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जनसंदेश टाइम्स, लखनऊ की प्रिंटलाइन में नए प्रकाशक अनुज पोद्दार और संपादक ज्ञानेंद्र शर्मा

करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोपी बाबूलाल कुशवाहा के लखनऊ से प्रकाशित अखबार जनसंदेश टाइम्स में आज प्रिंटलाइन में बड़ा बदलाव कर दिया गया है. इसमें प्रकाशक और संपादक दोनों में नया नाम डाल दिया गया है. प्रधान संपादक के रूप में ज्ञानेंद्र शर्मा का नाम जुड़ गया है तो प्रकाशक के रूप में अनुज पोद्दार का नाम जा रहा है. अब तक प्रधान संपादक के रूप में सुभाष राय का नाम जाता था और प्रकाशक के रूप में सौरभ जैन का. पर काली कमाई के दम पर चल रहे इस अखबार के बल पर घोटालेबाजों को बचाने की जो मुहिम शुरू हुई है उसके तहत अब हर लेवल पर लायजनरों की भर्तियां की जा रही हैं.

करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोपी बाबूलाल कुशवाहा के लखनऊ से प्रकाशित अखबार जनसंदेश टाइम्स में आज प्रिंटलाइन में बड़ा बदलाव कर दिया गया है. इसमें प्रकाशक और संपादक दोनों में नया नाम डाल दिया गया है. प्रधान संपादक के रूप में ज्ञानेंद्र शर्मा का नाम जुड़ गया है तो प्रकाशक के रूप में अनुज पोद्दार का नाम जा रहा है. अब तक प्रधान संपादक के रूप में सुभाष राय का नाम जाता था और प्रकाशक के रूप में सौरभ जैन का. पर काली कमाई के दम पर चल रहे इस अखबार के बल पर घोटालेबाजों को बचाने की जो मुहिम शुरू हुई है उसके तहत अब हर लेवल पर लायजनरों की भर्तियां की जा रही हैं.

ज्ञानेंद्र शर्मा को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का करीबी माना जाता है. चुनाव बाद सपा की सरकार बनने की संभावना को देखते हुए ज्ञानेंद्र शर्मा की ताजपोशी करा दी गई है ताकि वह अपने संपर्कों संबंधों के बल पर सपा सरकार के कार्यकाल में बाबूलाल कुशवाहा एंड कंपनी को संरक्षण दिलाने का काम करते रहेंगे.

उधर, चर्चा है कि बाबूलाल कुशवाहा के घोटाले घपले के तंत्र में सौरभ जैन भी फंस रहे हैं, इसलिए उन्हें भी अखबार से अलग कर दिया गया है ताकि अखबार किसी भी तरह से किसी जांच के दायरे में न आए. देखना है कि जनसंदेश टाइम्स के जरिए सेंटर व स्टेट में पत्रकार व प्रकाशक लोग अपने दागी मालिक के पक्ष में कितना फेवर ले पाते हैं.

चर्चा यह भी है कि बाबू लाल कुशवाहा को सीबीआई जांच में न फंसने देने का दावा करके दिल्ली व लखनऊ में कुछ लोगों ने करोड़ो रुपये वसूले हैं. रुपये वसूलने वाले लोगों ने दस जनपथ से अपनी व अपने लोगों की नजदीकी का हवाला दिया और एकाध कांग्रेसी नेताओं से मीटिंग करा दी. इसके बाद उन्हें करोड़ों रुपये दिए गए और साथ ही अखबार के लिए कार्य करने का मौका. यह चर्चा कितनी सही है या गलत, यह नहीं पता लेकिन सबकी जुबान पर यही बात है कि अगर आप सीबीआई जांच से बचाने और दस जनपथ से नजदीकी का दावा कर सकते हों तो आपको बाबू लाल कुशवाहा के लोग मुंहमांगी कीमत देने के लिए तैयार हैं.

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