गोरखपुर में अब एक सवाल ने सभी को परेशान कर रखा है. बहुत प्रचार के बाद भी जनसंदेश टाइम्स के प्रकाशन में बिलम्ब से लोग सवाल उठाने लगे हैं कि जागरण के दागियों और बागियों की फौज कब निकालेगी जनसंदेश टाइम्स? हां, इस सवाल में दम भी है. पहले कहा गया कि खरमास के बाद 17 जनवरी को निकलेगा जनसंदेश टाइम्स. बाद में कहा जाने लगा कि 22 को लांच होगा. लेकिन सूत्र बताते हैं कि इसमें अभी और बिलम्ब होगा.
इधर, जो लोग दैनिक जागरण जैसे स्थापित अखबार को छोड़कर जनसंदेश टाइम्स में गए हैं अब नियुक्ति पत्र मांगने लगे हैं. शैलेन्द्र मणि ने जुबानी जमाखर्च करके सबके वेतन तो तय कर दिए लेकिन लिखा-पढ़ी में कुछ नहीं है. जो लोग जनसंदेश टाइम्स ज्वाइन किये हैं अब वे अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. अन्दरखाने में खुसुर-फुसुर होने लगी है कि दागियों-बागियों की यह टीम कोई गुल न खिला दे. शैलेन्द्र मणि ने जागरण से बगावत कर जनसंदेश टाइम्स लाने का जो बिगुल फूंका उसके स्वर अब मद्धिम हो रहे हैं. शैलेन्द्र मणि ने जागरण से उपेन्द्र पाण्डेय को तोड़ा और जुबानी ही जनसंदेश टाइम्स में डीएनई बना दिया.
ये यही उपेंद्र पांडेय हैं, जिन पर जागरण वाले ब्यूरो प्रभारियों से पैसा वसूलने का आरोप लगाते हैं. बताते हैं कि उपेन्द्र पाण्डेय को गोरखपुर में जनसंदेश टाइम्स का संपादक बनाया जा रहा था, लेकिन अब मंशा बदल गयी है. अब कहा जाने लगा है कि ऊपर से कोई संपादक बन कर आयेगा. जागरण से बगावत कर जनसंदेश टाइम्स जाने वाले आशुतोष मिश्रा पर तो पहले ही से बदतमीजी का आरोप है, उन्हें बस्ती मंडल का प्रभार दिया गया है. बस्ती, संत कबीर नगर और सिद्धार्थनगर के जनसंदेश टाइम्स के पत्रकार अभी से परेशान हैं कि कब किसको माँ-बहन की गाली सुनने को मिल जाये. सिद्धार्थनगर में नजीर मलिक की भी दिन में पी लेने की आदत पत्रकारों के लिए परेशानी का सबब है.
जनसंदेश टाइम्स के महाराजगंज और कुशीनगर के प्रभारी तो बेदाग़ हैं, लेकिन देवरिया के प्रभारी सिद्धार्थ मणि पर बहुत पहले से ही यह आरोप लगता रहा है कि वह देवरिया के एक शिक्षा माफिया और इंटर कालेज के प्रधानाचार्य के हाथों की कठपुतली हैं. वैसे कहा जा रहा है कि जनसंदेश टाइम्स ने जो दागी-बागी टीम खडा की है, उससे जागरण को बहुत नुकसान उठाना होगा, क्योंकि इनमें से कइयों का काम के मामले में कोई तोड़ नहीं है. पर मुश्किल यह है कि जनसंदेश टाइम्स ज्वाइन करने वाले पत्रकार अब नियुक्ति पत्र मांग रहे हैं और जनसंदेश टाइम्स वाले उन्हें आश्वासनों का घूंट पिला रहे हैं. इसी बीच गोरखपुर और बस्ती मंडल के सभी जिला और तहसील कार्यालयों पर नए-नए कम्प्यूटर, नयी-नयी कुर्सियां सजाने लगी हैं, लेकिन यह तय नहीं हो प़ा रहा है कि बाज़ार में जनसंदेश टाइम्स कब उतरेगा? प्रचार-प्रसार काफी तेजी से हो रहा है फिर भी लोग यह सवाल खड़ा करने लगे हैं कि जागरण के दागियों और बागियों की फौज कब निकालेगी जनसंदेश टाइम्स?





