आज समाज की अंबाला यूनिट में तैनात डीएनई आशुतोष प्रताप सिंह के बारे में पता चला है कि डीएनई ने अपनी छवि सुधारने के लिए अपने अखबार का इस्तेमाल किया। आशुतोष ने अपने घर में शरण लिये ट्रेनी पत्रकार सैय्यद परवेज के जरिये एक लेख लिखवाया। परवेज ने अपनी टूटी-फूटी हिंदी में आशुतोष की जिंदगी पर हल्का प्रकाश डालते हुए इन्हें दिव्य पुरुष घोषित कर दिया। लेख में आशुतोष के लिए लिखा गया कि उन्होंने घर से भागकर हिमालय की कंदराओं में अध्यात्म की प्राप्ति की, इसके बाद समाजसेवा के लिए सामान्य जन-जीवन में लौट आए। वगैरह-वगैरह…..। ट्रेनी ने इस लेख को लिखने के बाद आशुतोष को दिखाया और खुद डीएनई ने लेख को संपादित करते हुए दिल्ली कॉरपोरेट आफिस भेजने के लिए कहा।
परवेज ने अपने संबंधों के जरिये उक्त लेख को ‘आखिन देखी’ कॉलम में प्रकाशित करा दिया। पता नहीं इस लेख को अखबार के मालिक विनोद शर्मा तथा एमडी कार्तिक शर्मा ने पढ़ा या नहीं पढ़ा लेकिन अंबाला यूनिट के लोगों ने खूब पढ़ा। लेख के प्रकाशन के बाद आशुतोष तथा ट्रेनी परवेज की चर्चा दिल्ली कॉरपोरेट आफिस पहुंच गई। अपने ही अखबार के डीएनई के बारे में स्तुतिगाथा छपने की भनक लगी तो पड़ताल होने लगी। इधर दांव उल्टा पड़ता देखकर आशुतोष प्रताप सिंह ने अपने घर में टिके ट्रेनी पत्रकार सैय्यद परवेज को बरगलाकर अंबाला से भगा दिया। भरोसा दिलाया कि दिल्ली में बेहतर नौकरी दिलवा देंगे। बहरहाल मामले में पड़ताल जारी है। दिल्ली आफिस में संपादकीय पृष्ठ देखने वाले पत्रकार से भी पूछताछ हुई तो उन्होंने परेवज को बुलाया, लेकिन मालूम हुआ कि वह तो नौकरी छोड़कर भूमिगत है।
ये है प्रकाशित स्तुतिगाथा… स्वामी जी की जय हो…






