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होशियारपुर में दैनिक सवेरा का कार्यालय खुला, और चर्चा शुरू

होशियारपुर में दैनिक सवेरा का दफ्तर आखिर खुल ही गया है. बस अड्डे के ऊपर कमरा नम्बर तीन में दिव्य हिमाचल के दफ्तर में ही अब सवेरा होने लगा है. यही नहीं दफ्तर पर आज भी बोर्ड तो दिव्य हिमाचल का ही लगा है. अंदर बैठने वालों में एक दिव्य हिमाचल का जिला ब्यूरो चीफ़ है तो एक जागरण के विज्ञापन का पैसा न चुकाने के कारण निकाल बाहर किया गया एक पूर्व पत्रकार है. जिले के दसूहा इलाके का रहने वाला यह आदमी सवेरे ९ से शाम ५ बजे की क्लर्की करके वापस भागने को उतावला रहता है.

होशियारपुर में दैनिक सवेरा का दफ्तर आखिर खुल ही गया है. बस अड्डे के ऊपर कमरा नम्बर तीन में दिव्य हिमाचल के दफ्तर में ही अब सवेरा होने लगा है. यही नहीं दफ्तर पर आज भी बोर्ड तो दिव्य हिमाचल का ही लगा है. अंदर बैठने वालों में एक दिव्य हिमाचल का जिला ब्यूरो चीफ़ है तो एक जागरण के विज्ञापन का पैसा न चुकाने के कारण निकाल बाहर किया गया एक पूर्व पत्रकार है. जिले के दसूहा इलाके का रहने वाला यह आदमी सवेरे ९ से शाम ५ बजे की क्लर्की करके वापस भागने को उतावला रहता है.

सवेरा के संपादक चेतन शारदा का दुलार वाला यह पत्रकार जागरण के वक्त से उनका चहेता है. दसूहा से इसके पत्रकार होते हुए भेजे गए विज्ञापन के हजारों रुपये वसूलने को जागरण के विज्ञापन वाले इसके घर तक जा चुके हैं, पर एक पैसा नहीं निकल पाए. ये जानते हुए भी शारदा जी ने इसे होशियारपुर में सवेरा में रख लिया, जिसे लेकर पत्रकार बिरादरी में खासी चर्चा है. यही नहीं मुकेरियां से इनका एक पत्रकार भी जागरण का पुराना डिफाल्टर है. उसे भी एक स्कूल से विज्ञापन का पैसा लेकर हज़म कर जाने और ऐसे ही अन्य आरोपों को लेकर जागरण से निकाल बाहर किया गया. जब जागरण वाले उस स्कूल में पैसा वसूलने पहुंचे तो स्कूल वाले ने तो इस बारे में लिखित शिकायत भी की थी. अब ऐसी टीम के साथ सवेरा में कब क्या हो जाये ये तो ऊपर वाला ही जाने! 

उधर अमर उजाला की चुनावी जंग भी अब बंद हो चुकी है और गाय के साथ बछड़ा फ्री में वाली स्कीम की मदद से उपर चढ़ी अमर उजाला उजाला की सर्कुलशन भी वापस लौटने लगी है. असल में अमर उजाला ने एक बड़ी गलती की कि गाय (अमर उजाला) के साथ बछड़ा ( चुनावी जंग) फ्री में वाली स्कीम तो लाये लेकिन बछड़ा (चुनावी जंग) एक रुपए में अलग से बेच दिया, जिसे लोगों ने हाथों हाथ लिया पर अब जब बछड़ा नहीं है तो गाय को ले जाने वाले फिर से खोजने पड़ रहे हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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