राष्ट्रीय सहारा के पटना यूनिट के संपादकीय विभाग में वेतन पर्ची बंटते ही असंतोष व्याप्त हो गया है. स्थानीय सम्पादक हरीश पाठक के चहेतों को सबसे अधिक लाभान्वित होने को लेकर सम्पादकीय विभाग के एक बड़े खेमे में व्यापक नाराजगी है. लोगों का कहना है कि पाठक के इस व्यवहार से उत्पादक कार्यकर्ताओं के भावनाओं पर ठेस पहुँची है. अरूण पांडेय, संजय त्रिपाठी, किशोर केशव, अमित पार्थ सारथी, अवध, स्वप्निल तिवारी जैसे सम्पादक के करीबी माने जाने वाले लोगों की वेतन वृद्धि 30 प्रतिशत तक कर दी गयी है, जबकि अधिकांश लोग सहारा के अंतिम मानक पर ही अटक कर रह गए हैं. लोगों का आरोप है कि बार-बार इन्हीं लोगों का वेतप वृद्धि और प्रोन्नति क्यों की जाती है.
कइयों ने कम्पनी के डिप्टी चेयरमैन स्वप्ना राय तक से शिकायत कर डाली है. अगले माह सहारा ने एप्रेजल के आधर पर भी वेतन वृद्धि और प्रमोशन की घोषणा की है. नाराज लोगों का कहना है कि पाठक ने उस एप्रेजल में भी यही रवैया अपनाया है, जिसकी जांच होनी चाहिए. उनका कहना है कि इससे स्थानीय सम्पादक हरीश ने यह जाहिर कर दिया है कि चुनिंदे लोग ही यूनिट चला रहे हैं और बाकी लोग नकारा हैं. खबर को रिपीट करने वाले, खबर छोड़ने वाले, खबर को गलत स्थान पर प्लेसमेंट करने वाले लोगों को तरजीह दी गयी है. उनका कहना है कि अब राष्ट्रीय सहारा के पटना यूनिट में वेतन वृद्धि और प्रमोशन चाहिए तो चेम्बर में जाकर चोंचलेबाजी करना होगा. मालूम हो कि सहाराश्री ने नवम्बर माह में सभी कर्तव्ययोगियों को 20 से 60 प्रतिशत तक वेतन वृद्धि की घोषणा की थी. लेकिन परपफारमेंस रिपोर्ट खराब कर सम्पादक जी ने कईयों के सपनों पर पानी फेर दिया है.
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