नई दिल्ली : फेसबुक, गूगल, याहू तथा अन्य वेबसाइट को कथित आपत्तिजनक सामग्री के मामले में अदालत में घसीटने वाले इस्लामिक विद्वान की वेबसाइट से किसी ने छेड़छाड़ कर इसे विकृत बना दिया है और इस पर संदेश लिखा है कि सोशल नेटवर्किग साइट को लेकर इतनी नाराजगी ठीक नहीं। याचिकाकर्ता मुफ्ती ऐजाज अरशद कासमी ने बताया कि उनकी वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट फतवाऑनलाइन डॉट इन पिछले एक सप्ताह से विकृत है। अब उन्होंने इसके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की योजना बनाई है।
कासमी ने बताया कि वेबसाइट पर लिखे संदेश में तीन जनवरी, 2012 की तिथि अंकित है। यह संदेश समाचार तथा वेबसाइट के अन्य अद्यतन स्तम्भ में पिछले सप्ताह लिखा गया। उन्होंने बताया कि होम पेज पर संदेश के अतिरिक्त वेबसाइट के कुछ अन्य खंड भी ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। साइबर हमले का इन पर भी असर हुआ है। वेबसाइट पर इस साइबर हमले को सोशल नेटवर्किग साइट के खिलाफ अपनी याचिका से जोड़ते हुए कासमी ने कहा कि हैकर सम्भवत: नहीं चाहते कि यह मामला अदालत में चले। वेबसाइट पर 5,000 से अधिक पृष्ठ हैं और इसका उद्घाटन 21 मई, 2006 में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने किया था। इसका संचालन इस्लामिक पीस फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा किया जाता है। दक्षिणी दिल्ली के जामिया नगर में रहने वाले कासिम ने बताया कि इस वेबसाइट के जरिए वह लोगों के इस्लाम से संबंधित सवालों के जवाब देते हैं। फेसबुक, याहू, गूगल तथा अन्य वेबसाइटों के खिलाफ कथित आपत्तिजनक सामग्रियों को लेकर कासिम की याचिका पर दिल्ली की एक अदालत में सुनवाई एक मार्च को होगी।
दिख सकती हैं फेसबुक से हटाई गई तस्वीरें : लंदन : आपको यह जानकर झटका लग सकता है कि आपने अपनी जिन निजी तस्वीरों को अपने फेसबुक एकाउंट से हटा दिया था वे अब भी इंटरनेट की दुनिया में उपलब्ध हैं। उन्हें आसानी से देखा जा सकता है। तस्वीरों को हटाने के बाद भी वे इंटरनेट की दुनिया से गायब नहीं होतीं। डेली मेल के मुताबिक फेसबुक से संबद्ध कंपनी ने स्वीकार किया है कि उसकी प्रणाली में तस्वीरें हमेशा एक उचित अवधि में नहीं हटाई जाती हैं। साइट को देखने पर आपको लगेगा की उससे आपकी फोटोग्राफ्स हट गई हैं लेकिन तस्वीरों के सीधे यूआरएल लिंक के जरिए इन्हें देखा जा सकता है। इसका मतलब है कि ई-मेल के जरिए कोई तस्वीर भेजी जाए तो वह इंटरनेट पर रहती है और उसे कोई भी देख सकता है। (एजेंसी)





