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बाराबंकी में पत्रकारों को गड्डियां बांट कर चुनावी फिजा बनाने की कोशिश

: विज्ञापन की बजाय समाचार से ही मैदान मारने की तैयारी : बाराबंकी। चुनाव आयोग की जिले में नहीं चल पा रही सख्ती। आचार संहिता की धज्जियां उड़ा कर यहां प्रत्याशी मीडिया में बढ़िया छपास की भूख शांत करने के लिए नोट की गड्डिया  बांट रहे हैं। चुनिंदा मीडिया कर्मियों को नोट की गड्डी के तौर पर नजराना पेश करने वाले दलों को इस बात का यकीन है कि इसके जरिए वह बेहतर खबर प्रकाशित कर पार्टी मुखिया की नाक का बाल बन सकते हैं। 22 वर्ष का सूखा खत्म करने के लिए कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी जहां दिन रात एक किए हैं वहीं जिले में पार्टी की रहनुमाई करने वाले उनसे कोई प्रेरणा लेने की बजाय संवाददाताओं की मुट्ठी गरम कर वाहवाही लूटने के फिराक में मशगूल है।

: विज्ञापन की बजाय समाचार से ही मैदान मारने की तैयारी : बाराबंकी। चुनाव आयोग की जिले में नहीं चल पा रही सख्ती। आचार संहिता की धज्जियां उड़ा कर यहां प्रत्याशी मीडिया में बढ़िया छपास की भूख शांत करने के लिए नोट की गड्डिया  बांट रहे हैं। चुनिंदा मीडिया कर्मियों को नोट की गड्डी के तौर पर नजराना पेश करने वाले दलों को इस बात का यकीन है कि इसके जरिए वह बेहतर खबर प्रकाशित कर पार्टी मुखिया की नाक का बाल बन सकते हैं। 22 वर्ष का सूखा खत्म करने के लिए कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी जहां दिन रात एक किए हैं वहीं जिले में पार्टी की रहनुमाई करने वाले उनसे कोई प्रेरणा लेने की बजाय संवाददाताओं की मुट्ठी गरम कर वाहवाही लूटने के फिराक में मशगूल है।

राहुल की जिले में सभाओं को बेहतर कवरजे मिले इसके लिए एक-दो दिन पहले से यह कवायद की गयी। अब भला पार्टी के स्थानीय प्रबंध तंत्र को यह कौन समझाए कि ऐसा करके वह राहुल की साख को बट्टा लगाने का काम कर रहे हैं। राहुल जैसी शख्सियत को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किए जाने को लेकर स्थानीय प्रबंध तंत्र अगर मीडिया का ‘‘मुंह मीठा’’ करने का उपक्रम करता है तो यह निहायत ओछी हरकत ही मानी जाएगी।

इससे पहले पहली बार 16वीं विधानसभा में किस्मत आजमाने वाली पीस पार्टी के कारिन्दे भी ऐसी ही हरकत कर चुके हैं। पार्टी से जुड़े रणनीतिकारों का मानना है कि ‘ले-देकर’ पार्टी के पक्ष में मीडिया के माध्यम से कुछ ऐसा माहौल कायम किया जाए जिससे यह लगने लगे कि पार्टी का जनाधार काफी मजबूत हो गया है। इससे निकट भविष्य में अन्य दलों के साथ आर्थिक तालमेल करने में कोई दिक्कत न हो। मीडियाकर्मियों को नगद राशि से पुरस्कृत करने वाले इन दलों ने आचार संहिता का उल्लघंन न हो इसके लिए यह नायाब तरीका खोज निकाला है। क्योंकि अखबार में विज्ञापन देने पर वह चुनाव आयोग की आंखों में गड़ सकते थे। पैसा फेंको-तमाशा देखो वाली स्टाइल पर कदमताल करते हुए ऐसा किया जा रहा है। इससे पहले लोकसभा चुनाव में व्यापक स्तर पर छद्म विज्ञापनों की झड़ी लगी थी। लगभग हर पार्टी की ओर से खबर के रूप में विज्ञापन छपवाया जा रहा था। इस बार चुनाव आचार संहिता की आंख में धूल झोंकने के लिए लिफाफा थमाया जा रहा है।

जब कांग्रेस और पीस पार्टी इस तरह का टोटका इस्तेमाल कर रही हो तो भला बहुजन समाज पार्टी भी यहां पीछे रहने वाली। बाराबंकी से बसपा ने रेशम राज्यमंत्री संग्राम सिंह को चुनावी दंगल में उतारा है। मुख्यमंत्री मायावती का दौरा भी यहां प्रस्‍तावित है। ऐसे में मीडिया कर्मियों को लाभाविन्त कर ऐसी फिजा तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है जिससे मायावती को लगे कि जिले की सभी छहों सीटों पर पार्टी उम्मीदवार की जीत तय है। फिजा को अमली जामा पहनाने के लिए ही मीडिया का सहारा लिया जा रहा है। ज्यादा से ज्यादा प्रचार पाने के लिए हालांकि इस तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन बसपा उम्मीदवार की ओर से हद कर दी गयी। खुलेआम चुनाव आयोग को बला-ए-ताख पर रखकर ऐसा किया जा रहा है। यहां यह सवाल उठना लाजिमी है कि अगर चुनाव आयोग कांग्रेस, बसपा और पीस पार्टी द्वारा नोट को गड्डियां कांटने के मामले में सख्त कार्रवाई नहीं करती तो उसके अस्तित्व पर भी ऊंगलियां उठने लगेगी।

एक एसएमएस न्यूज सर्विस पर पत्रकारों को नोट बांटे जाने सम्बन्धी खबर के जारी होने के बाद हड़कम्प मच गया। चुनाव पर्यवेक्षक ने मामले की गंभीरता से देखते हुए रेशम राज्यमंत्री संग्राम सिंह के लखनऊ-बहराइच मुख्य सड़क मार्ग पर बने कोल्ड स्टोरेज पर छापा मारा। उल्लेखनीय कि चुनावी दंगल में बैतरणी पार करने की कवायद में जुटे कई दलों के स्थानीय प्रबंध तंत्र द्वारा इस तरह के कारनामें किए गए हैं ताकि नोट के बदले मीडियाकर्मी उनके दल को व्यापक तरजीह दे और उनके पक्ष में कलम से माहौल बनाए। इन दलों का यह मानना है कि ऐसा करने से कलम का रूख मोड़ा जा सकता है।

बाराबंकी से रिजवान मुस्‍तफा की रिपोर्ट.

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