दुद्धी : कांग्रेस ने अपनी राजनीति के लिए इस क्षेत्र के आदिवासियों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है। आखिर कांग्रेस की झूठ की राजनीति का भण्ड़ा फूट गया और सच जनता के सामने आ ही गया। यह बातें आज दुद्धी में उपवास पर बैठे जन संघर्ष मोर्चा के राष्ट्रीय प्रवक्ता दिनकर कपूर व प्रदेश प्रवक्ता गुलाब चंद गोड़ ने कही। नेताओं ने कहा कि यह जानते हुए भी कि दुद्धी की विधानसभा सीट इस चुनाव में आदिवासियों के लिए आरक्षित नहीं हो सकती उसने आदिवासी नेता को अपना प्रत्याशी बनाया।
वास्तव में तो राहुल को इस क्षेत्र की जनता से अपनी पार्टी की धोखाधड़ी की कार्रवाई के लिए माफी मागंनी चाहिए थी। क्योंकि आजादी के साठ सालों में सबसे ज्यादा समय तक राज करने वाली उन्हीं की पार्टी की सरकार ने कोल जैसी आदिवासी जाति को आदिवासी का दर्जा नहीं दिया। परिणामतः आज उन्हें वनाधिकार कानून का लाभ नहीं मिल पा रहा। जिन गोड़, खरवार, चेरों, पनिका, भुइंया, बैगा जैसी जातियों को आदिवासी का दर्जा मिला, उन्हें आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया गया। इन आदिवासियों को पंचायत से लेकर विधानसभा तक आरक्षण देने के मामले में आखिर माननीय उच्चतम न्यायालय को भी आज यह मानना पड़ा है कि इस क्षेत्र के आदिवासी समाज के साथ केन्द्र व राज्य की सरकारों ने अन्याय किया है और उसने अपने आदेश में आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने क्यों अभी तक अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वाहन नहीं किया। पंचायत चुनाव के ठीक पहले जन संघर्ष मोर्चा की जनहित याचिका पर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने उ0 प्र0 सरकार और चुनाव आयोग को आदिवासियों के लिए सीट आरक्षित करने का आदेश दिया था लेकिन उस समय केन्द्र सरकार के ही उच्चतम न्यायालय में मौजूद अटार्नी जनरल की मदद से उ0 प्र0 की मायावती सरकार उच्चतम न्यायालय से इसके खिलाफ स्टे ले आयी।
नेताद्वय ने कहा कि इस क्षेत्र में केन्द्र सरकार के विभागों की आपराधिक लापरवाही से हवा और पानी तक को जहरीला बना दिया गया है। इस प्रदूषण के कारण यहां के आम आदमी की जिदंगी को खतरे में डाल दिया है। केन्द्र सरकार को बार-बार प्रत्यावेदन देने के बाद भी उसके पर्यावरण मंत्रालय ने कोई कार्रवाई नहीं की। मजदूरों के ईपीएफ तक में करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया। नेताओं ने कहा कि सोनभद्र, मिर्जापुर और नौगढ़ के आदिवासी आज भी गेठी कंदा जैसी जहरीली जड़ खाने को मजबूर है। उ0 प्र0 को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले इस क्षेत्र में मनुष्य के जीवन के लिए जरूरी सुविधाएं तक नहीं है। इस जिले का भाठ क्षेत्र तो उ0 प्र0 का कालाहाड़ी बना हुआ है। ऐसे आदिवासी बहुल पिछड़े क्षेत्रों के लिए संविधान में राज्य के भीतर स्वायत परिषद के गठन का प्रावधान है। नेताओं नेक कहा कि नौगढ़, राजगढ़ से लेकर दुद्धी तक के आदिवासी बहुल इस क्षेत्र को स्वायत्त परिषद क्षेत्र घोषित करने और स्वायत परिषद क्षेत्र में प्रशासन की सुविधा के लिहाज से छोटे जनपदों का गठन करने और दुद्धी को जिला बनाने की मांग के संदर्भ में भी राहुल ने लोगों को निराश ही किया। उपवास कार्यक्रम में रामदेव गोड़, रामायन गोड़, श्याम सुदंर खरवार, शाबिर हुसैन, राजेश सचान, रामजीत खरवार, इंद्रदेव खरवार, प्रमोद चौबे, विजय गोड़, देव कुमार विश्वकर्मा, नागेन्द्र पनिका, राजेन्द्र गोड़, मनोहर गोड़, जय प्रकाश पनिका, विजेन्द्र यादव, संजय कुमार, रउफ खान, देव सकल गोड़, शान्तनु मिश्र, शम्भूनाथ कौशिक आदि लोग मौजूद रहे। प्रेस रिलीज





