उत्तर प्रदेश में पांचवें चरण के लिए होने वाले चुनाव की आज अधिसूचना जारी होते ही प्रत्याशियों के नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो गयी. इस दरम्यान उत्तर प्रदेश के औरैया की कलेक्ट्रेट में समाचार कवरेज करने गए पत्रकारों को पुलिस की अभद्रता से दो-चार होना पड़ा. अपराधियों के सामने दुम हिलाने वाले पुलिस के एक डिप्टी एसपी छेदा लाल शर्मा की भाषा सुन पत्रकार हक्के बक्के रह गए. कलेक्ट्रेट के अन्दर प्रवेश कर रहे पत्रकारों को अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर रोकने वाले इस पुलिस अफसर को जब जिले के सूचना अधिकारी ने अपना परिचय बताकर पत्रकारों को अन्दर जाने के लिए अनुरोध किया और अपर जिला अधिकारी से बात करानी चाही तो यह बेलगाम पुलिस अफसर सूचना अधिकारी पर भी रोब ग़ालिब कर उनसे भी पास माँगने लगा.
सूचना अधिकारी ने जब अपर जिला अधिकारी से बात करानी चाही तो इस पुलिस अफसर ने उनसे भी बात नहीं की. इस बेलगाम पुलिस अफसर की इस करतूत को देख कर कई दलों के प्रत्याशियों ने आरोप लगाया कि यह पुलिस अफसर किसी एक पार्टी विशेष के लिए कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहा है और उसकी करतूत बाहर ना फैले इसके लिए वह पत्रकारों को अन्दर जाने से रोक रहा है. पता चला है कि जिलाधिकारी ने सीओ को इस करतूत के लिए लताड़ पिलाई तो यह सीओ दूर जाकर कहने लगा कि मेरी इसी हरकत से पूरे प्रदेश में मुझे लोग जान गए और अधिकारियों की निगाह में मेरा नंबर भी बढ़ गया.
दूसरे दिन यह पुलिस अफसर सूचनाधिकारी के बारे में पता लगाता रहा, जब उसे यह पता चला कि सूचनाधिकारी का मूल पद लिपिक का है और वह इंचार्ज सूचनाधिकारी हैं तो सीओ बोला कि दो कौड़ी का वेतन पाने वाला यह सूचना विभाग का कर्मचारी उससे इसके पहले कभी नहीं मिला. जब पुलिस अफसर को बताया गया कि सूचनाधिकारी जिलाधिकारी के अन्डर में काम करते हैं तो वह बोला कि क्या वह किसी से कम हैं. इसका जवाब तो जिलाधिकारी ही दे सकते हैं. आपको यह भी बताना जरूरी है कि इस पुलिस अफसर की नौकरी २८ फ़रवरी २०१२ तक बची है.
औरैया से पत्रकार ब्रजेश बंधू की रिपोर्ट.






