Connect with us

Hi, what are you looking for?

No. 1 Indian Media News PortalNo. 1 Indian Media News Portal
Local News Community

विविध

हे भगवान! उत्‍तराखंड को नीतीश या परमार जैसा सीएम देना

उत्तराखंड के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद है. रिजल्ट 6 मार्च को बाहर निकलेगा पर तब तक मैं राज्य के एक वोटर, पत्रकार व शुभ चिन्तक के नाते खुदा व उत्तराखंड के देवताओं से प्रार्थना तो कर ही सकता हूँ कि इस गरीब राज्य को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या फिर हिमाचल प्रदेश के जनक कहे जाने वाले पहले मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह परमार जैसा मुख्यमंत्री देना जो पहाड़ में रह रहे बीमार महिलाओं का इलाज व खचाखच भरी जीपों में रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर भागते युवाओं को वहीं रोक सके. मेरे पास कई युवा आते हैं जो दो हजार रुपये महीने की नौकरी के जुगाड़ के लिए भी मिन्‍नतें करते हैं यानी हमारी सरकार एक युवक के लिए उसके गांव के निकट दो हजार रुपये की व्यवस्था तक नहीं कर पायी जो अफसोसजनक के साथ दर्दनाक बात भी है.

उत्तराखंड के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद है. रिजल्ट 6 मार्च को बाहर निकलेगा पर तब तक मैं राज्य के एक वोटर, पत्रकार व शुभ चिन्तक के नाते खुदा व उत्तराखंड के देवताओं से प्रार्थना तो कर ही सकता हूँ कि इस गरीब राज्य को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या फिर हिमाचल प्रदेश के जनक कहे जाने वाले पहले मुख्यमंत्री डा. यशवंत सिंह परमार जैसा मुख्यमंत्री देना जो पहाड़ में रह रहे बीमार महिलाओं का इलाज व खचाखच भरी जीपों में रोज़गार की तलाश में शहरों की ओर भागते युवाओं को वहीं रोक सके. मेरे पास कई युवा आते हैं जो दो हजार रुपये महीने की नौकरी के जुगाड़ के लिए भी मिन्‍नतें करते हैं यानी हमारी सरकार एक युवक के लिए उसके गांव के निकट दो हजार रुपये की व्यवस्था तक नहीं कर पायी जो अफसोसजनक के साथ दर्दनाक बात भी है.

मैं भगवान बद्रीनाथ से प्रार्थना करता हूँ कि यदि कुछ ऐसा जुगाड़ हो जाए कि उत्तराखंड के भावी मुख्यमंत्री के शरीर में इन दोनों ही नेताओं की आत्मा प्रवेश कर जाए तो इस गरीब प्रदेश का उद्धार ही हो जाए..! खैर, बागवानी के लिए हिमांचल से टक्कर लेने वाले इस प्रदेश में अब तक उस गरीब किसान के खेतों की मिट्टी की जांच की व्यवस्था तक नहीं हो पायी जो अपने खेतों में बागवानी करना चाहते हैं. पहाड़ में कैंसर जैसी भयानक पीड़ा से जूझती महिलाओं के लिए आज भी ग्राम देवता एक मात्र सहारा है जो कांपकर बताता है कि उस पर पड़ोसी महिला (डायन) की छाया है, जिसके कारण यहाँ के सैकड़ों परिवार एक-दूसरे के जान के दुश्मन बन रहे हैं. पहाड़ की रीढ़ कही जाने इन महिलाओं के बारे में किसी को कोई चिंता नहीं है. देहरादून में बैठे नेता तथा नौकरशाह भले ही मुफ्त में सरकार की करोड़ों की दवाएं व टानिक डकार जाते हों पर इन महिलाओं के स्वास्थ्य की जांच की किसी को कोई चिंता नहीं. कम से कम इनके स्वास्थ्य की जांच करके इन्हें एक हेल्थ कार्ड ही मुहैया करवा दें ताकि वे कर्ज लेकर ही सही अपना सही इलाज तो करवा सकें. एक सर्वे के अनुसार पहाड़ की 60 फीसदी से ज्यादा महिलाओं में खून की कमी है और इतनी ही महिलायें किसी न किसी बीमारी के साथ जी रही हैं.

मुख्यमंत्री खंडूड़ी का अपने चुनाव नामांकन के लिए बर्फ में पैदल चलता एक फोटो अखबारों में छपा, लोगों ने कहा, देखो मुख्यमंत्री पैदल चल रहे हैं..पर इन्हे क्या पता कि वे अपने नामांकन के लिए पैदल चले न कि जनता के किसी काम के लिए. तारीफ़ तो तब है जब मुख्यमंत्री जनता के किसी काम के लिए पैदल चले. हिमाचल के पहले मुख्यमंत्री डा. परमार अपने पूरे सचिवालय के साथ हफ्तेभर पैदल चलकर पहाड़ी गाँव में ठहरते थे और उनके लिए विकास की योजनायें बनाकर उन्हें लागू करवाते थे. जानकार बताते हैं कि उनके अपने थैले में सरकारी फाइलों के अलावा सुई-तागा भी होता था, जिसके बारे में उनका कहना था कि ..मंत्री हो या संत्री यदि पहाड़ चढ़ते समय पजामा फट जाए तो सुई-तागा ही लाज बचाते हैं. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब अपनी ही पार्टी के बाहुबली गुंडों व माफियाओं को सलाखों के पीछे पहुंचाया और भ्रष्टाचार की कमाई से बनी भव्य इमारतों में गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोले तो बिहार में फैले जातिवाद के कैंसर व राजनीतिक अराजकता ने नीतीश के सामने घुटने टेक दिए.

