सोनभद्र : संचारक्रांति के वर्तमान परिवेश में मीडिया ने अपनी पहुंच और पकड़ दोनों बनायी है, उसे आम आदमी की पीड़ा को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम बनना चाहिये। यह कहना था काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डा. श्रीप्रकाश शुक्ला का, जो जयप्रभा मण्डपम में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। ‘साहित्य, सामाजिक सरोकार और मीडिया’ विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि डा. शुक्ला ने कहा कि भले ही संगोष्ठी छोटे स्थान पर हो रही है लेकिन इसके वैचारिक विमर्श का संदेश पूरे देश में जायेगा।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र के विषय ‘विश्वसनीयता की कसौटी पर मीडिया’ में बतौर मुख्य अतिथि काशी पत्रकार संघ से अध्यक्ष योगेश गुप्ता ने कहा कि यह एक सुखद आश्चर्य है कि सोनभद्र जिले के दस पत्रकार संगठन एक मंच पर एकत्रित हैं। उन्होंने इस एकता को ऐतिहासिक बताते हुये सुझाव दिया कि सभी संगठन एक होकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित करें और पत्रकारों के कल्याण के लिये कार्य करें। उन्होंने कहा कि जब अखबार का मालिक और संपादक एक हो जाते हैं, वहीं सामाजिक सरोकारों की पत्रकारिता प्रभावित होने लगती है।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता कर रहे प्रगतिशील लेखक संघ के प्रदेश महासचिव डा. संजय श्रीवास्तव ने कहा कि सोनभद्र को भी पाण्डेय बेचन शर्मा उग्र व आचार्य प्रेमघन की धरती मानना चाहिये। जल, जंगल व ज़मीन के मुद्दों पर कलमकारों का ध्यानाकर्षण करते हुये उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपनी संवेदनशीलता से समझौता नहीं करना चाहिये, चाहे पर्यावरण का मुद्दा हो या विस्थापन का, जब तक पीड़ितों को न्याय न मिले, शांत नहीं बैठना चाहिये। आइडियल जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. प्रमोद वाचस्पति, डा. रामप्रकाश वरमा व आज के समाचार संपादक केडीएन राय ने मीडियाकर्मियों को सफल पत्रकार बनने के गुर बताये। पं. पारस नाथ मिश्र, ओम प्रकाश त्रिपाठी, चद्रमणि शुक्ला व कमाल अहमद ने भी पत्रकारों को संबोधित किया। विषय प्रवर्तन विजय शंकर चतुर्वेदी व संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार विजय विनीत ने किया।
वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश प्रसाद द्विवेदी के 63वें जन्मदिन पर आयोजित इस कार्यक्रम में जन्मदिन की बधाइयों के साथ उन्हें अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया। पं. पारसनाथ मिश्र द्वारा लिखित पुस्तक 'निबंध निधि', डा. अर्जुन दास केसरी द्वारा रचित ‘खादिम एक खुशबू’ व डा. रवीन्द्र कुमार केसरी द्वारा रचित 'डा. अर्जुन दास केसरी एक व्यक्तित्व एवं कृतित्व' का विमोचन भी किया गया। सभी उपस्थित 200 पत्रकार प्रतिभागियों को संपादक श्याम नारायण लाल श्रीवास्तव द्वारा सूचना के अधिकार पर लिखित पुस्तक व डा. बसन्ती लाल बावेल द्वारा लिखित पत्रकारिता एवं प्रेस विधि सहित कई पुस्तकें उपलब्ध करायी गई।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डा. अर्जुन दास केसरी ने इस अयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस संगोष्ठी ने जिले के पत्रकारिता के क्षेत्र में कई मानक स्थापित किये। डा. केसरी बोले कि संगोष्ठी में किसी राजनेता, प्रशासनिक अधिकारी या समाजसेवी की जगह सिर्फ साहित्यकारों व पत्रकारों के साथ वैचारिक विमर्श ने आयोजन की शुचिता को और भी बढ़ाया है। संघर्ष के विरुद्ध आवाज बुलन्द करने वाले पत्रकार ज्ञानेश्वर प्रकाश श्रीवास्तव व सोन संगम पर आरती कराने वाले पत्रकार सुधाकर मिश्र का सभी ने करतलध्वनि के साथ उत्साहवर्धन किया। वेदपाठी मृत्युजंय पाण्डेय के और उनके सहयोगियों का मंत्रोच्चारण के साथ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन ने कार्यक्रम में अनूठी समा बांधी।
सुधाकर मिश्र- ग्रापए, चंद्रमणि शुक्ला- रूजए, कमाल अहमद- भारापमा, अरविन्द पाण्डेय- सोनांचल जर्नलिस्ट एसोसिएशन, अभय भार्गव- सोनभद्र श्रमजीवी पत्रकार यूनियन, अजय श्रीवास्तव- उपजा, विजय शंकर चतुर्वेदी- आईएफडब्लूजे, सुनील कुमार सिंह- प्रेस क्लब सोनभद्र, सत्येन्द्र सिंह- आईएमएसएफजे व संतोष नागर- आईजेए, सहित दीपक कुमार केसरवानी संपादक- सोनघाटी, ब्रम्हचारी दूबे, विवेक पाण्डेय, विमल जालान, सतीश भाटिया, आरपी उपाध्याय, विनोद गुप्ता, अशोक दूबे, उपेन्द्र तिवारी, चन्द्रसेन पाण्डेय, शैलेश दूबे, श्याम सुन्दर, परमेश्वर दयाल श्रीवास्तव, शान्तनु विश्वास, चन्द्रकांत मिश्रा, संतोष सोनी, विधु शेखर, जीके मदान, संदर्भ पाण्डेय, मनोज तिवारी, सनोज कुमार तिवारी, संतोष पटेल, मुकेश सिंह, नागेश सिंह, शिव प्रसाद शुक्ला, नीतीश भारद्वाज सहित सैकड़ों पत्रकार उपस्थित थे। इस मौके पर एक दर्जन पत्रकारों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिये स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया।






