: कानाफूसी : अरिंदम चौधरी के मीडिया हाउस के बुरे दिन चल रहे हैं. इनकी कई भाषाओं में निकलने वाली मैग्जीन 'द संडे इंडियन' के गैर-अंग्रेजी प्रकाशनों का प्रकाशन इस बार स्थगित कर दिया गया है. इसको लेकर तरह तरह के कयास हैं. अरिंदम चौधरी के दाहिने हाथ और 'द संडे इंडियन' के आल इन वन सुतानू गुरु ने एक पत्र भेजकर आशंकाओं को और बल दे दिया है. उन्होंने पत्र में द संडे इंडियन की खराब हालत का वर्णन किया है और कहा है कि तीन ही विकल्प हैं सबके सामने. या तो नौकरी छोड़कर चले जाएं. या अच्छे समय का इंतजार करते हुए काम करें या फिर अरिंदम चौधरी में आस्था बनाए रखें.
इस मेल के आने के बाद बहुत सारे लोगों की आस्था डोल गई है और वे लोग नौकरी तलाशने लगे हैं. उधर कई लोगों को धीर धीरे नौकरी से हटाए जाने का काम भी शुरू कर दिया गया है. द संडे इंडियन हिंदी मैग्जीन से दो लोगों राजेंद्र व विकास को निकाल दिया गया है. सुतानू गुरु ने जिस लड़की को एक बार गंदी गाली दी थी, उसने भी नौकरी छोड़ दिया है. उधर, सुतानू गुरु की बेलगाम हरकतों पर नियंत्रण के लिए उनकी पत्नी अदिति प्रसाद द संडे इंडियन का पार्ट बन गई हैं. उन्हें मैनेजिंग एडिटर कनवरजेंस बनाया गया है. करीब तीन महीने से काम कर रहीं अदिति वेब की कमान संभाले हुए हैं. अदिति के आने से आफिस के अंदर सुतानू गुरु की तान थोड़ी नियंत्रित हुई है.
द संडे इंडियन की बंदी को लेकर चर्चा है कि अरिंदम चौधरी के पास पैसे की कमी तो है नहीं, फिर वे क्यों बंद करना चाहेंगे. एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि अरिंदम चौधरी का जो धंधा है वह अंग्रेजी दां लोगों और अंग्रेजी भाषा में है, इसलिए वे गैर अंग्रेजी मैग्जीनों के प्रकाशन में रुचि नहीं ले रहे क्योंकि इन मैग्जीनों से रिटर्न ज्यादा कुछ नहीं मिल रहा, सिर्फ जा ही जा रहा है. दूसरे, जब मीडिया में आप मूल धंधे को बढ़ाने तराशने आए हों तब एक समय बाद आपको यह देखना ही पड़ता है कि किस मीडिया से आपका मूल धंधा कितना बढ़ या घट रहा है, उसी आधार पर आप अपने मीडिया के किसी खास सेक्शन को बढ़ाने और किसी खास सेक्शन को बंद करने का निर्णय लेते हैं. इस मसले पर अगर आपके पास कोई नई, अलग किस्म की जानकारी हो तो [email protected] पर मेल कर सकते हैं.





