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गाजीपुर सदर से जीत के लिए लड़ रहे वरिष्ठ पत्रकार अच्युतानंद के भतीजे विजय मिश्रा

विधानसभा के चुनावी रणक्षेत्र में यूपी के गाजीपुर जिले की सदर विधानसभा सीट पर बसपा ने अपने प्रत्याशी के रूप में जनपद की जमानियां सीट से वर्तमान विधायक राजकुमार सिंह गौतम को मैदान में उतारा है। समाजवादी पार्टी से विजय मिश्रा को भाग्य आजमाने का मौका मिला है। विजय मिश्रा जाने माने पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के भतीजे हैं। कहा जाता है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से बेहद करीबी रिश्ते के कारण अच्युतानंद मिश्र ने विजय मिश्रा को टिकट दिलवाने में कामयाबी हासिल की।

विधानसभा के चुनावी रणक्षेत्र में यूपी के गाजीपुर जिले की सदर विधानसभा सीट पर बसपा ने अपने प्रत्याशी के रूप में जनपद की जमानियां सीट से वर्तमान विधायक राजकुमार सिंह गौतम को मैदान में उतारा है। समाजवादी पार्टी से विजय मिश्रा को भाग्य आजमाने का मौका मिला है। विजय मिश्रा जाने माने पत्रकार अच्युतानंद मिश्र के भतीजे हैं। कहा जाता है कि सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव से बेहद करीबी रिश्ते के कारण अच्युतानंद मिश्र ने विजय मिश्रा को टिकट दिलवाने में कामयाबी हासिल की।

भाजपा ने जनपद के पुराने दिग्गज और संघर्षशील कार्यकर्ता अरुण सिंह को प्रत्याशी घोषित कर सीट अपने कब्जे में करने की कवायद शुरू कर दी है, जबकि कांग्रेस से राघवेंद्र पाठक उम्मीदवार हैं। कई क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में सामने आ ही जायेंगे। ऐसे में सभी पार्टियों की कोशिश जीत हासिल करने की होगी। सभी प्रत्याशियों के भाग्य का निपटारा इस क्षेत्र के मतदाताओं के हाथों में है। फिलहाल इस विधानसभा क्षेत्र में अभी तक सपा और बसपा के बीच द्विकोणीय मुकाबले की तस्वीर बनती नजर आ रही है।

शुरुआत में विजय मिश्रा को लेकर सपा में ही कई तरह के विरोध के स्वर उभरे लेकिन अब सभी कह रहे हैं कि गाजीपुर सदर से विनिंग स्थिति में विजय मिश्रा हैं। खुद विजय मिश्रा बताते हैं कि गाजीपुर सदर की जनता बसपा शासनकाल के अत्याचार-उत्पीड़न से उबी है। उन्हें हर तबके का समर्थन प्राप्त है। सूत्रों के मुताबिक जातिगत गणित भी विजय मिश्रा के पक्ष में है। पंडित, पिछड़े और मुसलमान वोट मिलकर जीत दिलाने में सक्षम है। बसपा के राजकुमार से क्षेत्रीय जनता व क्षत्रिय जाति के लोग बेहद असंतुष्ट है। इसलिए क्षत्रियों के काफी वोट विजय मिश्रा को पड़ने के आसार हैं। दूसरे, दलित मतों का भी विभाजन हो गया है। कुछ दलित जातियां बसपा के खिलाफ वोट करने के मूड में हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की श्रीमती शादाब फातिमा ने बसपा के उमाशंकर कुशवाहा को कांटे की टक्कर के बाद 11 सौ वोटों से पराजित कर सदर सीट पर कब्जा जमाया था। इस बार बसपा के टिकट पर उमाशंकर जनपद की जमानियां सीट पर दम ठोंक रहे है, जबकि सपा विधायक शादाब फातिमा जहूराबाद से अपने सियासी भविष्य की तलाश कर रही है। सियासी जानकारों के मुताबिक नये परिसीमन के बाद फायदे नुकसान की सियासी गणित के मद्देनजर दोनों पुराने उम्मीदवारों ने ये कदम उठाया है।

गाजीपुर सदर सीट के प्रमुख प्रत्याशी : अरुण सिंह (भाजपा), राजकुमार सिंह (बसपा) और विजय मिश्रा (सपा)


गुणा-गणित

आजादी के बाद वर्ष 1952 से अब तक हुये विधानसभा चुनावों में यूपी के गाजीपुर जिले की सदर विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा पांच बार (1952, 1957, 1962, 1969, 1984) कांग्रेस पार्टी का कब्जा रहा है। तीन बार बसपा (1989, 1991 और 2002), दो बार सपा (1996 और 2007), एक बार लोकदल (1980), एक बार भाकपा (1967) एक बार बीकेडी (1974), एक बार भाजपा (1993) और एक बार मुस्लिम मजलिस (1977) के प्रत्याशी जीत का सेहरा अपने सिर पर बांध चुके है। नये परिसीमन के बाद इस विधानसभा का एक बड़ा हिस्सा जंगीपुर विधानसभा क्षेत्र मे चला गया है। ऐसे मे सभी दल सदर विधानसभा सीट पर अपनी जीत के लिये सियासी बिसात बिछाने मे जुट गये हैं।

इस सीट पर चुनाव के मद्देनजर सियासी गुणा गणित का खेल शुरू हो चुका है। देखना है कि चुनावी घमासान में इस सीट पर इस बार किस दल का प्रत्याशी जीत का ताज पहन कर नया इतिहास रचेगा। आजादी के बाद से ही जनपद की इस सबसे महत्वपूर्ण विधानसभा सीट पर चुनावी फैसले दिलचस्प होते रहे हैं। ऐसे में इस सीट पर अपना झंडा गाड़कर विरोधियों को पटखनी देने के लिये राजनैतिक दलों के सूरमा कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। तकरीबन चार लाख लोगों की आबादी वाले इस विधानसभा क्षेत्र में नयी जनगणना के मुताबिक कुल 3 लाख, 3 हजार, 3सौ 25 मतदाता हैं, जिनमे 1 लाख, 64 हजार, 704 पुरुष जबकि 1 लाख, 38 हजार, 6 सौ 16 महिला मतदाता शामिल हैं।

जातिगत आंकड़ों के हिसाब से इस क्षेत्र में तकरीबन 55 हजार दलित, 45 हजार यादव,10 हजार कुशवाहा,10 हजार राजभर, 45 हजार क्षत्रिय, 20 हजार ब्राह्मण, 30 हजार वैश्य, 35 हजार मुसलमान और सबसे ज्यादा करीब 70 हजार बिंद बिरादरी के वोट हैं। कुल मतदाताओं में से 1 लाख 62 हजार 639 वोटर 18 से 39 आयु वर्ग के है। लिहाजा कहा जा सकता है कि करीब 54 प्रतिशत युवा मतदाता चुनाव को पूरी तरह प्रभावित करेंगे। इसमें 2012 की जनगणना के दौरान 42 हजार 168 नये मतदाता भी शामिल हैं।

गाजीपुर से यशवंत की रिपोर्ट.

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