: अजय उपाध्याय को ग्रुप एडिटर बनाए जाने की चर्चा : लखनऊ समेत कई जगहों से प्रकाशित होने वाले हिंदी दैनिक जनसंदेश टाइम्स को तगड़ा झटका लगा है. इस अखबार के प्रधान संपादक सुभाष राय ने खुद को अखबार से अलग करने का फैसला कर लिया है. कल शाम से सुभाष राय के इस्तीफे से संबंधित चर्चाएं सूचनाएं भड़ास4मीडिया तक पहुंच रहीं थीं. आज जब सुभाष राय से इस संदर्भ में भड़ास4मीडिया ने बात की तो उन्होंने कहा कि जनसंदेश टाइम्स में जब तक खुलकर काम करने की स्थितियां थीं, तब तक उन्होंने पूरे दिल से काम किया. अब कई तरह के अनैतिक दबाव उन पर पड़ रहे हैं, इस कारण वे खुद को अखबार से आजाद करना चाहते हैं.
उधर, सूत्रों का कहना है कि सुभाष राय ने कल अपने अभिन्न मित्रों, नजदीकी साहित्यकार साथियों, करीबी पत्रकार बंधुओं को एक मेल करके अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी और जनसंदेश टाइम्स से दूरी बना लेने के बारे में उन्हें अवगत कराया. सूत्रों का कहना है कि सुभाष राय और उनकी टीम, जो मूलतः सरोकार वाली पत्रकारिता से जुड़ी हुई है, कुछ महीनों से कई तरह के दबावों का सामना कर रही थी. यह दबाव दलाल किस्म के लोगों को बढ़ावा देने, भ्रष्टाचारियों के खिलाफ खबरें न छापने, रेवेन्यू के लिए प्लांटेड खबरें छापने आदि के लिए था. साथ ही प्रबंधन सुभाष राय के मुकाबले शैलेंद्र मणि
त्रिपाठी जैसे लायजनर किस्म के लोगों को खड़ा करना चाहता था, जिसको लेकर सुभाष राय ने आपत्ति की थी.
यह सबको पता है कि सुभाष राय ने अलग किस्म के कंटेंट के जरिए जनसंदेश टाइम्स को लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में प्रतिष्ठा दिलाई. अब उसी जमीन पर कई जगह नई यूनिट खड़ा करके दलाल टाइप के लोगों को इंडिपेंडेंट एडिटर बनाया जा रहा है. इस पर सुभाष राय को आपत्ति थी. तब प्रबंधन ने उनके आगे झुकते हुए उन्हें ग्रुप एडिटर बना दिया और बाकी संपादकों को उनके अधीन कर दिया. लेकिन सुभाष राय इस अखबार के प्रबंधन द्वारा दिन प्रतिदिन कामकाज में हस्तक्षेप, गलत लोगों को प्रमोट करने और गलत लोगों को संरक्षण देने के लिए पत्रकारिता कराने जाने की बढ़ती प्रवृत्ति से आजिज आ गए थे, सो उन्होंने प्रबंधन की चालबाजियों का करारा जवाब देते हुए खुद को जनसंदेश टाइम्स से अलग किए जाने की घोषणा कर दी है. सूत्रों का कहना है कि प्रबंधन अजय उपाध्याय को ग्रुप एडिटर बनाने की तैयारी कर रहा है. हालांकि अजय उपाध्याय ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में इसका खंडन किया है.
सुभाष राय ने खुद को जनसंदेश टाइम्स से अलग करने का मन काफी पहले बना लिया था. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने अपने मन की वेदना और इस अखबार से अपने संभावित अलगाव के बारे में एक लेख काफी पहले ही लिख दिया था जो जनसंदेश टाइम्स में प्रकाशित भी हुआ था. उस लेख को आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं- अखबारों को देसी-बिदेसी कंपनियों के पैसे ने लगभग बंधक बना रखा है
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