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लखनऊ

मीडिया की नजर में मौत की कीमत मोबाइल

यूं तो लखनऊ में हर दर्जे का पत्रकार मौजूद है, सबकी अपनी अलग पहचान है, कोई काम से जाना जाता है … कोई काम कम अपने नाम से ज्यादा जाना जाता है. तो किसी के चर्चे सरे बाजार हुआ करते हैं … लेकिन आजकल एक बहुत मजबूत टाइप खबर फैली हुयी है जो सौ फीसदी सही है … क्योकि आँखों देखी जो है … आलाधिकारियों तक इसके चर्चे है … मामला अपराध से जुड़ा है तो पुलिस अधिकारी भी बहुत मजे से चटखारे लेकर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर हम तो लेने देने में बदनाम हैं लेकिन सबकी खबर लिखने छापने वाले आजकल खूब जुबानी हेडलाइन में छाये हुए हैं …  होना भी चाहिए … क्योकि आजमगढ़ से लखनऊ आकर बीडीएस करने आई प्रिया की मौत मामले में राजधानी लखनऊ के पत्रकारों ने मोबाइल के लिए खुद को बेंच दिया …

यूं तो लखनऊ में हर दर्जे का पत्रकार मौजूद है, सबकी अपनी अलग पहचान है, कोई काम से जाना जाता है … कोई काम कम अपने नाम से ज्यादा जाना जाता है. तो किसी के चर्चे सरे बाजार हुआ करते हैं … लेकिन आजकल एक बहुत मजबूत टाइप खबर फैली हुयी है जो सौ फीसदी सही है … क्योकि आँखों देखी जो है … आलाधिकारियों तक इसके चर्चे है … मामला अपराध से जुड़ा है तो पुलिस अधिकारी भी बहुत मजे से चटखारे लेकर चर्चा कर रहे हैं कि आखिर हम तो लेने देने में बदनाम हैं लेकिन सबकी खबर लिखने छापने वाले आजकल खूब जुबानी हेडलाइन में छाये हुए हैं …  होना भी चाहिए … क्योकि आजमगढ़ से लखनऊ आकर बीडीएस करने आई प्रिया की मौत मामले में राजधानी लखनऊ के पत्रकारों ने मोबाइल के लिए खुद को बेंच दिया …

मामला कैरियर डेंटल कालेज में पढ़ने वाले मंसूर की मासूका की मौत का है …  मासूम महबूबा मंसूर की मोहब्बत में फंसकर मौत को गले लगा लिया …  कैरियर कॉलेज में पढ़ने वाली प्रिया से छह महीने से मधुर सम्बन्ध था … लेकिन मंसूर के मंसूबों को समझने में नाकाम प्रिया ने मजबूर होकर हमजा प्लाजा में अपने कमरे में मौत को गले लगा लिया … इसमें पुलिस ने मंसूर को दोषी मानते हुए आरोपी बना दिया और मीडिया मैनेज करने वाले प्रबंधन ने महंगा वाला मोबाईल पत्रकारों को बंटवा दिया …  

मोबाइल पाने वालों ने पहले होटल में जाकर दारु मुर्गे की पार्टी उड़ाई और चलते वक्त मोबाइल पाकर तोंद में हाँथ फेरते हुए निकले … मोबाइल आधा दर्जन हिंदी अखबारों के पत्रकारों मिला … जबकि एक मोबाइल अंग्रेजी अख़बार के पत्रकार को नसीब हुआ … सुना है बाकियों की आँखों में ये खटक रहा है … प्रबंधन और पत्रकारों के बीच सेटिंग कराने वाला चैनल का तथाकथित पत्रकार जिसकी ककहरा से लाठी चली है… इसी सूत्रधार ने बड़ी चालाकी से पूरे मामले को दबाने और निपटाने का काम किया है … सुनने में तो यहां तक आया है कि इस पत्रकार का भी बड़ा काला कारोबार है …

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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