इन दिनों हिन्दुस्तान दिल्ली में मार्केटिंग के लोगों ने हो हल्ला मचा रखा है। इन फीचर पन्नों में विज्ञापन निरंतर घटता जा रहा है। खास तौर पर शुक्रवार को छपने वाली महिलाओं की मैगजीन अनोखी का हाल सबसे बुरा है। लेखकों ने इसकी वाट लगा रखी है। मिल रही बहुत सी शिकायतों के चलते प्रबंधन कुछ कड़े कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। आने वाले दिनों में जिम्मेदारियों में भारी बदलाव देखने को मिलेंगे। स्तरहीन कवर स्टोरीज से पाठकों का भी मोहभंग हो रहा है।
खबर है कि एचएमवीएल के सर्वेसर्वा अमित चोपड़ा इन दिनों फीचर पन्नों से बेहद नाराज हैं। इसके संकेत उन्होंने मार्केटिंग टीम के जरिए फीचर टीम तक भी पहुंचा दिए हैं। दरअसल फीचर टीम में कुछ चम्मचों के चलते रंगीन पन्नों की रेटिंग लगातार नीचे आ रही है। कहने को 17 लोगों की टीम फीचर देख रही है परंतु गुणवता की कसौटी में अन्य अखबारों के फीचर की तुलना में 19 ठहरते हैं। फीचर इंचार्ज अपने सथियों से करीब 200 मीटर की दूरी अपने केबिन में बैठती हैं।
फीचर में काम करने वाले 95 प्रशित लोग अपने ड़यूटी समय से 1 बजे की बजाय दोपहर 3 बजे ऑफिस पहुंचते हैं। डेस्क महिला कर्मियों को हाल तो बहुत ही बुरा है। वे ऑफिस में कुल 6 घंटे टिकती हैं। इसमें से भी करीब आधा समय वे फेसबुक में अपने चैट फ्रेंड के साथ व्यस्त रहती हैं। पिछले दिनों प्रधान संपादक ने कुछ महिला कर्मियों को हिदायत दी थी कि पेज मेकिंग सीख लें वरना अंजाम बुरा होगा। परंतु कर्मियों ने एक कान से सुना दूसरे से निकाल दिया।
शायद काम के प्रति इतनी लापरवाही इन दिनों सरकारी दफ्तरों में भी देखने को न मिले। कुछ कर्मी जो ऑफिस आते ही आओ राजनीति नहीं करते अपने काम से काम रखते हैं। उन्हें उपेक्षित रखा जाता है। खाने-पीने का सामान मंगाने पर उन्हें झूठे मुंह ही सही पूछा तक नहीं जाता। विभाग का ऑफिस के कुल समय का बहुत बड़ा हिस्सा खाने-पीने, फेसबुक में, अपनी सीट से नदारद होकर खरीदारी करने में बीतता है। प्रमोशन की बंदरबाट का यह नतीजा है कि चीफ कॉपी एडिटर पर काम कर रहे कुछ कर्मी इंटर्न की तरह काम कर रहे हैं। विभाग में जब से महिला कर्मी बढ़ी हैं हालात बद से बदतर हो गए हैं।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





