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दैनिक जागरण के पटना कार्यालय में आपस में भिड़े इनपुट हेड और रिपोर्टर

: संपादक और जीएम के सामने हुई जमकर जूतम पैजार : दैनिक जागरण, पटना से खबर है कि सोमवार की शाम यहां दो संपादकीय कर्मियों में जमकर मारपीट हुई. संपादक शैलेंद्र दीक्षित एवं जीएम आनंद त्रिपाठी के सामने भी ये लोग ए‍क दूसरे से निपटते रहे. मामला सिर्फ मारपीट नहीं बल्कि यूपी-बिहार का भी बताया जा रहा है. इसकी जानकारी प्रबंधन ने ऊपर तक दे दी है. लेकिन कार्यालय में अब भी तनाव बना हुआ है. कार्यालय में प्रांतीय व्‍यवस्‍था बना हुआ है. यूपी लॉबी एक तरफ और बिहार की लॉबी दूसरी तरफ टाइट है.

: संपादक और जीएम के सामने हुई जमकर जूतम पैजार : दैनिक जागरण, पटना से खबर है कि सोमवार की शाम यहां दो संपादकीय कर्मियों में जमकर मारपीट हुई. संपादक शैलेंद्र दीक्षित एवं जीएम आनंद त्रिपाठी के सामने भी ये लोग ए‍क दूसरे से निपटते रहे. मामला सिर्फ मारपीट नहीं बल्कि यूपी-बिहार का भी बताया जा रहा है. इसकी जानकारी प्रबंधन ने ऊपर तक दे दी है. लेकिन कार्यालय में अब भी तनाव बना हुआ है. कार्यालय में प्रांतीय व्‍यवस्‍था बना हुआ है. यूपी लॉबी एक तरफ और बिहार की लॉबी दूसरी तरफ टाइट है.

बताया जा रहा है कि घटना का कारण मामूली सी बात है. रिपोर्टर जितेंद्र के खबर देने का टाइम तीन बजे है. इसी बात को लेकर इनपुट हेड अनिल तिवारी ने उनसे कहा कि आपके खबर देने का समय तीन बजे है और आप खबर शाम को छह बजे देते हैं. इस पर जितेंद्र ने कहा कि हम खबर दो बजे तक ही दे देते हैं, आप छह बजे आते हैं इसलिए आपको लगता है कि खबर छह बजे लिखी गई है. इसके बाद कुछ बहसा-बहसी हुआ, जिस पर अनिल तिवारी ने हाथ छोड़ दिया. इसके बाद दोनों तरफ से जमकर जूतम-पैजार हुई.

बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद से कार्यालय में प्रांतवाद हावी हो गया है. यूपी गुट एक तरह तथा बिहारी गुट दूसरे तरफ है. सूत्रों का कहना है कि संपादक एवं जीएम के आने के बाद भी वे आपस में उलझे रहे. एक दूसरे को गालियों से नवाजते रहे. खबर दिए जाने तक प्रबंधन ने कोई निर्णय नहीं लिया है. अब देखना है कि इस मामले में आगे कैसी कार्रवाई होती है. जागरण में जिस तरह की स्थितियां बन रही हैं वह पत्रकारिता के लिए सही नहीं है.

अभी कुछ दिनों पूर्व ही इलाहाबाद में भी ऐसी ही घटना घटी थी, जब एक विज्ञापन कर्मी मयंक श्रीवास्‍तव और संपादकीय प्रभारी सदगुरु शरण ने आपस में मारपीट की थी. इस मामले में भी कार्यालय की आपसी राजनीति की बात सामने आई थी, जिसमें परोक्ष रूप से जीएम गोविंद श्रीवास्‍तव का नाम भी सामने आया था. पटना में घटी इस घटना ने जागरण प्रबंधन के सामने एक सवाल भी खड़ा कर दिया है. प्रबंधन ऐसे मामलों में कोई सर्वमान्‍य निर्णय नहीं ले पा रहा है. वैसे भी कम पैसे में पत्रकारों का खून चूसने वाले जागरण की परिपाटी रही है कि वो ऐसे मामलों में बिना जांच के किसी को भी निकाल देता है या फिर कोई कार्रवाई ही नहीं करता है. अनुशासनात्‍मक कार्रवाई तो जागरण की डिक्‍शनरी में ही नहीं है. 

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