उत्तराखंड में …खंडूड़ी है जरूरी…के नारे ने जमकर गुल खिलाये… खंडूड़ी से आम उत्तराखंडी को बहुत आस थी उन्हें लगा कि उनके आते ही भ्रष्टाचारी जेल में होंगे पर ऐसा कुछ हुआ नहीं. मुख्यमंत्री के साथ वही नौकरशाह जमे हैं जिन्हें निशंक सरकार किसी ख़ास मिशन के लिए उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड लाये थे, वे जमे ही नहीं हैं बल्कि खंडूड़ी सरकार के भी ख़ास बने हैं. उत्तराखंड में लोकपाल विधेयक पास हुआ.. उसकी अन्ना ने भी तारीफ़ की पर विधेयक को ड्राफ्ट करने वाले नौकरशाह अपना काम कर गए जिससे यह क़ानून आम आदमी की सुरक्षा करने वाला कम और डराने वाला ज्यादा बन गया. इसके तहत यदि किसी की शिकायत गलत मिली तो उस पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. इस दंड का डर आम आदमी को लोकपाल की चौखट में जाने से रोकेगा. जहां गरीब आदमी थाने व अदालत में अधिकाँश मुकदमे इसलिए हार जाता है कि उसके सच्चे गवाह भी पैसे वालों के सामने टूट जाते हैं, लोकपाल के सामने भी एक पैसे वाला भ्रष्ट नौकरशाह एक गरीब की शिकायत को पैसे के बल पर आसानी से झूठा साबित करवा सकता है. लेने के देने न पड़ जाएँ इसके भय से आम आदमी किसी भ्रष्ट नेता व नौकरशाह के खिलाफ आसानी से शिकायत की हिम्मत नहीं जुटा पायेगा.

दुःख की बात है कि इस बार पहाड़ में विकास के नाम पर नहीं बल्कि जाति व क्षेत्र के नाम पर वोट मांगे गए और किसी भी नारे से हिट रहा मुर्गा व शराब!! मुर्गा भक्षियों से जब मैंने सवाल किया तो उनका जवाब भी निरुत्तर करने वाला था.. उनका कहना था कि वोट के बाद पांच साल तक तो इनका पता नहीं चलेगा इसलिए कम से कम मुर्ग मुसल्लम ही सही कुछ तो हाथ लगे!!! उत्तराखंड के भाग्य विधाताओं से आग्रह है कि वे एक बार उत्तराखंड व हिमाचल प्रदेश की सीमा पर चार दिन का प्रवास जरूर करें और देखे के कैसे सामान प्राकृतिक परिस्थितयों वाल हिमाचल का रोहाड़ू व कोटखाई क्षेत्र बागवानी से बेहद संपन्न हो गया है तो दूसरी ओर उत्तराखंड का मोरी व त्योनी क्षेत्र है जहाँ बेहद गरीबी व बागवानी शून्य है. ऐसे नौकरशाहों को  राज्य से बाहर कर दें जो पहाडी गरीबों को दुत्कारे और उसका मखौल उडाये. देहरादून का सचिवालय ऐसे तत्वों से भरा पडा है और उनके पास सबसे अहम जिम्मेदारियां सौपी गयी हैं पर ईमानदार अधिकारी आज भी किनारे बैठे हैं.

उत्‍तराखंड से वरिष्‍ठ पत्रकार विजेंद्र रावत की रिपोर्ट.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

… अपनी भड़ास [email protected] पर मेल करें … भड़ास को चंदा देकर इसके संचालन में मदद करने के लिए यहां पढ़ें-  Donate Bhadasमोबाइल पर भड़ासी खबरें पाने के लिए प्ले स्टोर से Telegram एप्प इंस्टाल करने के बाद यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia 

Advertisement

You May Also Like

विविध

Arvind Kumar Singh : सुल्ताना डाकू…बीती सदी के शुरूआती सालों का देश का सबसे खतरनाक डाकू, जिससे अंग्रेजी सरकार हिल गयी थी…

विविध

: काशी की नामचीन डाक्टर की दिल दहला देने वाली शैतानी करतूत : पिछले दिनों 17 जून की शाम टीवी चैनल IBN7 पर सिटिजन...

विविध

पहली बार चुनाव हमने 1967 में देखा था. तेरह साल की उम्र में. और अब पहली बार ऐसा चुनाव देख रहे हैं, जो इससे...

विविध

राजस्थान, कांग्रेस और सेक्स. ये तीन शब्द लगता है आपस में अच्छे से घुल मिल गए हैं. भंवरी कांड में ये तीनों शब्द जुड़े...