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अगर पुलिस और दैनिक जागरण नितिन श्रीवास्तव को बचाते हैं तो मैं आत्मदाह कर लूंगी: बीना शुक्ला

दैनिक जागरण प्रेस सर्वोदय नगर कानपुर में कार्य के दौरान मुझे(बीना शुक्ला) नितिन श्रीवास्तव, प्रदीप अवस्थी, संतोष मिश्रा, दिनेश दीक्षित आदि लोगों ने कार्यालय में बंधक बना कर छेड़खानी और बदतमीजी की थी। इन लोगों ने मुझे बदनाम करने की भी कोशिश की। दिनांक 30.05.2012 को मैंने शिकायती प्रार्थना पत्र थानाध्यक्ष काकादेव, कानपुर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, कानपुर, पुलिस महानिरीक्षक, कानपुर जोन, महिला आयोग एवं भारतीय प्रेस परिषद को दिया था। लेकिन अभियुक्तों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुयी। तब मैंने न्यायालय के माध्यम से नितिन श्रीवास्तव आदि के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354 घ(1) (प) 342, 504, 506, 500 के अंतर्गत मुकदमा (सं. 217/2013) थाना काकादेव कानपुर नगर में पंजीकृत कराया। दिनांक 13.09.2013 से आईओ की जांच की कार्यवाही चल रही है।

दैनिक जागरण प्रेस सर्वोदय नगर कानपुर में कार्य के दौरान मुझे(बीना शुक्ला) नितिन श्रीवास्तव, प्रदीप अवस्थी, संतोष मिश्रा, दिनेश दीक्षित आदि लोगों ने कार्यालय में बंधक बना कर छेड़खानी और बदतमीजी की थी। इन लोगों ने मुझे बदनाम करने की भी कोशिश की। दिनांक 30.05.2012 को मैंने शिकायती प्रार्थना पत्र थानाध्यक्ष काकादेव, कानपुर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, कानपुर, पुलिस महानिरीक्षक, कानपुर जोन, महिला आयोग एवं भारतीय प्रेस परिषद को दिया था। लेकिन अभियुक्तों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुयी। तब मैंने न्यायालय के माध्यम से नितिन श्रीवास्तव आदि के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354 घ(1) (प) 342, 504, 506, 500 के अंतर्गत मुकदमा (सं. 217/2013) थाना काकादेव कानपुर नगर में पंजीकृत कराया। दिनांक 13.09.2013 से आईओ की जांच की कार्यवाही चल रही है।

मैंने विवेचना अधिकारी को घटना स्थल, घटना का टाइम, ऑफिस के अंदर बना कमरा जहां बंधक बनाया गया और सबूत के रूप में एक सीडी भी दी जिससे साबित हो जाता है कि मेरे साथ कार्यालय में बदतमीजी की गयी और बदनाम किया गया। विधि अनुसार पीड़िता के बयान ही पर्याप्त है, लेकिन फिर भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी। 6 महीने से ज्यादा हो जाने के बाद चार्जशीट दाखिल की गयी। विवेचक अपने पद एवं गरिमा से खिलवाड़ करते हुये मुख्य आरोपी को बचा रहे हैं। दिनांक 23.01.2014 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को सीडी की जांच के लिए ओरिजनल मेमोरी चिप दी थी, लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट भी प्राप्त नहीं हुयी है।
 
विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि चार्जशीट फाइनल हो गयी है एक-दो दिन में दाखिल हो जायेगी। होली से पहले नितिन श्रीवास्तव कानपुर आये थे। पुलिस को पैसे देकर या मीडिया के दबाव में आकर मुख्य आरोपी डीजीएम नितिन श्रीवास्तव का नाम चार्जशीट से हटा दिया गया है। 6 महीने तक चार्जशीट नहीं लगायी गयी, जानबूझ कर लेट की गयी।
 
नये डीजीएम अवधेश शर्मा शुरूआत से दबाव दे रहे हैं कि प्रदीप अवस्थी, दिनेश दीक्षित, संतोश मिश्रा ने बदतमीजी की है, नितिन श्रीवास्तव दोषी नहीं हैं इसलिये नितिन श्रीवास्तव का नाम वापस ले लो। आईओ का कहना है कि छेड़खानी, बदतमीजी, बदनाम करने की शिकायत न सुनना, कार्यवाही न करना कोई आपराध नहीं होता। लेकिन अवधेश जी और आईओ डीके सिंह जी को यह नहीं पता है कि किसी महिला की बेज्जती करना, बंधक बनाना शिकायत न सुनना सबसे बड़ा अपराध होता है। मुकदमा नितिन श्रीवास्तव बनाम बीना शुक्ला का पंजीकृत हुआ था, लेकिन जागरण की तरफ से नितिन श्रीवास्तव को मुख्य अभियुक्त न बनाकर पुलिस ने प्रदीप अवस्थी को बनाया गया है जिससे साफ जाहिर होता है कि नितिन श्रीवास्तव को बचाने के लिये यह षड्यंत्र किया गया।

अगर पुलिस और दैनिक जागरण नितिन श्रीवास्तव को बचाते हैं तो मैं आत्मदाह कर लूंगी। मैंने यह बात काकादेव थाने में एसओ और आईओ डीके सिंह से कह दी है।
 
अतः जो भी मीडिया वाले इस खबर को पढ़े तो इस खबर को अपने न्यूज चैनल और अखबार में प्रकाशित कर मुझ प्रार्थिनी को न्याय दिलाने की कृपा करें। मैं जल्द ही मुख्यमंत्री जी से मिल कर उनको सारी घटना से अवगत कराउंगी। हमारी इस लड़ाई में आपके साथ की जरूरत है।

बीना शुक्ला,
मो. नं. 9450896070

संबंधित ख़बरेंः

दैनिक जागरण, कानपुर के नितिन श्रीवास्तव, प्रदीप अवस्थी, संतोष मिश्रा, दिनेश दीक्षित के खिलाफ मुकदमा http://bhadas4media.com/article-comment/13821-2013-08-17-12-45-10.html

बीना शुक्ला की लड़ाई, भड़ास वालों की गिरफ्तारी और जागरण के बनिये मालिक http://bhadas4media.com/print/17661-2014-02-05-09-13-02.html  

 

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