नई दिल्ली : हिंदी साहित्य जगत में जल्द ही एक नई बहस शुरू हो सकती है। हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बाहुबली नेता आनंद मोहन का कविता संग्रह राजकमल प्रकाशन से छपकर तैयार है। सोमवार को प्रख्यात आलोचक नामवर सिंह इसका विमोचन करने वाले हैं। बाहुबली के कविता संग्रह का नामवर जैसे आलोचक के हाथों विमोचन की सूचना से साहित्यिक हलकों में हलचल है।
आनंद मोहन फिलहाल गोपालगंज के जिलाधिकारी जी कृष्णैया की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। कविता संग्रह की कविताएं इसी दौरान लिखी गई हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि आनंद मोहन की लिखी कविताओं का विषय क्या है। इस संबंध में कविता संग्रह प्रकाशित करने वाले राजकमल प्रकाशन के अधिकारी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं। वहीं तमाम कोशिशों के बाद भी नामवर सिंह से संपर्क नहीं किया जा सका। आनंद मोहन के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार कविता संग्रह कैद में आजाद कलम में अधिकांश कविताएं 2007-08 में भागलपुर की सेंट्रल जेल में सजा काटने के दौरान लिखी गई हैं।
कृष्णैया हत्याकांड में चार नवंबर 2007 को स्थानीय अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उन्हें इस जेल में लाया गया था। फांसी की सजा होने के कारण आनंद मोहन को जेल की विशेष सेल में अकेले रखा गया था। हो सकता है इन्हीं तन्हाइयों के बीच बाहुबली के कवि हृदय को जागने का अवसर मिला हो। वैसे हाईकोर्ट द्वारा फांसी को आजीवन कारावास में बदलने के बाद उन्हें सहरसा की जिला जेल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां लिखी कुछ कविताओं को भी संग्रह में जगह मिली है। कविता संग्रह के साथ ही आनंद मोहन ने जेल के अनुभवों को भी लिपिबद्ध किया है, जो कालकोठरी से शीर्षक के तहत दो भागों में छपेगा। इस जेल डायरी को भी राजकमल प्रकाशन ही छापेगा। साभार : जागरण





