दून घाटी के सच्चे सपूत, पर्यावरणविद और कलम के निर्भीक सिपाही नवीन नौटियाल के निधन पर मसूरी की वे हरीभरी वादियाँ आज रो रही होंगी जो उनके प्रयासों से ज़िंदा है. 80 व 90 के दशक में मसूरी की चूना पत्थर खनन व वन माफियाओं के खिलाफ कलम चलाने वाला भले ही आज शांत हो गया हो पर उसके द्वारा जलाई गई पर्यावरण की लौ हमेशा ज़िंदा रहेगी.
मैंने और नवीन ने जौनसार बाबर व रंवाई-जौनपुर से गरीब बेटियों को वेश्यालयों तक पहुंचाने वाले दलालों के खिलाफ मोर्चा खोला था, जिससे कई गरीब बेटियाँ इस दलदल में धंसने से बच गई थी. पहाड़ व कलम के सिपाही एव मेरे अजीज मित्र को मेरी श्रधांजलि.
वरिष्ठ पत्रकार विजेंद्र रावत की रिपोर्ट.





