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बसपा प्रत्‍याशियों के लिए मुसीबत बनी सत्‍ता की जवाबदेही

बाराबंकी। पिछले विधानसभा चुनाव में बाराबंकी के सपाई दुर्ग को ढहा देने वाली बसपा इस चुनाव में सियासी झंझावतों से घिरी नजर आ रही है। जिले की एक दो सीटों पर यदि उसके मुकाबले को छोड़ दिया जाये तो उसके प्रत्याशियों के लिए अन्य सीटों पर पूरे पांच साल रही सत्ता अथवा उसकी जवाबदेही मुसीबत का रूप धारण कर चुकी है। ऐसे में यह चुनाव बसपा के लिए अग्निपरीक्षा साबित होते दिखाई दे रहा है।

बाराबंकी। पिछले विधानसभा चुनाव में बाराबंकी के सपाई दुर्ग को ढहा देने वाली बसपा इस चुनाव में सियासी झंझावतों से घिरी नजर आ रही है। जिले की एक दो सीटों पर यदि उसके मुकाबले को छोड़ दिया जाये तो उसके प्रत्याशियों के लिए अन्य सीटों पर पूरे पांच साल रही सत्ता अथवा उसकी जवाबदेही मुसीबत का रूप धारण कर चुकी है। ऐसे में यह चुनाव बसपा के लिए अग्निपरीक्षा साबित होते दिखाई दे रहा है।

बसपा सुप्रीमो मुख्यमंत्री ने बाराबंकी मुख्यालय पर भारी भीड़ इकट्ठा कर यह तो दिखा दिया कि आज भी वे अथवा उनका दल जनता में कमजोर नहीं है। लेकिन यदि जिले की आधा दर्जन विधानसभा सीटों के सियासी हालातों पर दृष्टि डाली जाये तो यह स्थिति उभरकर सामने आ रही है कि इस बार बसपा को पुरानी सफलता दोहराने के लिए किसी चमत्कार की प्रतीक्षा है। सत्ता में रही बसपा ने इस बार रामनगर से अपने विधायक अमरेश शुक्ला, कुर्सी से विधायक मीता गौतम, बाराबंकी से राज्यमंत्री संग्राम सिंह वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा है। यही नहीं पूर्व में सिद्धौर से विधानसभा रही व अब समाप्त होकर जैदपुर विधानसभा बनी सीट पर पार्टी ने डा. वेद प्रकाश रावत को अपना प्रत्याशी बनाया है।

ज्ञात हो कि डा. रावत क्षेत्र की विधायक श्रीमती धर्मी रावत के पुत्र हैं। जबकि हैदरगढ़ विधानसभा में संगठन के वरिष्ठ नेता राम नरायन रावत हाथी के निशान से उतारे गये है। वहीं दरियाबाद में पार्टी ने एक बार फिर अपने रनर प्रत्याशी विवेकानंद पाण्डे पर भरोसा जताया है। साफ है कि पार्टी ने पूरा प्रयास किया है कि किसी भी स्तर पर बाराबंकी में पुरानी सफलता को इस बार भी कायम रखना है। लेकिन जो हालात हैं वे बसपा को उसकी मंजिल पर पहुंचायेंगे इसे लेकर बाधाओं के बड़े पहाड़ दिखाये दे रहे हैं?

चर्चा है कि बसपा जहां रामनगर में सपा से सीधे दो-दो हाथ करेगी वहीं विधानसभा दरियाबाद में उसने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। जबकि बसपा के राज्यमंत्री संग्राम सिंह वर्मा बाराबंकी में कांग्रेस व सपा, भाजपा तथा निर्दलीय मुकेश सिंह से घिरकर कड़े मुकाबले में जा फंसे नजर आ रहे हैं। जहां तक सवाल है कि जैदपुर का तो वहां अभी चुनावी युद्ध कांग्रेस और सपा के बीच फंसा नजर आ रहा है। बसपा यहां आगे आने के लिए जद्दोजहद कर रही है। हैदरगढ़ में बसपा पिछले कई चुनावों से नम्बर तीन पर ही रही है यहां पर पार्टी का प्रयास है कि वह मुख्य लड़ाई में आ जाये। फिलहाल बसपाइयों का दावा यही है कि उनकी टक्कर भाजपा से है और वे सफलता से आगे बढ़ रहे है। कुर्सी विधानसभा में बसपा विधायक रही मीता गौतम का चुनाव उनके अपने कर्मों की वजह से ठहराव की ओर नजर आ रहा है। जनता से दूरी और कोई उल्लेखनीय विकास न करवा पाना मीता के लिए परेशानी का सबब सा साबित हो रहा है। दरियाबाद में जरूर विवेकानंद पाण्डे ने कांग्रेस व सपा के साथ बसपा को खड़ा कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। लेकिन यहां बसपा के लिए भाजपा प्रत्याशी पंडित सुन्दर लाल दीक्षित सिरदर्द बने दिखाई दे रहे हैं।

इस प्रकार साफ है कि बसपा की स्थिति जिले में पिछले चुनाव जैसे होगी इसे लेकर सवालिया निशान है। क्योंकि जनपद में चाहे तराई इलाका हो या फिर चाहे मैदानी इलाका हो अथवा चाहे शहरी क्षेत्र बसपा के पास ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जिसे विकास कहके वह चुनाव में जनता के वोट पा सके। जबकि पूर्व में बाराबंकी में बेशकीमती पार्क की जमीन पर बसपा के लोगों का कब्जा करना, स्थानीय एक चीनी मिल को कौड़ियों के दाम बसपा नेता के हाथों बिक जाना पार्टी के लिए मुसीबत बना दिखाई दे रहा है। ऐसे में यह विधानसभा चुनाव सत्ता दल के लिए अग्नि परीक्षा है। इससे वह कैसे उभरेगी यह जाने बसपा अथवा उसके नेता।

बाराबंकी से रिजवान मुस्‍तफा की रिपोर्ट.

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