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अमरनाथ तिवारी पर हमले और पुलिस की निष्क्रियता को लेकर सीएम से मिलेंगे पत्रकार

पटना : वरिष्ठ पत्रकार एवं पायनियर के असिस्टेंट एडिटर अमरनाथ तिवारी पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की निष्क्रियता और पक्षपात के सन्दर्भ में पटना के वरिष्ठ पत्रकारों की एक बैठक रविवार २९ जनवरी को फ्रेज़र रोड स्थित एनडीटीवी के दफ्तर में हुई. इस मामले में पुलिस के दो पदाधिकारियों की पक्षपातपूर्ण भूमिका को लेकर सभी वरिष्ठ पत्रकारों ने गंभीर चिंता और आपत्ति दर्ज की.

पटना : वरिष्ठ पत्रकार एवं पायनियर के असिस्टेंट एडिटर अमरनाथ तिवारी पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस की निष्क्रियता और पक्षपात के सन्दर्भ में पटना के वरिष्ठ पत्रकारों की एक बैठक रविवार २९ जनवरी को फ्रेज़र रोड स्थित एनडीटीवी के दफ्तर में हुई. इस मामले में पुलिस के दो पदाधिकारियों की पक्षपातपूर्ण भूमिका को लेकर सभी वरिष्ठ पत्रकारों ने गंभीर चिंता और आपत्ति दर्ज की.

मालूम हो कि विगत २७ जनवरी को कदमकुआँ थाना अंतर्गत राजेंद्र नगर के चारमीनार अपार्टमेन्ट में अंग्रेजी दैनिक द पायनियर, पटना के वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ तिवारी पर उसी अपार्टमेन्ट के निवासी भाजपा नेत्री मधु वर्मा और उनके पुत्र ऋतुराज के नेतृत्व में आये अन्य गुंडा-तत्वों के द्वारा जानलेवा प्राणघातक हमला किया गया था. इस सम्बन्ध में हमले के शिकार श्री तिवारी ने कदमकुआँ थाने में तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट (ऍफ़आईआर) दर्ज भी कराई थी.

पत्रकारों की इस बैठक में थानाध्यक्ष ज्योति प्रकाश और नगर पुलिस उपाधीक्षक रमाकांत प्रसाद द्वारा इस मामले में विहित कानूनी कार्रवाई करने की बजाय पक्षकार की भूमिका निभाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई. शायद इसलिए कि इस मामले में आरोपी भाजपा नेत्री और उनका पुत्र था. वरिष्ठ पत्रकारों ने महसूस किया की इन दोनों पुलिस अधिकारियों की इस पक्षपातपूर्ण कार्रवाई से बिहार का पूरा पत्रकार समुदाय न सिर्फ आश्चर्यचकित वरन निराश और क्षुब्ध भी है.  

बैठक में कहा गया कि जनता की तरह ही हम पत्रकार भी पुलिस और प्रशासन से निष्पक्षता की उम्मीद रखते हैं मगर इस मामले में दोनों ही पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका पत्रकार समुदाय को निसंदेह तौर पर संदिग्ध दिखाई देती है. ऐसी परिस्थिति में और इन तथ्यों के आलोक में पत्रकारों की ओर से मांग किया गया कि पुलिस जाँच की निष्पक्षता बनाये रखने के लिए इन दोनों ही पुलिस पदाधिकारियों को पटना  से बाहर कहीं अविलम्ब स्थानांतरित किया जाये ताकि वे अपने प्रभाव और पुलिस में होने की वजह से अपने परिचय का इस्तेमाल कर इस कांड की जाँच को आगे भी प्रभावित नहीं कर पायें.

बैठक में यह मांग की गयी कि इस कांड के जाँच की निष्पक्षता बनाये रखने की नीयत से यहाँ किन्ही अन्य दूसरे ऐसे पुलिस पदाधिकारियों को पदस्थापित किया जाये जिनकी ईमानदारी, निष्पक्षता और साथ साथ निर्भीकता भी संदेह के परे हो. पत्रकारों ने यह महसूस किया कि इन दोनों ही पदाधिकारियों को हटा कर इस काण्ड की जांच अन्य पदाधिकारियों को सौंपी जाये और आरोपी भाजपा नेत्री, उनके पुत्र सहित अन्य गुंडों को अविलम्ब जेल की सीखचों के अंदर भिजवाने की कार्रवाई की जाये.

बैठक में निर्णय लिया गया कि इस सन्दर्भ में इन मांगों को लेकर पत्रकारों का एक ड़ेलीगेसन बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार से मिलेगा. बैठक में भाग लेनेवाले प्रमुख पत्रकारों में बिहार श्रमजीवी पत्रकार यूनियन महासचिव और प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया के सदस्य अरुण कुमार, गंगा प्रसाद (जनसत्ता), नलिन वर्मा (टेलीग्राफ) संतोष सिंह (इंडियन एक्सप्रेस), मनीष कुमार (एनडीटीवी),  अशोक मिश्र (इकोनोमिक टाइम्स),  आनंद एस. टी. दास (एशियन एज), सुरूर अहमद (वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार), एस.पी. सिन्हा (लोकमत), प्रियरंजन भारती (राजस्थान पत्रिका), अरुण कुमार (हिंदुस्तान टाइम्स), मनोज चौरसिया (स्टेट्समेन), अजमत जमील सिद्दीकी (आजाद हिंद), अजय कुमार (बिहार टाइम्स), मनोज पाठक (आईएएनएस), पारसनाथ (स्वतंत्र फोटो जर्नलिस्ट), फैजान अहमद (टाइम्स ऑफ़ इंडिया) आदि थे.  

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