोप है कि इन लोगों ने और जी न्यूज प्रबंधन ने मिलकर उन्हें मैटर्निटी लीव देने की जगह टर्मिनेट कर दिया जो श्रमिक कानूनों व महिला के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन है. इस मामले की सुनवाई मुंबई के बांद्रा स्थित लेबर कोर्ट में पिछले दो सालों से चल रही थी. आज फैसला सुनाया गया.
मूल खबर…
मैटर्निटी लीव मांगने पर महिला पत्रकारों को बर्खास्त कर देता है ज़ी न्यूज़





