रायगढ़ : पत्रकारिता के नियमों की धज्जियां अगर उड़ती देखनी हो तो रायगढ़ के एक अखबार को देखिये, जिसने तमाम नियमों को ताक पर रखकर एक एचआईवी पीड़ित का न केवल नाम बल्कि उसकी तस्वीर भी छाप दी. दरअसल पुलिस की नौकरी से बीमारी का बहाना बनाकर नक्सल क्षेत्र से भागे पुलिस अधिकारी ने अपना रौब दिखने के लिए इस अखबार का प्रकाशन शुरू करवाया, पर उन्हें पत्रकारिता नहीं आती, न ही उन लोगों को जिन्हें इन्होंने संपादक या सहसंपादक बनाया है.
दरअसल अखबार के मालिक पुलिस में तब तक काम किया जब तक उन्हें मलाईदार पदों पर रखा गया. वैसे साहब ने आरटीओ में भी दो साल अपनी सेवाएँ दी हैं, तभी से उनके पास न केवल कई ट्रक, डम्फर और कई तरह की गाड़ियां आ गयीं बल्कि कई धंधे भी उन्होंने खड़े कर लिए. जब इन धंधों से जी भरा तो एक अखबार निकाल लिया, जिसका नाम "क्रन्तिकारी संकेत" रखा. १७ जनवरी को इन महोदय के अखबार के पहले पन्ने को देखकर सबको हैरत हुयी.
इन्होंने एक एचआईव्ही मरीज का न केवल नाम छापा बल्कि उसके पूरे परिवार की तस्वीर भी छाप दी. हालाँकि इस मामले में रायगढ़ के कलेक्टर और प्रेस कौंसिल ऑफ़ इंडिया को भी शिकायत की गयी है पर उस तरफ से कार्रवाई की कोई पहल नहीं हुयी है. इतना सब होने के बावजूद न इन्होंने इसके लिए क्षमा मांगी और न ही गलती सुधार, बल्कि यह कहकर अपनी डींग हांकते रहे कि हम वो करते हैं, जो कोई नहीं कर सकता. धन्य हैं पत्रकारिता के ऐसे महारथी. पर यहाँ का प्रेस क्लब और पत्रकारों की संस्था भी चुप है यह बहुत ही निराशा जनक है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





