Anand Pradhan : बनारस में हूँ. कल रात ट्रेन में साथ आ रहे बनारसी सह-यात्रियों से लेकर सुबह आटोवाले हरिलाल तक और दूसरे कई लोगों से बातचीत के बाद इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि बनारस में मुक़ाबला इकतरफ़ा नहीं है.
असली वोटर ख़ामोशी से सबको तौल रहा है. वह दूर से नमो समर्थकों की ओर से एक जन उन्माद पैदा करने की उत्पाती कोशिशों को देख रहा है. बातचीत से लगा कि मोदीमय माहौल बनाने की कोशिशों के बावजूद वोटरों में अरविंद केजरीवाल के प्रति उत्सुकता और आकर्षण है. इस कारण नरेंद्र मोदी के मुक़ाबले में अरविंद ध्रुव बन रहे हैं.
आम वोटर ख़ासकर बनारस का ग़रीब, मेहनतकश और साथ ही, पढ़ा-लिखा तबक़ा उन्हें सुन रहा है. मोदी के समर्थकों में लंपट तत्वों की बड़ी तादाद को देखकर वोटरों में स्वाभाविक चिंता है. यह मुक़ाबला दिलचस्प होता दिख रहा है. ऐसा ही चला तो बनारस के अपने मिज़ाज के मुताबिक़ गली आगे मुड़ती दिख रही है. आख़िर अभी तीन सप्ताह बचे हैं. आगे और अनुभव लिखता रहूँगा लेकिन पहले दिन के अनुभव ने चौंकाया है क्योंकि दिल्ली में बैठे हुए तो बनारस में इकतरफ़ा मैच की रिपोर्टें पढ़-देख रहा था.
प्रोफेसर, विश्लेषक और स्तंभकार आनंद प्रधान के फेसबुक वॉल से.





