Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

सुख-दुख...

चीनी मिल बिक्री घोटाला : करोड़ों में कराया आधुनिकीकरण और बेच दिया कौड़ियों में

इलाहाबाद। बसपा सरकार ने सरकारी चीनी मिलों को अपने चहेते शराब माफिया पोंटी चड्ढा ग्रुप को व अन्य कंपनियों को कौडिय़ों के मूल्य पर बेचकर हजारों करोड़ रुपए का घोटाला किया है। अमरोहा, बुलंदशहर, खड्डा, मोहिद्दीनपुर, रोहनकला, सहारनपुर, सरखैनी, टांडा, सिसवां बाजार, बिजनौर, जरवल रोड व चांदपुर की चालू हालत में चीनी मिले हैं, जिनके आधुनिकीकरण पर प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है मगर बसपा सरकार ने पहले इनका कम मूल्यांकन कराया फिर मूल्यांकन राशि में कटौती की और मात्र 615 करोड़ रुपए में इन्हें बेच दिया गया। इन चीनी मिलों के पास हजारों एकड़ भूमि भी थी जिसकी कीमत इस राशि से कई गुना ज्यादा है।

इलाहाबाद। बसपा सरकार ने सरकारी चीनी मिलों को अपने चहेते शराब माफिया पोंटी चड्ढा ग्रुप को व अन्य कंपनियों को कौडिय़ों के मूल्य पर बेचकर हजारों करोड़ रुपए का घोटाला किया है। अमरोहा, बुलंदशहर, खड्डा, मोहिद्दीनपुर, रोहनकला, सहारनपुर, सरखैनी, टांडा, सिसवां बाजार, बिजनौर, जरवल रोड व चांदपुर की चालू हालत में चीनी मिले हैं, जिनके आधुनिकीकरण पर प्रदेश सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है मगर बसपा सरकार ने पहले इनका कम मूल्यांकन कराया फिर मूल्यांकन राशि में कटौती की और मात्र 615 करोड़ रुपए में इन्हें बेच दिया गया। इन चीनी मिलों के पास हजारों एकड़ भूमि भी थी जिसकी कीमत इस राशि से कई गुना ज्यादा है।

अमरोहा चीनी मिल की पेराई क्षमता 3 हजार टन प्रतिदिन है। यह मिल 29.89 हेक्टेयर क्षेत्र (74 एकड़ अथवा 3 लाख वर्गमीटर) में स्थापित है। मिल परिसर में चार बड़े आलीशान बंगले हैं। एक विशाल गेस्टहाउस भी है। मिल की जमीन पर जिला जज का बंगला व सर्किट हाउस भी बने हैं। पांच बड़ी कॉलोनियां हैं, जिनमें 300 रिहायशी फ्लैट्स हैं। 20 फ्लैट्स में जेपी नगर के सरकारी अधिकारी रहते हैं, मिल के गोदाम, बिल्डिंग, प्लांट व मशीनरी की कीमत का अनुमान नहीं लगाया गया। मिल की भूमि पर 230 हरे विशाल पेड़ हैं। इस क्षेत्र का डीएम सर्किल रेट 6 हजार रुपए वर्गमीटर है। सर्किल रेट के हिसाब से केवल जमीन की कीमत सौ करोड़ रुपए है, जबकि मिल की सारी सम्पत्ति, मशीन आदि सब मिलाकर 17 करोड़ में बेच दी गई है। आरोप है कि जिस समय मिल चल रही थी, उसी समय इस पर कब्जा लेने के लिए पोंटी चड्ढा के हथियारबंद लोगों ने मिल पर धावा बोल दिया। कब्जे के लिए 40 गाडिय़ों का काफिला पहुंचा था। कब्जे के समय 8 हजार बोरी कच्ची चीनी, 5 हजार 275 बोरी तैयार चीनी और 10 हजार कुंतल शीरा मौजूद था। इस सब पर भी कब्जा कर लिया गया।

