श्री एस. वाय कुरेशी, मुख्य चुनाव आयुक्त, भारत का निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली। विषय : चुनाव खर्च-ब्योरा। माननीय महाशय, पंजीकृत गैर-मान्यताप्राप्त दलों को दो सप्ताह का प्रचार समय मिलता है। इस अवधि में तीन बार वित्तीय प्रेक्षकों के समक्ष जाना तथा तकनीकी ढंग से चुनाव खर्च और चन्दे का ब्योरा रखना बहुत जटिल और अव्यावहारिक प्रक्रिया होती है। खर्च-प्रेक्षक वास्तविक खर्च की बजाए स्थानीय-प्रशासन द्वारा अनुमानित खर्च को लिखने का आग्रह रखते हैं जो असत्य को बढ़ावा देना है। खर्च का अपना अनुमान लगाने के लिए तो वे स्वतंत्र हैं।
भारतीय वित्त सेवा से जुड़े इन प्रेक्षकों को लोकतंत्र और चुनाव के बारे में बुनियादी समझदारी नहीं है। 'प्रेस विज्ञप्ति' फोटोस्टेट करने और भेजने के खर्च का उल्लेख करने पर यह कहते हैं, " आपको विज्ञप्ति जारी करने की क्या आवश्यकता है? कहीं यह 'पेड न्यूज' तो नहीं?" सिर्फ विज्ञापन देने वाले प्रत्याशियों की खबरें छापने की नीति अपनाने वाले अखबारों के अलोकतांत्रिक आचरण को आपके प्रेक्षक नहीं समझ पाते हैं और इसलिए पकड़ भी नहीं सकते।
बहरहाल, हमारी चुनाव आयोग से चुनाव-सुधार की दिशा में मांग है कि आयोग इन पन्द्रह दिनों के लिए हर प्रत्याशी का खर्च रखने के लिए आयोग के खर्च पर प्रशिक्षित हिसाबनवीस रखने की व्यवस्था करे। यह छोटा-सा सुधार चुनाव में शुचिता रखने की दिशा में अत्यन्त महत्वपूर्ण साबित होगा।
सधन्यवाद,
विनीत,
अफलातून
प्रत्याशी- समाजवादी जन परिषद ,
390 वाराणसी कैन्ट वि,स. क्षेत्र





