एनडीटीवी वाले की ही बात कर रहा हूं. पंकज पचौरी के बारे में. इनके बारे में खबर है कि वे प्रधानमंत्री के पीआरओ बन गए. हालांकि सूचना मेरे पास बेहद शरीफ एलीट तरीके से आई थी. वो ये कि पंकज पचौरी जी प्रधानमंत्री के कम्यूनिकेशन एडवाइजर टाइप कोई चीज हो गए हैं. लेकिन जब मैंने कुछ लोगों से अलग अलग बात की कि इसका मतलब क्या तो कई बातें पता चली. जैसे ये कि जनाब अगर आप एनडीटीवी में रहते हुए इसी टाइप की कोई लाबिंग या बात या घटनाक्रम कर रहे थे तो काहे कि पत्रकारिता.
किसी ने कहा कि पचौरी जिन भी मंचों पर दिखे वे मीडिया पर रेगुलेशन की वकालत करते दिखे. तब लगता था कि ये बंदा वाकई दमदार है लेकिन अब लग रहा है कि ये सत्ता की लंबी सेटिंग का पार्ट था. खैर, पंकज पचौरी अगर वाकई प्रधानमंत्री नामक प्राणी के आसपास कुछ हो गए हों तो उनको मुबारक. अगर न बन पाएं हों तो इस गासिप के लिए माफी. वैसे भी कांग्रेसी न्यू मीडिया का गला घोंटने के लिए तैयार बैठे हैं, गूगल याहू फेसबुक ट्विटर समेत सबकी मां बहन एक किए हुए हैं. ऐसे में अगर मेरा जैसा महाचिरकुट देहाती कुछ लिखे बोले वो तो महाअपराध.
आखिर में कुछ बात पंकज पचौरी भाई के लिए. दोस्त, आपका 'सेलेक्शन' हो गया हो तो आपको मुबारकां. न हुआ हो तो दुश्मनों का प्यार समझकर भूल जाना.
आपका
यशवंत
भड़ास4मीडिया
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