वाईके शीतल उर्फ योगेश कुमार शीतल इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मास कम्यूनिकेशन (आईआईएमसी) जैसे संस्थान से पत्रकारिता की पढ़ाई पढ़कर जब सक्रिय मीडिया जीवन में कूदे तो इन्हें जो दिखाई पड़ा और उसको लेकर जो स्वाभाविक रिएक्शन दिया, उसके बाद वे सफल संपादक बनने की जगह मीडिया एक्टिविस्ट बनने की तरफ खुद ब खुद बढ़ चले. गलत के खिलाफ बेबाकी से बोलने व लिखने की अपनी आदत के चलते यह युवा पत्रकार कई स्वनामधन्य संपादकों की आंखों की किरकिरी बन गया. बरखा दत्त जब करप्शन के मुद्दे पर इंडिया गेट पर प्रोग्राम कर रहीं थीं तो इस युवा पत्रकार ने उनसे उनके नीरा राडिया के संबंधों के बारे में पूछकर उनके खुद के भ्रष्टाचार पर सवाल उठा दिया. उसके बाद तो बवाल मच गया.
शीतल को तरह तरह से प्रताड़ित करने की कोशिश की गई. शीतल इन दिनों फेसबुक व ट्विटर के जरिए मीडिया के डेमोक्रेटाइजेशन की मुहिम चला रहे हैं. उन्होंने जस्टिस मार्कंडेय काटजू को ट्विटर पर आने को प्रेरित किया. शीतल ने चुनाव आयोग को ट्विटर-फेसबुक पर आने के लिए अभियान चला रखा है ताकि लोग चुनाव में मीडिया के पेड न्यूज के खिलाफ चुनाव आयोग से सीधे शिकायत कर सकें. डेमोक्रेसी और मीडिया के भले के लिए काम कर रहे इस युवा पत्रकार व एक्टिविस्ट को इन दिनों एक बड़ी कड़वी सच्चाई से रुबरु होना पड़ रहा है. कई महान संपादकों ने शीतल को ट्विटर पर उन्हें फालो करने से रोक दिया है. ब्लाक कर दिया है.
जाहिर है, शीतल के कड़वे सवालों से ये संपादक रुबरु नहीं होना चाहते होंगे इसलिए अच्छा समझा कि वे सामने वाले को ब्लाक कर दें ताकि उसकी बात उन्हें सुनाई ही नहीं पड़े. न्यू मीडिया ने ब्लाक करने की सुविधा दी है, और ये संपादक लोग इसका इस्तेमाल भी कर रहे हैं. तो इसमें किसी को आपत्ति क्यों होनी चाहिए. ये सवाल सही है. लेकिन जरा सोचिए जो लोग अभिव्यक्ति की आजादी की बात करते हैं, इसी अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर स्थापित मीडिया के पक्ष में लिखते बोलते दिखते रहते हैं, वे ही लोग किसी दूसरे की आवाज खुद तक आने को इसलिए ब्लाक कर देते हैं इसलिए रोक देते हैं क्योंकि इससे उन्हें असुविधा होती है, इससे उन्हें सवालों के घेरे में आना पड़ता है. कम से कम इन संपादकों में स्वस्थ आलोचना करने वालों को बर्दाश्त करने का धैर्य होना ही चाहिए. अगर नहीं है तो ये लोग थोड़ा जस्टिस मार्कंडेय काटजू से सबक लें.
काटजू साहब अभी कुछ ही दिनों पहले ट्विटर पर आए और उन्होंने खुला ऐलान कर दिया कि लोग आएं और उनकी आलोचना करें, उन्हें इससे कोई दिक्कत नहीं. उन्होंने बाकायदा ऐसा ट्विट किया है. जस्टिस काटजू कोई संपादक नहीं है. कोई पत्रकार नहीं रहे हैं. लेकिन वे अभिव्यक्ति की आजादी के पुरजोर पक्षधर हैं और इसीलिए अपनी आलोचना करने वालों से घबराते नहीं बल्कि उनसे तार्किक तरीके से बात बहस करते हैं. ट्विटर पर जस्टिस काटजू ने कई पत्रकारों को उनके लिखे पर अपना जवाब लिखकर सोचने को मजबूर कर दिया. राजदीप सरदेसाई को तो बाकायदे माफी मांगनी पड़ गई. पर क्या ये राजदीप सरदेसाई, पंकज पचौरी, प्रभु चावला, बरखा दत्त, सागरिक जैसे लोग काटजू से सबक सीख सकते हैं जो ट्विटर पर सभी को आने व उनकी आलोचना करने को आमंत्रित करते हैं पर दूसरी तरफ ये महान संपादक शीतल जैसे मीडिया एक्टिविस्ट की आवाज सुनना नहीं पसंद करते हैं इसलिए उसे फालो करने से रोक देते हैं, ब्लाक कर देते हैं. इस उलटबांसी के निहितार्थ अगर समझ सकें तो समझ लेंगे कि इस देश में मीडिया में डेमोक्रेसी का आलम क्या है.

जस्टिस मार्कंडेय काटजू से मीडिया के ज्वलंत मुद्दों पर अपनी बात रखते युवा पत्रकार वाईके शीतल.
वाईके शीतल इस पूरे मसले पर किस तरह सोचते हैं, उसे आप उनके ब्लाग के एक पोस्ट के जरिए जान सकते हैं जिसमें उन्होंने लिखा कुछ नहीं है, सिर्फ ट्विटर के स्क्रीनशाट डाले हैं और तस्वीरें डाली हैं. Fact of Article 19(A) नामक शीर्षक वाली यह पोस्ट बहुतों को आइना दिखाने और उन्हें शर्मसार करने के लिए काफी है, बशर्ते उनकी देह में अब भी शर्म और आंखों में पानी बाकी हो. चलो, मान लेते हैं कि कारपोरेट बनते मीडिया हाउसों में नौकरी करने की ढेरों मजबूरियां होती हैं, लेकिन किस मालिक ने अपने संपादक को निर्देश दिया है कि वाईके शीतल को ट्विटर पर फालो किए जाने से रोक दिया जाए. है किसी के पास कोई जवाब?
कुछ स्क्रीनशाट यहां दिए जा रहे हैं जिससे पता चलता है कि वाईके शीतल ने जब इन दिग्गजों को फालो करने की कोशिश की तो इन संपादकों ने उन्हें फालो करने से रोक दिया, जिसके बाद ट्विटर की तरफ से वाईके शीतल को मैसेज दिखाया गया कि आप इन्हें फालो नहीं कर सकते क्योंकि इन्होंने आपको ब्लाक कर दिया है….





और ये है काटजू साहब का ट्विट जिसमें उन्होंने सबको आने, और उन्हें गरियाने का खुला निमंत्रण दिया है….

पल्लवी घोष को कैसा करारा जवाब दिया है जस्टिस काटजू ने, इस स्क्रीनशाट के जरिए देख पढ़ सकते हैं…

जस्टिस काटजू पर एक सज्जन कुछ इस अंदाज में सवाल उठाया, व्यंग्य किया तो जस्टिस काटजू ने उनका भी जवाब दिया, अपने तरीके से…

राजदीप सरदेसाई ने कुछ कहा, लोगों ने काटजू की तरफ ध्यान दिलाया तो काटजू ने शालीनता से जवाब दिया, फिर राजदीप ने माफी मांग ली…



भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत की रिपोर्ट.





