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वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार धर्मस्वरुप गुप्ता का निधन

प्रसिद्ध साहित्यकार व पत्रकार डॉ. धर्म स्वरूप गुप्त (76 वर्ष) का 29 जनवरी रविवार को निधन हो गया। वह साहित्य के के अलावा शिक्षा, पत्रकारिता व नाट्य कला के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। इस उम्र में भी वे सक्रिय थे और यदा-कदा साहित्य के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहते थे। मुखर और अपनी बात कहने वाले गुप्त के बारे में मशहूर था कि उन्हें जब अपनी बात रखनी होती तो वे उसे रखने में कोई संकोच नहीं करते थे।

प्रसिद्ध साहित्यकार व पत्रकार डॉ. धर्म स्वरूप गुप्त (76 वर्ष) का 29 जनवरी रविवार को निधन हो गया। वह साहित्य के के अलावा शिक्षा, पत्रकारिता व नाट्य कला के क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। इस उम्र में भी वे सक्रिय थे और यदा-कदा साहित्य के कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहते थे। मुखर और अपनी बात कहने वाले गुप्त के बारे में मशहूर था कि उन्हें जब अपनी बात रखनी होती तो वे उसे रखने में कोई संकोच नहीं करते थे।

हरियाणा साहित्य अकादमी, पंचकूला के एक कार्यक्रम में उन्होंने अपनी विद्वता के चलते वहां बैठे कई साहित्यकारों और विद्वानों को उनकी बात मानने पर विवश कर दिया। इसी के चलते कुछ लोग उनसे नाराज भी होते थे लेकिन गुप्त इनकी परवाह नहीं किया करते थे। साहित्य के अलावा उनमें पत्रकार के भी गुण थे, खबरों की उन्हें समझ थी लिहाजा भाषा के हिसाब से वे उसे पठनीय बना दिया करते थे।

लाहौर (अब पाकिस्तान) में 27 जुलाई, 1936 को जन्मे डॉ. गुप्त डीएवी कालेज, मलोट के संस्थापक प्रिंसिपल रहे हैं व बाद में  एमएलएएम कॉलेज़, सुन्दरनगर में कार्यरत रहे तथा सेवानिवृति के पश्चात वे पत्रकार के तौर पर दैनिक ट्रिब्यून में कई वर्ष तक अपनी सेवाएं देते रहे। सेवामुक्त होने के बाद साहित्य, कला व रंगमंच में पहले से अधिक सक्रिय हो गये थे। उन्होंने विभिन्न विधाओं में कई किताबें शिक्षा, समाज व साहित्य को दीं, जिनमें ‘शिक्षा के सिद्धांत (अनुदित), केशव-काव्य : मनोवैज्ञानिक विवेचन(शोध-प्रबन्ध), ‘तलाश जि़न्दगी की खण्डहरों में (काव्य-संग्रह) उनके द्वारा संपादित काव्य संग्रह, ‘काव्यांजलि’, कॉव-रंग’, ‘काव्य-चेतना’, ‘काव्य-लहरी’, संपादित कहानी संग्रह कथालोक व कथा सागर प्रमुख थे।

गुप्त चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के वाईस चेयरमैन के अतिरिक्त ‘सृजन’, एन इंस्टीच्यूट ऑफ क्रियेटिविटी’ व  थियेटर ग्रुप के चेयरमैन रहे हैं। चंडीगढ़ शहर पर उन्होंने काफ़़ी कविताएं लिखी व उन्हें एक चित्रात्मक काव्य संग्रह ‘कविता के आईने में चंडीगढ़’ के रूप में चंडीगढ़ प्रशासन की मदद से साहित्य को दिया। उन्हें कई सम्मानों से नवाज़ा जा चुका था। साहित्य जगत व चण्डीगढ़ शहर सदैव उनका ऋणी रहेगा। साहित्य संस्था ‘मंथन’ ने उनके निधन पर शोक जताते हुए कहा है कि गुप्त हिंदी के विद्वान थे जिनकी कमी हमेशा खलेगी। कैलाश आहलुवालिया, दीपक खेतरपाल, सुशील हसरत नरेलवी, उर्मिला कौशिक और सुभाष रस्तोगी ने गुप्त के परिवार के प्रति अपनी संवेदना जताते हुए कहा है कि परमात्मा उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।

जयश्री राठौड़ की रिपोर्ट.

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