ज्ञानेंद्र शर्मा के संपादन में प्रकाशित जनसंदेश टाइम्स के पहले ही अंक में बेशुमार अशुद्धियां हैं और कई लेखों का पुनर्प्रकाशन किया गया है. संपादकीय पेज (पेज-12) तो खासा मजाकिया है. संपादकीय की जगह पर कल की एक खबर को ही संक्षिप्त और पुनर्लेखन कर प्रकाशित किया गया है जबकि संपादकीय पेज के पहले लेख के रूप में वहीं लेख फिर से छपा है जो 23 जनवरी, 2012 (सोमवार) के अंक में राज्य पेज (पेज-15) पर ''सुभाष, गांधी भारत रत्न सम्मान से ऊपर'' शीर्षक से प्रकाशित किया गया था. वहीं संपादकीय पेज पर आज प्रकाशित दूसरा लेख, 17 जनवरी, 2012 (मंगलवार) को पहले पेज पर छप चुका है.
यह पत्रकारिता की दुनिया का हास्यास्पद प्रसंग है कि एक अखबार को अपने संपादकीय पेज के लिए लेख नहीं मिल रहे हैं और उसे अपने ही अखबार में दूसरे पेजों पर प्रकाशित टिप्पणियों को संपादकीय पृष्ठ के लेखों के रूप में फिर से छापना पड़ रहा है. ज्ञानेंद्र शर्मा जबकि महीनों पहले से जनसंदेश टाइम्स का संपादकीय दायित्व संभालने की तैयारी में जुटे थे. याद रहे कि जनसंदेश टाइम्स हाल के दिनों में अपने वैचारिक तेवर के लिए ही जाना गया था. लगता है अब वह लोमहर्षक तेवर के लिए भी जाना जाएगा. ज्ञात हो कि जनसंदेश टाइम्स के प्रधान संपादक सुभाष राय और फीचर एडिटर हरे प्रकाश उपाध्याय ने कल खुद को इस अखबार से अलग कर लिया था.