चांदपुर चीनी मिल की पेराई क्षमता 2500 टन है। इसे पोंटी चड्ढा की फर्म को 90 करोड़ रुपए में बेचा गया। 1974 में यह मिल 84 एकड़ जमीन पर स्थापित की गई थी। मिल के आसपास का क्षेत्र गन्ना उत्पादन के लिए बेहद उर्वर है। वर्ष 2005 में मिल ने भारी मुनाफा कमाया था। बाद में एक साजिश के तहत पड़ोस की निजी चीनी मिल को फायदा पहुंचाने के लिए समय से पहले ही पेराई बंद की जाने लगी। इसके बावजूद 2008-09 और 2009-10 में भी यह चीनी मिल मुनाफे में रही। जरवल रोड मिल की पेराई क्षमता भी 2500 टन प्रतिदिन है। इसे पोटाश लिमिटेड को 26.95 करोड़ रुपए में बेचा गया है। वर्ष 1990 में 20 करोड़ की लागत से 94 एकड़ जमीन पर मिल शुरू हुई थी। मिल में आधुनिक प्लांट है। हाल के वर्षों में मिल ने 15 करोड़ का मुनाफा कमाया है। सिसवां बाजार (गोरखपुर) मिल की क्षमता भी 2500 टन प्रतिदिन है। मिल पूरी तरह आधुनिक है। कुछ वर्ष पूर्व ही 34 करोड़ रुपए व्यय कर इसका आधुनिकीकरण किया गया था। वर्ष 2008-09 में मिल ने 30 करोड़ का मुनाफा कमाया था। इसे मात्र 34 करोड़ में बेच दिया गया। कब्जा लेते ही खरीदार ने मिल का पुराना सामान 31 करोड़ में बेचकर मुनाफा कमा लिया।

बुलंदशहर चीनी मिल के पास 27.07 हेक्टेयर औद्योगिक भूमि और 12.13 हेक्टेयर सामान्य भूमि है। इसे 1997 में 52 करोड़ की लागत से बनाया गया था। वर्ष 2010 में सर्किल रेट के अनुसार इसका बाजारी मूल्य 226.30 करोड़ होता है। इसकी अनुमानित कीमत 400 से 500 करोड़ के बीच होती है। इसे मात्र 29.75 करोड़ में बेच दिया गया। बिजनौर चीनी मिल के पास 16 हेक्टेयर भूमि है और इसका बाजार मूल्य 800 करोड़ रुपए होता है। सहारनपुर चीनी मिल का कुल बाजार मूल्य 800 करोड़ होता है। चांदपुर चीनी मिल की बाजारी कीमत 300 करोड़ है। इसके पास 32 हेक्टेयर भूमि है। अमरोहा चीनी मिल का बाजार मूल्य 500 करोड़ है इसके पास 30.5 हेक्टेयर भूमि है। नेकपुर चीनी मिल सर्किल रेट की दर से 145 करोड़ की है परन्तु इसे महज 14.11 करोड़ में बेचा गया। इसमें स्क्रैप ही 50 करोड़ का है। इसका बाजारी मूल्य 800 करोड़ रुपए है। घुघली चीनी मिल के पास 41 एकड़ भूमि है जिसका मूल्य 100 करोड़ से ऊपर है। इसे महज 3.71 करोड़ में बेच दिया गया। देवरिया चीनी मिल 14.11 करोड़ में बेची गई जबकि इसकी जमीन ही कई करोड़ की है। इसी तरह लक्ष्मी गांव चीनी मिल 8.20 करोड़ में बेची गई जबकि इसमें 4 करोड़ से ज्यादा का स्क्रैप है। यह दोनों मिलें नम्रता मार्केटिंग लिमिटेड को बेची गईं। 50 करोड़ से ज्यादा की रामकोला चीनी मिल महज 4.55 करोड़ में व 100 करोड़ से ज्यादा मूल्य को बेतालपुर चीनी मिल महज 4.45 करोड़ में बेची गई।

जारी…

जेपी सिंह द्वारा लिखी गई यह खबर लखनऊ-इलाहाबाद से प्रकाशित अखबार डीएनए में छप चुकी है, वहीं से साभार लिया गया है.

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...