: बेमियादी धरने में शरीक हुईं : टाइम्स ऑफ़ इंडिया की प्रिंटिंग प्रेस की बंदी के कारण हटाये गए 44 कर्मचारी उस वक़्त हैरान रह गए जब पटना के फ्रेज़र रोड स्थित उनके धरनास्थल पर नर्मदा बचाओ आन्दोलन की नेत्री मेधा पाटकर अपनी टीम के साथियों के साथ अचानक पहुँच गईं. मेधा लोकशक्ति अभियान के तहत बिहार यात्रा पर हैं. वे बिहार में अररिया, फारबिसगंज, कोसी, गोपालगंज, सिवान की यात्रा और सभाओं के बाद आज पटना में थीं. उनको यहां शहरी गरीबों की एक सभा को संबोधित करना था.
इसी क्रम में फ्रेज़र रोड के रास्ते से गुजरते हुए उन्होंने जब धरना स्थल पर टाइम्स ऑफ़ इंडिया के नौकरी से हटाये गए कर्मियों को देखा तो वहां उनकी और उनकी टीम के अन्य साथियों की गाड़ियाँ रुक गई. मेधा पाटकर को इस धरने की जानकारी टाइम्स ऑफ़ इंडिया न्यूजपेपर एम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष, बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महासचिव और भारतीय पत्रकार परिषद् के सदस्य अरुण कुमार और यूनियन के सचिव लाल रत्नाकर के माध्यम से पहले से थी. मगर इस यात्रा के कार्यक्रम में उनका यहाँ धरने पर आना पूर्व निर्धारित नहीं था.
मेधा को बताया गया कि मणिसाना वेज बोर्ड के तहत पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मियों के संघर्ष के क्रम में इलाज के अभाव में दो मजदूरों आनंद राम और यूनियन के असिस्टेंट सेक्रेट्री दिनेश कुमार सिंह की मौत हो चुकी है. प्रेस की बंदी के बाद बेरोजगारी के तनाव से एक मजदूर साथी चंदू पागल होने के कगार पर हैं. कइयों के परिजनों का इलाज नहीं हो पा रहा है. बच्चों की पढाई बंद हो गई है. बेटियों की शादी रुकी पड़ी है. यह सब सुनकर मेधा पाटकर भावुक हो उठीं.
मेधा को प्रेस काउंसिल ऑफ़ इंडिया के सदस्य अरुण कुमार ने पूरे मामले की जानकारी दी और सभी मजदूर साथियों से परिचय कराया. एक-एक मजदूर से मेधा ने उनका दुःख दर्द सुना और बाद में उनको संबोधित भी किया. मेधा पाटकर ने मजदूरों को उनके धैर्य, साहस और जुझारूपन के लिए शाबासी दी. साथ ही हर संभव समर्थन देने का आश्वासन दिया.








