अपनी कुछ अजीब शैली और हरकतों के लिए पहचाने जाने आई नेक्स्ट, बनारस के डिप्टी एनई विश्वनाथ गोकर्ण पर आरोप है कि वे इस टैबलाइड के फोटोग्राफर मदन मेहरोत्रा को नौकरी से निकालने की योजना तथा दबाव बना रहे हैं. गोकर्ण के रवैये से आजिज आकर ही इस अखबार से कई अच्छे रिपोर्टर दूसरे संस्थानों में चले गए, जिसमें आशीष, अम्बुजेश, वीणा तिवारी, अमित और रीतू जैसे नाम शामिल हैं. रीतू के साथ तो अभद्रता करने की भी खबरें आई थीं, जिसमें संस्थान और वरिष्ठों की काफी छीछालेदर हुई थी.
सूत्रों के अनुसार श्री गोकर्ण फोटोग्राफर मदन पर लगातार इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं कि वह आई नेस्क्ट से इस्तीफा दे दें. मदन जब से आई नेस्क्ट ने वाराणसी ज्वाइन किया तब से एक सफल फोटोग्राफर के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं. संस्थान ने इनके योग्यता व अनुभव को देखते हुए नवम्बर 2011 में स्थाई छायाकार भी बना दिया. इतना ही नहीं मदन को बीते साल अक्टूबर माह में विशेष ट्रेनिंग के लिए कानपुर बुलाया गया और आई नेक्स्ट के चीफ फोटोग्राफर अतुल हुण्डू ने उन्हें फोटोग्राफी के विशेष गुर भी सिखाये. संस्थान ने इन्हें लगभग 1 लाख रुपये का कैनन कैमरा 60 डी भी दिया और मदन संस्थान के आई नेक्स्ट लाइव के लिए भी फोटोग्राफी करने लगे. इसी बीच श्री गोकर्ण अपनी आदत के चलते न जाने क्यों फोटोग्राफर मदन से नाराज हो गये और लगातार इस्तीफे के लिए दबाव बनाने लगे. इतना ही नहीं उन्होंने मदन को यह भी आश्वासन दिया कि तुम्हें जनसंदेश में नौकरी भी लगवा दूँगा और दिखावे के लिए जनसंदेश के स्थानीय संपादक आशीष बागची से निवेदन भी किया.
गोकर्ण ने फोटोग्राफर मदन के बदले अंचल अग्रवाल से सम्पर्क किया और उनके पिता अनुज अग्रवाल को बताया कि मदन को निकालने वाला हूँ, अपने बेटे को आई नेक्स्ट की नौकरी पर भेज दीजिए. अंचल अभी कुछ माह पहले से फ्रीलांस फोटोग्राफर के रूप में सहारा ज्वाइन किया है, पर अंचल अचानक गोकर्ण को पिछले डेढ़ दशक के अनुभवी फोटोग्राफर मदन की तुलना में ज्यादा योग्य नजर आ गए और उन्हें बुला लिया. अंचल के पिता अनुज अग्रवाल ने एक अनौपचारिक बातचीत में बताया कि मैंने श्री गोकर्ण को इस बात का आग्रह किया था कि मदन की नौकरी के बदले अपने बेटे को नौकरी नहीं दिलाना चाहते, तो गोकर्ण का जवाब था कि मुझे किसी न किसी को तो रखना ही है, वैसे भी मेरे सम्पर्क में कई और फोटोग्राफर हैं. मजबूरी में मुझे अपने बेटे अंचल अग्रवाल को वहां भेजना पड़ा. अंचल ने बताया कि उन्हें 10500/- वेतन प्रतिमाह की स्थाई नौकरी तथा आफिशियल कैमरा मिल गया है. अंचल ने यह भी बताया कि अभी उन्हें एप्वाइंटमेंट लेटर नहीं मिला है. आश्चर्य की बात है कि मदन को जिस आफिसियल कैमरे को लेने में लगभग चार साल लगे, वही लाखों का कैमरा अंचल को चार घंटों में ही मिल गया. (इनपुट : क्लाउन टाइम्स)





