समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने कहा है कि चुनावों की स्वच्छता और शुचिता बनी रहे इसके लिए चुनाव आयोग की आचार संहिता लागू करने के नाम पर जिला प्रशासन के कुछ अधिकारी जिस स्वेच्छाचारिता का परिचय दे रहे हैं, उसे तुरन्त रोके जाने की आवश्यकता है। मतदाता को प्रलोभन और दबावों से मुक्त रखना अच्छी बात है किन्तु इसके नाम पर लोकतांत्रिक प्रशिक्षण की सभी प्रक्रियाओं को स्थगित करने के प्रयास कतई स्वीकार्य नहीं हो सकते हैं।
इस बार चुनावों में प्रत्याशियों के प्रचार पर बुरी तरह अंकुश लगा दिया गया है। कानपुर में जिला प्रशासन ने प्रत्याशियों के प्रचार में पैम्पलेट, झण्डों आदि पर 10 रूपए से ज्यादा खर्च को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171 क अंतर्गत दण्डनीय माना है जिसमें दो वर्ष जेल की सजा हो सकती है। पार्टियों के झण्डे, पोस्टर और स्टीकर आदि के प्रयोग पर जरूरत से ज्यादा बंदिश लगाई जा रही है। जनसभाओं और विज्ञापन पर 10 रुपए खर्च की सीमा बांधना तो एक मजाक के सिवाय कुछ नहीं है।
चुनाव में कालेधन की आमद के नाम पर व्यापारियों के उत्पीड़न के पुलिसिया खेल की सभी ने आलोचना की है। मरीजों के इलाज और शादी व्याह से संबंधित रुपयों की जब्ती और लोगों को परेशान करना प्रशासन के प्रति जनाक्रोश पैदा कर रहा है। इसी तरह प्रत्याशी के जनसम्पर्क पर भी अनुमति लेने की बंदिश चुनाव की मूल भावना के विपरीत है।
चुनाव आयोग को भी देखना चाहिए कि आचार संहिता लागू करने के नाम पर अनावश्यक सख्ती बरतने की पुलिस को छूट न दी जाए और लोकतंत्र में चुनाव के महत्व को नष्ट न किया जाए। समाजवादी पार्टी की निर्वाचन आयेाग से मांग है कि वह मुख्यमंत्री के जन्मदिवस की गतिविधियों की जांच कराए क्योंकि काले धन की वही मुख्य संरक्षक हैं। उनके जन्मदिन पर स्वामिभक्ति दिखानेवाले अफसरों की सूची बनाई जाए तथा चुनाव आयेाग अपने पर्यवेक्षक से रिपोर्ट ले।
(राजेन्द्र चैधरी)
प्रदेश प्रवक्ता
समाजवादी पार्टी
उत्तर प्रदेश
19, विक्रमादित्य मार्ग, लखनऊ
प्रेस रिलीज






